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शनिवार, मई 28, 2022

यही हरि भक्त कहते हैं - उमा

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यही हरि भक्त  कहते हैं, यही सद्-ग्रन्थ गाते हैं ।
कि जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते हैं ॥

नहीं स्वीकार करते हैं निमंत्रण नृप सुयोधन का ।
विदुर के घर पहुंचकर भोग छिलकों का लगाते हैं ॥
कि जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते हैं ।
यही हरि भक्त  कहते हैं, यही सद्-ग्रन्थ गाते हैं ॥

न आये मधुपुरी से गोपियों की दुख कथा सुनकर ।
द्रुपदाजी की दशा पर द्वारका से दौड़ आते हैं ॥
यही हरि भक्त  कहते हैं, यही सद्-ग्रन्थ गाते हैं ।

न रोये वन-गमन में श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में आंसू बहाते हैं ॥
न जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते हैं ।
यही हरि भक्त  कहते हैं, यही सद्-ग्रन्थ गाते हैं ॥

कठिनता से चरण धोकर मिले कुछ 'बिन्दु' विधि हर को ।
वो चरणोदक स्वयं केवट के घर जाकर लुटाते हैं ॥
कि जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते हैं ।
यही हरि भक्त  कहते हैं, यही सद्-ग्रन्थ गाते हैं ॥

शुक्रवार, मई 27, 2022

कान्हा तोरी जोहत रह गई बाट - उमा

कान्हा तोरी जोहत रह गई बाट ।

जोहत जोहत एक पग ठानी,
कालिंदी के घाट,
कान्हा तोरी जोहत रह गई बाट ।

झूठी प्रीत करी मनमोहन,
या कपटी की बात,
कान्हा तोरी जोहत रह गई बाट ।

मीरा के प्रभु गिरघर नागर,
दे गियो बृज को चाठ,
कान्हा तोरी जोहत रह गई बाट ।

गुरुवार, मई 26, 2022

अबकी टेक हमारी - उमा

अबकी टेक हमारी, लाज राखो गिरिधारी।

जैसी लाज रखी पारथ की, भारत जुद्ध मंझारी। 
सारथि होके रथ को हांक्यो, चक्र-सुदर्शन-धारी।
भगत की टेक न टारी।
अबकी टेक हमारी…

जैसी लाज रखी द्रौपदि की, होन्हिं न दीन्हिं उघारी। 
खैंचत खैंचत दोऊ भुज थाके, दु:शासन पचि हारी।
चीर बढ़ायो मुरारी ।
अबकी टेक हमारी…

सूरदास की लज्जा राखो, अब को है रखवारी ? 
राधे राधे श्रीवर-प्यारी श्रीवृषभान-दुलारी। 
सरन तकि आयो तुम्हारी।
अबकी टेक हमारी…



जीवन का मैंने सौंप दिया

जीवन का मैंने सौंप दिया अब सब भार तुम्हारे हाथों में,
उद्धार पतन अब सब मेरा है सरकार तुम्हारे हाथों में।

हम तुमको कभी नहीं भजते फिर भी तुम हमको नहीं तजते,
अपकार हमारे हाथों में उपकार तुम्हारे हाथों में।

हम में तुम में भेद यही हम नर हैं तुम नारायण हो,
हम हैं संसार के हाथों में संसार तुम्हारे हाथों में।

कल्पना बनाया करती है इस सेतु विरह के सागर पर,
जिससे हम पहुँचा करते हैं उस पार तुम्हारे हाथों में।

दृग ‘बिन्दु’ कर रहे हैं भगवन दृग नाव विरह सागर में है,
मंझधार बीच फँसे हैं हम और है पतवार तुम्हारे हाथों में॥

बुधवार, मई 25, 2022

किसकी शरण में जाऊं - उमा

किसकी शरण में जाऊं अशरण शरण तुम्हीं हो ॥

गज ग्राह से छुड़ाया प्रह्लाद को बचाया।
द्रौपदी का पट बढ़ाया  निर्बल के बल तुम्हीं हो ॥

अति दीन था सुदामा आया तुम्हारे धामा।
धनपति उसे बनाया  निर्धन के धन तुम्हीं हो ॥

तारा सदन कसाई अजामिल की गति बनाई।
गणिका सुपुर पठाई  पातक हरण तुम्हीं हो ॥

मुझको तो हे बिहारी आशा है बस तुम्हारी।
काहे सुरति बिसारी  मेरे तो एक तुम्हीं हो ॥