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शुक्रवार, जून 13, 2025

कृपा करो श्री राम - प्रीति चंद्रा



कृपा करो श्री राम ,
सब पर कृपा करो

मैं ना जानू किस विधि रीझो
अपनी नज़र मेहर की कीजो
आनंदकंद घनश्याम 
सब पर कृपा करो

आज तलक तो कोई सवाली 
तेरे दर से गया न खाली
भर दो घर में धन धान्य 
सब पर कृपा करो

गहरी नदिया निशा अंधेरी
ये  निर्दोष शरण है तेरी
लो गिरते को तुम थाम
सब पर कृपा करो

राम राम राम 
सिया राम राम राम 

रविवार, मई 25, 2025

नित्य सखा श्री राम हमारे -  व्ही. एन. श्रीवास्तव


हे राम हे राम 
मेरे राम मेरे राम 

नित्य सखा श्री राम हमारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे
नित्य सखा श्री राम हमारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे 

तू स्वार्थी थोड़ा सुख पाकर 
देने वाले को बिसराता
तू स्वार्थी थोड़ा सुख पाकर 
देने वाले को बिसराता
पर वो दाता सखा विधाता 
पर वो दाता सखा विधाता 
तुझको पल भर भी न भुलाता 
पर वो दाता सखा विधाता 
तुमको पल भर भी न भुलाता
तेरी रक्षा करने को वो 
तेरी रक्षा करने को वो 
हरदम रहता पास तुम्हारे 
पास तुम्हारे 

नित्य सखा श्री राम हमारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे
नित्य सखा श्री राम हमारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे
मन क्यों इत उत बाँह पसारे
मन क्यों इत उत बाँह पसार 
बाँह पसारे 

राम मेरे राम 
मेरे राम मेरे राम 
हे राम हे राम हे राम 
हे राम हे राम हे राम  
मेरे राम मेरे राम 

माया ठगनी बाँह पाश धर 
माया ठगनी बाँह पाश धर 
तुझको विषय माल पहिरावे 
तुझको विषय माल पहिरावे 
डम डम डमरू थाप काम को 
डम डम डमरू थाप काम को 
बेबस कर ये तुझे नचावे 
बेबस कर ये तुझे नचावे 
डम डम डमरू थाप काम को 
बेबस करके तुझे नचावे 
ऐसे में श्री राम सखा बन 
ऐसे में श्री राम सखा, तव  
बंधन काट, कु त्रास निवारे 
बंधन काट कु त्रास निवारे 

नित्य सखा श्री राम हमारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे 
नित्य सखा श्री राम हमारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे 

हे राम हे राम हे राम 

मेरे राम मेरे राम 
मेरे राम मेरे राम 
मेरे राम


शब्दकार, स्वरकार, गायक : व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'

दुख हरो द्वारिकानाथ


तुम कहाँ छुपे भगवान करो मत देरी |
दुःख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||
दुख हरो द्वारिकानाथ शरण मैं तेरी ||

यही सुना है दीनबन्धु तुम सबका दुख हर लेते |
जो निराश हैं उनकी झोली आशा से भर देते ||
अगर सुदामा होता मैं तो दौड़ द्वारका आता |
पाँव आँसुओं से धो कर मैं मन की आग बुझाता ||
तुम बनो नहीं अनजान, सुनो भगवान, करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||

जो भी शरण तुम्हारी आता, उसको धीर बंधाते |
नहीं डूबने देते दाता, नैया पार लगाते ||
तुम न सुनोगे तो किसको मैं अपनी व्यथा सुनाऊँ |
द्वार तुम्हारा छोड़ के भगवन और कहाँ मैं जाऊँ ||
प्रभु कब से रहा पुकार, मैं तेरे द्वार, करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||



Originally posted on 4/7/16

Repost with video by Kirti Anurag (Chhavi Bhaiya)

प्रभु तुम अन्तर्यामी

Prabhu Tum Antaryami
Music by Khayyam


प्रभु तुम अन्तर्यामी
दया करो, दया करो, हे स्वामी

अंग अंग में रंग सांवरा
गहरा होता जाये
मैं तो बस बिन मोल बिकानी
मन में तुम्ही समाये
लोग करें बदनामी
दया करो, दया करो, हे स्वामी

मन्द मन्द मुसकान मनोहर
मुख पर लट घुंघराली
अचरज क्या जो भई बावरी
देख के छवि मतवाली
बेल प्रीत की जामी
दया करो, दया करो, हे स्वामी

मैं गुणहीन, रिझाऊं कैसे
तुम को हे नटनागर
एक यही विशवास ह्रदय में
तुम हो दया के सागर
तीन लोक के स्वामी
दया करो, दया करो, हे स्वामी




Originally Published on Apr 22, 2015
Repost with new video addition, sung by Kirti Anurag (Chhavi Bhaiya)

बुधवार, मई 21, 2025

मेरे रोम रोम श्री राम विराजे - व्ही. एन. श्रीवास्तव


मेरे रोम रोम श्री राम विराजते  रहे, यही मेरी इच्छा  है - व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'


 रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।
जनक लली, श्री लखन लला अरु महावीर के साथ ।।

वन्दन करते राम चरण अति हर्षित मन हनुमान ।
आतुर रक्षा करने को सज्जन भगतन के प्रान ।
अभयदान दे रहे मुझे करुणा सागर रघुनाथ ।। 

रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।।

मुझको भला कष्ट हो कैसे, क्यों कर पीड़  सताए ।
साहस कैसे करें दुष्ट जन, मुझ पर हाथ उठाए ।
अंग संग जब मेरे हैं संकटमोचन के नाथ ।। 

रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।। 

विघ्न हरे, सद्गुरु के आश्रम स्वयं राम जी आये । 
शाप मुक्त कर दिया अहिल्या को पग धूर लगाये ।
वैसे चिंता मुक्त हमें कर रहे राम रघुनाथ ।। 

रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।।

रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ । 
जनक लली, श्री लखन लला अरु महावीर के साथ ।।


शब्दकार, स्वरकार, गायक : व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'

शनिवार, अप्रैल 12, 2025

गुरु बिन कौन सम्हारे -  व्ही. एन. श्रीवास्तव



गुरु बिन कौन सम्हारे ।
को भव सागर पार उतारे ॥

टूटी फूटी नाव हमारी
पहुँच न पाई तट पर ।
जैसे कोई प्यासा राही ।
भटक गया पनघट पर ।
पास खड़ा गुरु मुस्काता है ।
दोनों बाँह पसारे।
वो भवसागर पार उतारे ।
गुरु बिन ...

मेरे राम मुझे शक्ति दो ।
मन में मेरे दृढ़ भक्ति दो ।
राम काम मैं करूँ निरंतर ।
राम नाम चित धारे।
वो भव सागर पार उतारे ।
गुरु बिन ...

जीवन पथ की उलझन लख कर।
खड़े न हो जाना तुम थक कर।
तेरा साथी, राम निरंजन ।
हरदम साथ तुम्हारे।
वो भवसागर पार उतारे ।
गुरु बिन ...

हमराही तुम विकल न होना ।
संकट में धीरज ना खोना ।
अंधियारे में बाँह पकड़ कर ।
सत्गुरु राह दिखाये।
वो भवसागर पार उतारे ।
गुरु बिन ...

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शब्दकार, स्वरकार, गायक : व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'

२००१ में रेकोर्ड किया हुआ व्ही. एन. श्रीवास्तव द्वारा रचित गुरु वंदना का यह भजन,
28 सितंबर, 2008 को इस ब्लॉग पर डाला गया,
25 मार्च 2011 पर @bholakrishna चैनल पर यूट्यूब पर डाला गया,
12 अप्रैल, 2025 को स्वामी जी के अवतरण दिवस पर,
विडिओ लिंक के साथ इस ब्लॉग में पुनः प्रकाशित किया जा रहा है । 

रविवार, जून 13, 2021

जगदम्बिके जय जय जग जननी माँ

bhajan: jagadambike jay jay jaga janani maa

सरस सुपावन शक्ति हे, तेजोमयी  अपार,
हे आनंद स्वरूपिणी, मम हृदय कर उजियार,
जय माँ .....जय माँ ....

आराधन तेरा करूं, निशदिन ,आठों याम,
घट अंतर शक्ति जगे, गाऊं तव शुभ नाम,
जय माँ .....जय माँ ....

पतित-पावनी मात हे, बालक शरण तिहार,
मंगलमय वरदान दे यही विनती बारम्बार,
जय माँ .....जय माँ ..



जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ 

जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ 
जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ 
क्या मनहर नाम सुहाया है 
क्या मनहर नाम सुहाया है 
वारूँ सब कुछ माँ चरणों पर 
वारूँ सब कुछ माँ चरणों पर 
मेरे मन को ये भाया है 
जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ 
जय माँ .....जय माँ .. जय माँ .....जय माँ ..

हे प्रेमपुंज हे करुणामयि 
हे आदिशक्ति जगजननी माँ 
जय माँ .....जय माँ .. जय माँ .....
हे प्रेमपुंज हे करुणामयि 
हे आदिशक्ति जगजननी माँ 
तेरा वरद हस्त मेरे शीश रहे 
तेरा वरद हस्त मेरे शीश रहे 
बालक तेरे चरणों में आया है 
बालक तेरे चरणों में आया है 
जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ 
जय माँ .....जय माँ .. जय माँ .....जय माँ ..

गुरुदेव के अंदर बैठ के माँ 
तुमने खेलों को खेला था 
जय माँ .....जय माँ .. जय माँ .....
गुरुदेव के अंदर बैठ के माँ 
तुमने खेलों को खेला था 
उस मंजुल वेश में आ करके 
पतितों को गले लगाया है 
दुखियों को गले लगाया है 
जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ 
जय माँ .....जय माँ .. जय माँ .....जय माँ ..

श्रीराम तू ही श्रीकृष्ण तू ही 
दुर्गा काली श्रीराधा तू 
जय माँ .....जय माँ .. जय माँ .....
श्रीराम तू ही श्रीकृष्ण तू ही 
दुर्गा काली श्रीराधा तू 
ब्रह्मा विष्णु शिवशंकर में 
ब्रह्मा विष्णु शिवशंकर में 
तेरा ही तेज समाया है 
तेरा ही तेज समाया है 
जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ 
जय माँ .....जय माँ .. जय माँ .....जय माँ ..

हो नमस्कार मेरा बार बार 
हे शक्ति तिहारे चरणों में 
जय माँ .....जय माँ .. जय माँ .....
हो नमस्कार मेरा बार बार 
हे शक्ति तिहारे चरणों में 
मुझ अधम पतित दुखियारे को 
मुझ अधम पतित दुखियारे को 
करुणा कर हृदय लगाया है 
करुणा कर हृदय लगाया है 
जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ 
जय माँ .....जय माँ .. जय माँ .....जय माँ ..

माँ जो पाऊँ तुमसे पाऊँ 
जो देवे उसमें हरषाऊँ 
जय माँ .....जय माँ .. जय माँ .....
माँ जो पाऊँ तुमसे पाऊँ 
जो देवे उसमें हरषाऊँ 
कुछ रहे न मेरा अपनापन 
मैंने सर्वस्व चढ़ाया है 
जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ 
जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ 
क्या मनहर नाम सुहाया है 
क्या मनहर नाम सुहाया है 
वारूँ सब कुछ माँ चरणों पर 
मेरे मन को ये भाया है 
जगदम्बिके जय जय जगजननी माँ 
जय जय माँ  जय जय माँ ... 
जय जय माँ  जय जय माँ ... 
...
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Original post on October 13, 2015, Updated June 12, 2021

मंगलवार, फ़रवरी 13, 2018

जय शिव शंकर औघड़दानी - व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'

Bhajan: jay shiv shankar aughaddani

जय शिव शंकर औघड़दानी
जय शिव शंकर औघड़दानी , विश्वनाथ विश्वम्भर स्वामी

सकल बिस्व के सिरजन हारे , पालक रक्षक 'अघ संघारी'
जय शिव शंकर औघड़दानी , विश्वनाथ विश्वम्भर स्वामी

हिम आसन त्रिपुरारि बिराजें , बाम अंग गिरिजा महरानी
जय शिव शंकर औघड़दानी , विश्वनाथ विश्वम्भर स्वामी

औरन को निज धाम देत हो , हमसे करते आनाकानी
जय शिव शंकर औघड़दानी , विश्वनाथ विश्वम्भर स्वामी

सब दुखियन पर कृपा करत हो हमरी सुधि काहे बिसरानी
जय शिव शंकर औघड़दानी , विश्वनाथ विश्वम्भर स्वामी



रचनाकार: श्री व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'
स्वरकार: श्री व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'
गायक: श्री व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'



View and Listen to the bhajan on BholaKrishna youtube channel at https://www.youtube.com/watch?v=GjozaYcXoOE

रविवार, फ़रवरी 11, 2018

शंकर शिव शम्भु साधु सन्तन सुखकारी

bhajan: Shankar Shiv Shambhu Sadhu Santan Sukhkari

स्टार हिन्दुस्तान रिकार्ड कम्पनी के लिये १९५८ में लिखा और तभी इस भजन से अपना पहला कोमर्शियल रिकार्ड बना। राम कृपा से रेडियो सूरिनाम डच गयाना का सिग्नेचर ट्यून बना जो हमने १९७६ में अपने ब्रिटिश गयाना प्रवास में स्वयं सुना।  आश्चर्य हुआ कि मेरा भजन मुझसे पहले अमरीका पहुंच गया। - 'Bhola'

On the occasion of MahaShivaRatri on Feb 13, 2018, listen to this bhajan

राम नाम मधुबन का, भ्रमर बना, मन शिव का ।
निश दिन सिमरन करता, नाम पुण्यकारी  ॥

शंकर शिव शम्भु साधु सन्तन सुखकारी ॥
निश दिन सिमरन करते, नाम पुण्यकारी ॥

लोचन त्रय अति विशाल, सोहे नव चन्द्र भाल,
रुण्ड मुण्ड व्याल माल, जटा गंग धारी ।
शंकर शिव शम्भु साधु सन्तन सुखकारी ॥

शंकर शिव शम्भु साधु सन्तन सुखकारी ॥
सतत जपत राम नाम अतिशय शुभकारी ॥

पारवती पति सुजान, प्रमथ राज वृषभ यान,
सुर नर मुनि सैव्यमान, त्रिविध ताप हारी ।
शंकर शिव शम्भु साधु सन्तन सुखकारी ॥

औघड़ दानी महान, कालकूट कियो पान,
आरत-हर तुम समान, को है त्रिपुरारी ।
शंकर शिव शम्भु साधु सन्तन सुखकारी ॥



Listen to bhajan written, composed and sung by Shri V N Shrivastav 'Bhola' at https://www.youtube.com/watch?v=KzoJ7isIxfs

रचनाकार: श्री व्ही. एन. श्रीवास्तव
स्वरकार: श्री व्ही. एन. श्रीवास्तव
गायक: श्री व्ही. एन. श्रीवास्तव

रविवार, फ़रवरी 04, 2018

भजन: अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी

bhajan: ab kaise chhute ram rat lagi

Listen to bhajan by Shri V N S 'Bhola'

अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी ।

प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी , जाकी अँग-अँग बास समानी ।

प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा , जैसे चितवत चंद चकोरा ।

प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती , जाकी जोति बरै दिन राती ।

प्रभु जी, तुम मोती हम धागा , जैसे सोनहिं मिलत सुहागा ।

प्रभु जी, तुम स्वामी हम दासा , ऐसी भगति करै रैदासा ।





View on Bholakrishna youtube channel
at https://www.youtube.com/watch?v=-E7tM7QogA0

भजन: रे मन मूरख, जनम गँवायौ

Bhajan: re man murakh janam gavaayo

Listen to bhajan by Shri VNS Bhola

रे मन मूरख जनम गँवायौ ।
करि अभिमान विषय को राच्यो, नाम शरण नहिं आयौ ॥
मन मूरख जनम गँवायौ, रे मन मूरख जनम गँवायौ ।

ये संसार फूल सेमल ज्यौं, सुन्दर देखि रिझायो ।
चाखन लाग्यौ रुई उडि़ गई, हाथ कछू नहिं आयौ ॥
मन मूरख जनम गँवायौ, रे मन मूरख जनम गँवायौ ।

कहा भये अब के मन सोचें, पहिलैं नाहिं कमायौ ।
सूरदास हरि नाम भजन बिनु, सिर धुनि-धुनि पछितायौ ॥
मन मूरख जनम गँवायौ, रे मन मूरख जनम गँवायौ ।



View video on BholaKrishna Channel at youtube
at https://www.youtube.com/watch?v=sseihTzzGvM

बुधवार, अगस्त 17, 2016

भजन: हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ

हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ
जब बोलें तब रामहि राम ||


ब्रह्म मुहूरत उठ कर पंछी
प्रभु का ध्यान लगाते हैं ,
चहक चहक मधुमय रामामृत
जंगल में बरसाते हैं ||
पर हम अहंकार में डूबे
अपने ही गुन गाते हैं ,
गुरु जन के आदेश भूल हम
जीवन व्यर्थ गंवाते हैं ||
हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ
जब बोलें तब रामहि राम ||

कितने भाग्यवान हैं हम सब
ऐसा सतगुर पाया है ,
जिसने हमको "राम" नाम का
सहज योग सिखलाया है |
माया जंजालों में फँस कर
हमने उसे भुलाया है ,
पर चिड़ियों ने राम मंत्र
जीवन भर को अपनाया है ||
हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ
जब बोलें तब रामहि राम ||

[राग केदार पर आधारित]

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hamse bhalI jaMgal kI chi.DiyA.N
jab boleM tab rAmhi rAm ||

brahm muhUrat uTh kar paMChI
prabhu kA dhyAn lagAte haiM ,
chahak chahak madhumay rAmAmR^it
jaMgal meM barsAte haiM ||
par ham ahaMkAr meM DUbe
apne hI gun gAte haiM ,
guru jan ke Adesh bhUl ham
jIvan vyarth gaMvAte haiM ||
hamse bhalI jaMgal kI chi.DiyA.N
jab boleM tab rAmhi rAm ||

kitne bhAgyavAn haiM ham sab
aisA satgur pAyA hai ,
jisne hamko "rAm" nAm kA
sahaj yog sikhlAyA hai |
mAyA jaMjAloM meM pha.Ns kar
hamne use bhulAyA hai ,
par chi.DiyoM ne rAm maMtr
jIvan bhar ko apnAyA hai ||
hamse bhalI jaMgal kI chi.DiyA.N
jab boleM tab rAmhi rAm || 

मंगलवार, अगस्त 16, 2016

भजन: बोले बोले रे राम चिरैया रे

Bole Bole Re Ram Chiraiya
by V N Shrivastav 'Bhola
from Shree Ram Sharanam

बोले बोले रे राम चिरैया रे
बोले रे राम चिरैया।

मेरी साँसों के पिंजरे में
घड़ी घड़ी बोले।
घड़ी घड़ी बोले।
बोले बोले रे ...

ना कोई खिड़की ना कोई डोरी।
ना कोई चोर करे जो चोरी
ऐसा मेरा है राम रमैया रे।
बोले बोले रे ...

उसी की नैया वही खिवैया।
लहर रही उसकी लहरैया।
चाहे लाख चले पुरवैया रे।
बोले बोले रे ...

बुधवार, नवंबर 11, 2015

आरती: जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा .

MP3 Audio



जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा .
माता जाकी पारवती, पिता महादेवा ..

एकदन्त, दयावन्त, चारभुजाधारी,
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी .
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा ..

अंधे को आँख देत, कोढ़िन को काया,
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया .
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..

शनिवार, अक्टूबर 24, 2015

भजन: नैनहीन को राह दिखा प्रभु

Bhajan: Nainheen ko Raah Dikha

नैनहीन को राह दिखा प्रभु
नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को

तुमरी नगरिया की कठिन डगरिया
तुमरी नगरिया की कठिन डगरिया
चलत चलत गिर जाऊं मैं प्रभु

नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को राह दिखा प्रभु

चहुँ ओर मेरे घोर अँधेरा
भूल न जाऊं द्वार तेरा
चहुँ ओर मेरे घोर अँधेरा
भूल न जाऊं द्वार तेरा
एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो
एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो
एक बार प्रभु हाथ पकड़ लो
मन का दीप जलाऊँ मैं प्रभु

नैनहीन को राह दिखा प्रभु
पग पग ठोकर खाऊँ मैं
नैनहीन को

Youtube - K L Saigal

Youtube - Lata Mangeshkar

शुक्रवार, अक्टूबर 23, 2015

भजन: मधुकर श्याम हमारे चोर

Bhajan: Madhukar Shyam Hamare Chor

मधुकर श्याम हमारे चोर
मन हर लीनो माधुरी मूरत
निरख नैन की कोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर

सिर पे जाके मुकट सुहाये
माथे तिलक नैन कजरारे
मुख सुंदर ज्यूँ भोर
श्याम हमारे चोर
चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर

सूरदास के चोर कन्हैया
मनमोहन मुरली के बजैया
मनमोहन मुरली के बजैया
नटखट नन्दकिशोर
चोर!
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर
श्याम हमारे चोर
मधुकर श्याम हमारे चोर

Youtube - K L Saigal

मंगलवार, अक्टूबर 20, 2015

भजन: जगन्मात जगदम्बे तेरे जयकारे

जगन्मात जगदम्बे तेरे जयकारे ।

तू शक्ति भगवती भवानी ।
महिमामयी महामाया बखानी ।
    विश्व रचे पाले संहारे ॥१॥

शांति करी मंगल सुख रूपा ।
तू वरदा है दिव्य अनूपा ।
    शरणागत के काज संवारे ॥२॥

निज जन त्राण-परायण देवी ।
असुर हरि दुर्गा सुर सेवी ।
    श्री लक्ष्मी जन तुझे पुकारे ॥३॥



Listen to bhajan on Bhola Krishna Youtube channel
by Bholakrishna - भोला कृष्णा 
at https://www.youtube.com/watch?v=gvdkb1rM46Q

शुक्रवार, अक्टूबर 16, 2015

भजन: ऐसा प्यार बहा दे मैया

या देवी सर्वभूतेषू दयारूपेण संस्तत,
नमस्तस्यै नमस्तयै नमस्तयै, नमस्तस्यै नमो नमः ।।

ऐसा प्यार बहा दे मैया, चरणों से लग जाऊ मैं ।
सब अंधकार मिटा दे मैया, दरस तेरा कर पाऊं मैं ।।

जग मैं आकर जग को मैया, अब तक न मैं जान सका
क्यों आया हूँ कहाँ है जाना, अब तक न पहचान सका
तुम हो अगम अगोचर मैया, कहो कैसे लख पाऊं मैं ?

कर कृपा जगदम्बे भवानी, मैं बालक नादान हूँ
नहीं आराधन जप तप जानूं, मैं अवगुण की खान हूँ
दे ऐसा वरदान हे मैया, निशदिन तुम गुण गाऊं मैं ।

Listen to Bhajan on Youtube

बुधवार, अक्टूबर 14, 2015

भजन: जय जय जगदीश्वरी माँ

यह रचना - "सर्वेश्वरी जय जय जगदीश्वरी माँ", मेरे परम प्रिय मित्र एवं गुरुभाई श्री हरि ओम् शरण जी" के एक पुरातन भजन की धुन पर आधारित है.




सर्वेश्वरी, जय जय जगदीश्वरी माँ, तेरा ही एक सहारा है 
तेरी आंचल की छाहँ छोड़ अब नहीं कहीं निस्तारा है  
सर्वेश्वरी जय जय ------------

मैं अधमाधम, तू अघ हारिणी ! मैं पतित अशुभ, तू शुभ कारिणी 
हें ज्योतिपुंज, तूने मेरे मन का मेटा अंधियारा   है !!
सर्वेश्वरी, जय जय --------------

तेरी ममता पाकर किसने ना अपना  भाग्य सराहा है 
कोई भी खाली नहीं गया जो तेरे दर पर आया है !!
सर्वेश्वरी, जय जय --------------

अति दुर्लभ मानव तन पाकर आये हैं हम इस धरती पर, 
तेरी चौखट  ना छोड़ेंगे ,अपना ये अंतिम द्वारा है !!
सर्वेश्वरी, जय जय ---------

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रचनाकार एवं गायक "भोला "

See Video on youtube at
http://www.youtube.com/watch?v=ZCPEhHrNV2w