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शनिवार, अप्रैल 12, 2025

अब मुझे राम भरोसा तेरा - अतुल श्रीवास्तव

अब मुझे राम भरोसा तेरा
राम भरोसा तेरा
अब मुझे राम भरोसा तेरा ॥

मुझे भरोसा राम का रहे सदा सब काल ।
दीनबन्धु वह देव है सुखकर दीन दयाल ॥

पकड़ शरण अब राम की सुदृढ निश्चय साथ ।
तज कर चिंता मैं फिरूँ पा कर उत्तम नाथ ॥

अब मुझे राम भरोसा तेरा
राम भरोसा तेरा
अब मुझे राम भरोसा तेरा ॥

मधुर महारस नाम पान कर, मुदित हुआ मन मेरा ॥

अब मुझे राम भरोसा तेरा
राम भरोसा तेरा
अब मुझे राम भरोसा तेरा ॥

जो देवे सब जगत को अन्न पान शुभ प्राण ।
वही दाता मेरा हरि सुख का करे विधान ॥

वन अटवी गिरि शिखर पर, घोर विपद के बीच ।
तज कर चिंता मैं फिरूँ, निर्भय आँखें मींच ॥

कष्ट क्लेश के काल में निंदा हो अपमान ।
राम भरोसे शांत रह सोऊँ चादर तान ॥ 

अब मुझे राम भरोसा तेरा
राम भरोसा तेरा
अब मुझे राम भरोसा तेरा ॥

दीपक ज्ञान जगा जब भीतर, मिटा अज्ञान अन्धेरा ।
निशा निराशा दूर हुई सब, आया शांत सबेरा ॥

अब मुझे राम भरोसा तेरा
राम भरोसा तेरा
अब मुझे राम भरोसा तेरा ॥

...... राम राम राम राम ......

मुझे भरोसा राम तू  दे अपना अनमोल ।
रहूँ मस्त निश्चिंत मैं कभी न जाऊँ डोल ॥

मुझे भरोसा परम है राम राम श्री राम ।
मेरी जीवन ज्योति है वही मेरा विश्राम ॥



रचना: परम पूज्यनीय स्वामी श्री सत्यानन्द जी महाराज

स्वरकार एवं गायक: श्री अतुल श्रीवास्तव



Download this bhajan in the voice of Shri Atul Shrivastava. 

शुक्रवार, मार्च 09, 2018

अमृत वाणी

Listen to Amritvani
sung by Shri V N Shrivastav 'Bhola', Family and Friends


सर्वशक्तिमते परमात्मने श्री रामाय नम: (७)

(राम-कृपा अवतरण)

परम कृपा सुरूप है, परम प्रभु श्री राम ।
जन पावन परमात्मा, परम पुरुष सुख धाम ।। १ ।।
सुखदा है शुभा कृपा, शक्ति शान्ति स्वरूप ।
है ज्ञान आनन्द मयी, राम कृपा अनूप ।। २ ।।
परम पुण्य प्रतीक है, परम ईश का नाम ।
तारक मंत्र शक्ति घर, बीजाक्षर है राम ।। ३ ।।
साधक साधन साधिए, समझ सकल शुभ सार ।
वाचक वाच्य एक है, निश्चित धार विचार ।। ४ ।।
मंत्रमय ही मानिए, इष्ट देव भगवान् ।
देवालय है राम का, राम शब्द गुण खान ।। ५ ।।
राम नाम आराधिए, भीतर भर ये भाव ।
देव दया अवतरण का, धार चौगुना चाव ।। ६ ।।
मन्त्र धारणा यों कर, विधि से ले कर नाम ।
जपिए निश्चय अचल से, शक्ति धाम श्री राम ।। ७ ।।
यथा वृक्ष भी बीज से, जल रज ऋतु संयोग ।
पा कर, विकसे क्रम से, त्यों मन्त्र से योग ।। ८ ।।
यथा शक्ति परमाणु में, विद्युत् कोष समान ।
है मन्त्र त्यों शक्तिमय, ऐसा रखिए ध्यान ।। ९ ।।
ध्रुव धारणा धार यह, राधिए मन्त्र निधान ।
हरि-कृपा अवतरण का, पूर्ण रखिए ज्ञान ।। १० ।।
आता खिड़की द्वार से, पवन तेज का पूर ।
है कृपा त्यों आ रही, करती दुर्गुण दूर ।। ११ ।।
बटन दबाने से यथा, आती बिजली धार ।
नाम जाप प्रभाव से, त्यों कृपा अवतार ।।१२ ।।
खोलते ही जल नल ज्यों, बहता वारि बहाव ।
जप से कृपा अवतरित हो, तथा सजग कर भाव ।। १३ ।।
राम शब्द को ध्याइये, मन्त्र तारक मान ।
स्वशक्ति सत्ता जग करे, उपरि चक्र को यान ।। १४ ।।
दशम द्वार से हो तभी, राम कृपा अवतार ।
ज्ञान शक्ति आनन्द सह, साम शक्ति संचार ।। १५ ।।
देव दया स्वशक्ति का, सहस्र कमल में मिलाप ।
हो सत्पुरुष संयोग से, सर्व नष्ट हों पाप ।। १६ ।।


(नमस्कार सप्तक)

करता हूं मैं वन्दना, नत शिर बारम्बार ।
तुझे देव परमात्मन्, मंगल शिव शुभकार ।। १ ।।
अंजलि पर मस्तक किये, विनय भक्ति के साथ ।
नमस्कार मेरा तुझे, होवे जग के नाथ ।। २ ।।
दोनों कर को जोड़ कर, मस्तक घुटने टेक ।
तुझ को हो प्रणाम मम, शत शत कोटि अनेक ।। ३ ।।
पाप-हरण मंगल-करण, चरण शरण का ध्यान ।
धार करूँ प्रणाम मैं, तुझ को शक्ति-निधान ।। ४ ।।
भक्ति-भाव शुभ-भावना, मन में भर भरपूर ।
श्रद्धा से तुझ को नमूँ, मेरे राम हजूर ।। ५ ।।
ज्योतिर्मय जगदीश हे, तेजोमय अपार ।
परम पुरुष पावन परम, तुझ को हो नमस्कार ।। ६ ।।
सत्यज्ञान आनन्द के, परम धाम श्री राम ।
पुलकित हो मेरा तुझे होवे बहु प्रणाम ।। ७ ।।

(प्रात: पाठ)

परमात्मा श्री राम परम सत्य, प्रकाश रूप,
परम ज्ञानानन्दस्वरूप, सर्वशक्तिमान्,
एकैवाद्वितीय परमेश्वर, परम पुरुष,
दयालु देवाधिदेव है, उसको बार-बार
नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार ।।


(अमृत वाणी)

रामामृत पद पावन वाणी,
राम नाम धुन सुधा समानी ।
पावन पाठ राम गुण ग्राम,
राम राम जप राम ही राम ।।१ ।।
परम सत्य परम विज्ञान,
ज्योति-स्वरूप राम भगवान् ।
परमानन्द, सर्वशक्तिमान्,
राम परम है राम महान् ।।२ ।।
अमृत वाणी नाम उच्चारण,
राम राम सुखसिद्धि-कारण ।
अमृत-वाणी अमृत श्री नाम,
राम राम मुद मंगल-धाम ।।३ ।।
अमृतरूप राम-गुण गान,
अमृत-कथन राम व्याख्यान ।
अमृत-वचन राम की चर्चा,
सुधा सम गीत राम की अर्चा ।।४ ।।
अमृत मनन राम का जाप,
राम राम प्रभु राम अलाप ।
अमृत चिन्तन राम का ध्यान,
राम शब्द में शुचि समाधान ।।५ ।।
अमृत रसना वही कहावे,
राम राम जहाँ नाम सुहावे ।
अमृत कर्म नाम कमाई,
राम राम परम सुखदाई ।।६ ।।
अमृत राम नाम जो ही ध्यावे,
अमृत पद सो ही जन पावे ।
राम नाम अमृत-रस सार,
देता परम आनन्द अपार ।।७ ।।

राम राम जप हे मना,
अमृत वाणी मान ।
राम नाम में राम को,
सदा विराजित जान ।।८ ।।

राम नाम मुद मंगलकारी,
विध्न हरे सब पातक हारी ।
राम नाम शुभ शकुन महान्,
स्वस्ति शान्ति शिवकर कल्याण ।।९ ।।
राम राम श्री राम विचार,
मानिए उत्तम मंगलाचार ।
राम राम मन मुख से गाना,
मानो मधुर मनोरथ पाना ।।१० ।।
राम नाम जो जन मन लावे,
उस में शुभ सभी बस जावे ।
जहां हो राम नाम धुन-नाद,
भागें वहां से विषम विषाद ।।११ ।।
राम नाम मन-तप्त बुझावे,
सुधा रस सींच शांति ले आवे ।
राम राम जपिए कर भाव,
सुविधा सुविधि बने बनाव ।।१२ ।।

राम नाम सिमरो सदा,
अतिशय मंगल मूल ।
विषम-विकट संकट हरण,
कारक सब अनुकूल ।।१३ ।।

जपना राम राम है सुकृत,
राम नाम है नाशक दुष्कृत ।
सिमरे राम राम ही जो जन,
उसका हो शुचितर तन मन ।।१४ ।।
जिसमें राम नाम शुभ जागे,
उस के पाप ताप सब भागे ।
मन से राम नाम जो उच्चारे,
उस के भागें भ्रम भय सारे ।।१५ ।।
जिस में बस जाय राम सुनाम,
होवे वह जन पूर्णकाम ।
चित्त में राम राम जो सिमरे,
निश्चय भव सागर से तरे ।।१६ ।।
राम सिमरन होवे सहाई,
राम सिमरन है सुखदाई ।
राम सिमरन सब से ऊंचा,
राम शक्ति सुख ज्ञान समूचा ।।१७ ।।

राम राम ही सिमर मन,
राम राम श्री राम ।
राम राम श्री राम भज,
राम राम हरि-नाम ।।१८ ।।

मात-पिता बान्धव सुत दारा,
धन जन साजन सखा प्यारा ।
अन्त काल दे सके न सहारा,
राम नाम तेरा तारन हारा ।।१९ ।।
सिमरन राम नाम है संगी,
सखा स्नेही सुहृद् शुभ अंगी ।
युग युग का है राम सहेला,
राम भक्त नहीं रहे अकेला ।।२० ।।
निर्जन वन विपद् हो घोर,
निबड़ निशा तम सब ओर ।
जोत जब राम नाम की जगे,
संकट सर्व सहज से भगे ।।२१ ।।
बाधा बड़ी विषम जब आवे,
वैर विरोध विघ्न बढ़ जावे ।
राम नाम जपिए सुख दाता,
सच्चा साथी जो हितकर त्राता ।।२२ ।
मन जब धैर्य को नहीं पावे,
कुचिन्ता चित्त को चूर बनावे ।
राम नाम जपे चिन्ता चूरक,
चिन्तामणि चित्त चिन्तन पूरक ।।२३ ।।
शोक सागर हो उमड़ा आता,
अति दुःख में मन घबराता ।
भजिए राम राम बहु बार,
जन का करता बेड़ा पार ।।२४ ।।
कड़ी घड़ी कठिनतर काल,
कष्ट कठोर हो क्लेश कराल ।
राम राम जपिए प्रतिपाल,
सुख दाता प्रभु दीनदयाल ।।२५ ।।
घटना घोर घटे जिस बेर,
दुर्जन दुखड़े लेवें घेर ।
जपिए राम नाम बिन देर,
रखिए राम राम शुभ टेर ।।२६ ।।
राम नाम हो सदा सहायक,
राम नाम सर्व सुखदायक ।
राम राम प्रभु राम का टेक,
शरण शान्ति आश्रय है एक ।।२७ ।।
पूंजी राम नाम की पाइये,
पाथेय साथ नाम ले जाइये ।
नाशे जन्म मरण का खटका,
रहे राम भक्त नहीं अटका ।।२८ ।।

राम राम श्री राम है,
तीन लोक का नाथ ।
परम पुरुष पावन प्रभु,
सदा का संगी साथ ।।२९ ।।

यज्ञ तप ध्यान योग ही त्याग,
बन कुटी वास अति वैराग ।
राम नाम बिना नीरस फोक,
राम राम जप तरिए लोक ।।३० ।।
राम जाप सब संयम साधन,
राम जाप है कर्म आराधन ।
राम जाप है परम अभ्यास,
सिमरो राम नाम 'सुख-रास' ।।३१ ।।
राम जाप कही ऊँची करणी,
बाधा विध्न बहु दुःख हरणी ।
राम राम महा-मन्त्र जपना,
है सुव्रत नेम तप तपना ।।३२ ।।
राम जाप है सरल समाधि,
हरे सब आधि व्याधि उपाधि ।
ऋद्धि सिद्धि और नव निधान,
दाता राम है सब सुख खान ।।३३ ।
राम राम चिन्तन सुविचार,
राम राम जप निश्चय धार ।
राम राम श्री राम ध्याना,
है परम पद अमृत पाना ।।३४ ।।

राम राम श्री राम हरि,
सहज परम है योग ।
राम राम श्री राम जप,
दाता अमृत भोग ।।३५ ।।

नाम चिन्तामणि रत्न अमोल,
राम नाम महिमा अनमोल ।
अतुल प्रभाव अति प्रताप,
राम नाम कहा तारक जाप ।।३६ ।।
बीजाक्षर महा-शक्ति-कोष,
राम राम जप शुभ सन्तोष ।
राम राम श्री राम राम मंत्र,
तन्त्र बीज परात् पर यन्त्र ।।३७ ।।
बीजाक्षर पद पद्म प्रकाशे,
राम राम जप दोष विनाशे ।
कुँडलिनी बोधे शुष्मणा खोले,
राम मंत्र अमृत रस घोले ।।३८ ।।
उपजे नाद सहज बहु भांत,
अजपा जाप भीतर हो शान्त ।
राम राम पद शक्ति जगावे,
राम राम धुन जभी रमावे ।।३९ ।।
राम नाम जब जगे अभंग,
चेतन भाव जगे सुख-संग ।
ग्रन्थी अविद्या टूटे भारी,
राम लीला की खिले फुलवारी ।।४० ।।

पतित पावन परम पाठ,
राम राम जप याग ।
सफल सिद्धि कर साधना,
राम नाम अनुराग ।।४१ ।।

तीन लोक का समझिए सार,
राम नाम सब ही सुखकार ।
राम नाम की बहुत बड़ाई,
वेद पुराण मुनि जन गाई ।।४२ ।।
यति सती साधु-संत सयाने,
राम नाम निश दिन बखाने ।
तापस योगी सिद्ध ऋषिवर,
जपते राम राम सब सुखकर ।।४३ ।।
भावना भक्ति भरे भजनीक,
भजते राम नाम रमणीक ।
भजते भक्त भाव भरपूर,
भ्रम भय भेद-भाव से दूर ।।४४ ।।
पूर्ण पंडित पुरुष प्रधान,
पावन परम पाठ ही मान ।
करते राम राम जप ध्यान,
सुनते राम अनाहद तान ।।४५ ।।
इस में सुरति सुर रमाते,
राम राम स्वर साध समाते ।
देव देवीगण दैव विधाता,
राम राम भजते गणत्राता ।।४६ ।।
राम राम सुगुणी जन गाते,
स्वर संगीत से राम रिझाते ।
कीर्तन कथा करते विद्वान,
सार सरस संग साधनवान् ।।४७ ।।

मोहक मंत्र अति मधुर,
राम राम जप ध्यान ।
होता तीनों लोक में,
राम नाम गुण गान ।।४८ ।।

मिथ्या मन-कल्पित मत-जाल,
मिथ्या है मोह कुमद बैताल ।
मिथ्या मन मुखिया मनोराज,
सच्चा है राम नाम जप काज ।।४९ ।।
मिथ्या है वाद विवाद विरोध,
मिथ्या है वैर निंदा हठ क्रोध ।
मिथ्या द्रोह दुर्गुण दुःख खान,
राम नाम जप सत्य निधान ।।५० ।।
सत्य मूलक है रचना सारी,
सर्व सत्य प्रभु राम पसारी ।
बीज से तरु मकड़ी से तार,
हुआ त्यों राम से जग विस्तार ।।५१ ।।
विश्व वृक्ष का राम है मूल,
उस को तू प्राणी कभी न भूल ।
साँस साँस से सिमर सुजान,
राम राम प्रभु राम महान् ।।५२ ।।
लय उत्पत्ति पालना रूप,
शक्ति चेतना आनंद स्वरूप ।
आदि अन्त और मध्य है राम,
अशरण शरण है राम विश्राम ।।५३ ।।

राम नाम जप भाव से,
मेरे अपने आप ।
परम पुरुष पालक प्रभु,
हर्ता पाप त्रिताप ।।५४ ।।

राम नाम बिना वृथा विहार,
धन धान्य सुख भोग पसार ।
वृथा है सब सम्पद् सम्मान,
होवे तन यथा रहित प्राण ।।५५ ।।
नाम बिना सब नीरस स्वाद,
ज्यों हो स्वर बिना राग विषाद ।
नाम बिना नहीं सजे सिंगार,
राम नाम है सब रस सार ।।५६ ।।
जगत् का जीवन जानो राम,
जग की ज्योति जाज्वल्यमान ।
राम नाम बिना मोहिनी माया,
जीवन-हीन यथा तन छाया ।।५७ ।।
सूना समझिए सब संसार,
जहां नहीं राम नाम संचार ।
सूना जानिए ज्ञान विवेक,
जिस में राम नाम नहीं एक ।।५८ ।।
सूने ग्रंथ पन्थ मत पोथे,
बने जो राम नाम बिन थोथे ।
राम नाम बिन वाद विचार,
भारी भ्रम का करे प्रचार ।।५९ ।।

राम नाम दीपक बिना,
जन-मन में अन्धेर ।
रहे इस से हे मम मन,
नाम सुमाला फेर ।।६० ।।

राम राम भज कर श्री राम,
करिए नित्य ही उत्तम काम ।
जितने कर्तव्य कर्म कलाप,
करिए राम राम कर जाप ।।६१ ।।
करिए गमनागम के काल,
राम जाप जो करता निहाल ।
सोते जगते सब दिन याम,
जपिए राम राम अभिराम ।।६२ ।।
जपते राम नाम महा माला,
लगता नरक द्वार पै ताला ।
जपते राम राम जप पाठ,
जलते कर्मबन्ध यथा काठ ।।६३ ।।
तान जब राम नाम की टूटे,
भांडा भरा अभाग्य भय फूटे ।
मनका है राम नाम का ऐसा,
चिन्ता-मणि पारस-मणि जैसा ।।६४ ।।
राम नाम सुधा-रस सागर,
राम नाम ज्ञान गुण-आगर ।
राम नाम श्री राम महाराज,
भव-सिन्धु में है अतुल जहाज ।।६५ ।।
राम नाम सब तीर्थ स्थान,
राम राम जप परम स्नान ।
धो कर पाप-ताप सब धूल,
कर दे भय-भ्रम को उन्मूल ।।६६ ।।
राम जाप रवि-तेज समान,
महा मोह-तम हरे अज्ञान ।
राम जाप दे आनन्द महान्,
मिले उसे जिसे दे भगवान् ।।६७ ।।

राम नाम को सिमरिये,
राम राम एक तार ।
परम पाठ पावन परम,
पतित अधम दे तार ।।६८ ।।

माँगूं मैं राम-कृपा दिन रात,
राम-कृपा हरे सब उत्पात ।
राम-कृपा लेवे अन्त सम्हाल,
राम प्रभु है जन प्रतिपाल ।।६९ ।।
राम-कृपा है उच्चतर योग,
राम-कृपा है शुभ संयोग ।
राम-कृपा सब साधन-मर्म,
राम-कृपा संयम सत्य धर्म ।।७० ।।
राम नाम को मन में बसाना,
सुपथ राम-कृपा का है पाना ।
मन में राम-धुन जब फिरे,
राम-कृपा तब ही अवतरे ।।७१ ।।
रहूँ मैं नाम में हो कर लीन,
जैसे जल में हो मीन अदीन ।
राम-कृपा भरपूर मैं पाऊँ,
परम प्रभु को भीतर लाऊँ ।।७२ ।।
भक्ति-भाव से भक्त सुजान,
भजते राम-कृपा का निधान ।
राम-कृपा उस जन में आवे,
जिस में आप ही राम बसावे ।।७३ ।।
कृपा-प्रसाद है राम की देनी,
काल-व्याल जंजाल हर लेनी ।
कृपा-प्रसाद सुधा-सुख-स्वाद,
राम नाम दे रहित विवाद ।।७४ ।।
प्रभु-प्रसाद शिव शान्ति दाता,
ब्रह्म-धाम में आप पहुँचाता ।
प्रभु-प्रसाद पावे वह प्राणी,
राम राम जपे अमृत वाणी ।।७५ ।।
औषध राम नाम की खाइये,
मृत्यु जन्म के रोग मिटाइये ।
राम नाम अमृत रस-पान,
देता अमल अचल निर्वाण ।।७६ ।।

राम राम धुन गूँज से,
भव भय जाते भाग ।
राम नाम धुन ध्यान से,
सब शुभ जाते जाग ।।७७ ।।

माँगूं मैं राम नाम महादान,
करता निर्धन का कल्याण ।
देव द्वार पर जन्म का भूखा,
भक्ति प्रेम अनुराग से रूखा ।।७८ ।।
'पर हूँ तेरा' -यह लिये टेर,
चरण पड़े की रखियो मेर ।
अपना आप विरद विचार,
दीजिए भगवन् ! नाम प्यार ।।७९ ।।
राम नाम ने वे भी तारे,
जो थे अधर्मी अधम हत्यारे ।
कपटी कुटिल कुकर्मी अनेक,
तर गये राम नाम ले एक ।।८० ।।
तर गये धृति धारणा हीन,
धर्म-कर्म में जन अति दीन ।
राम राम श्री राम जप जाप,
हुए अतुल विमल अपाप ।।८१ ।।
राम नाम मन मुख में बोले,
राम नाम भीतर पट खोले ।
राम नाम से कमल विकास,
होवें सब साधन सुख-रास ।।८२ ।।
राम नाम घट भीतर बसे,
साँस साँस नस नस से रसे ।
सपने में भी न बिसरे नाम,
राम राम श्री राम राम राम ।।८३ ।।

राम नाम के मेल से,
सध जाते सब काम ।
देव-देव देवे यदा,
दान महा सुख धाम ।।८४ ।।

अहो ! मैं राम नाम धन पाया,
कान में राम नाम जब आया ।
मुख से राम नाम जब गाया,
मन से राम नाम जब ध्याया ।।८५ ।।
पा कर राम नाम धन-राशी,
घोर अविद्या विपद् विनाशी ।
बढ़ा जब राम प्रेम का पूर,
संकट संशय हो गये दूर ।।८६ ।।
राम नाम जो जपे एक बेर,
उस के भीतर कोष कुबेर ।
दीन दुखिया दरिद्र कंगाल,
राम राम जप होवे निहाल ।।८७ ।।
हृदय राम नाम से भरिए,
संचय राम नाम धन करिए ।
घट में नाम मूर्ति धरिए,
पूजा अन्तर्मुख हो करिए ।।८८ ।।
आँखें मूँद के सुनिए सितार,
राम राम सुमधुर झंकार ।
उस में मन का मेल मिलाओ,
राम राम सुर में ही समाओ ।।८९ ।।
जपूँ मैं राम राम प्रभु राम,
ध्याऊँ मैं राम राम हरे राम ।
सिमरूँ मैं राम राम प्रभु राम,
गाऊँ मैं राम राम श्री राम ।।९० ।।
अमृत वाणी का नित्य गाना,
राम राम मन बीच रमाना ।
देता संकट विपद् निवार,
करता शुभ श्री मंगलाचार ।।९१ ।।

राम नाम जप पाठ से,
हो अमृत संचार ।
राम-धाम में प्रीति हो,
सुगुण-गण का विस्तार ।।९२ ।।

तारक मंत्र राम है,
जिस का सुफल अपार ।
इस मंत्र के जाप से,
निश्चय बने निस्तार ।।९३ ।।

(धुन)

१. बोलो राम, बोलो राम, बोलो राम राम राम ।
२. श्री राम, श्री राम, श्री राम राम राम ।
३. जय जय राम, जय जय राम, जय जय राम राम राम ।
४. जय राम जय राम, जय जय राम,
राम राम राम राम, जय जय राम ।
५. पतित पावन नाम, भज ले राम राम राम ।
भज ले राम राम राम, भज ले राम राम राम ।।
६. अशरण शरण शान्ति के धाम, मुझे भरोसा तेरा राम ।
मुझे भरोसा तेरा राम, मुझे भरोसा तेरा राम ।।
७. रामाय नमः श्री रामाय नमः,
रामाय नमः श्री रामाय नमः ।
८. अहं भजामि रामं, सत्यं शिवं मंगलम् ।
सत्यं शिवं मंगलं, सत्यं शिवं मगलम् ।।

वृद्धि-आस्तिक भाव की, शुभ मंगल संचार ।
अभ्युदय सद्धर्म का, राम नाम विस्तार ।। (२)

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लेखक
श्री स्वामी सत्यानन्द जी महाराज

केवल प्रेमी राम-भक्तों में निशुल्क बांटने के लिये

प्राप्ति स्थान -
श्रीरामशरणम्,
८, रिंग रोड,
लाजपत नगर-४,
नई दिल्ली-११० ०२४

प्राप्ति समय -
प्रतिदिन प्रातः ७ से ८ १/२
रविवार प्रातः ९ से ११

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बुधवार, अगस्त 17, 2016

भजन: हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ

हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ
जब बोलें तब रामहि राम ||


ब्रह्म मुहूरत उठ कर पंछी
प्रभु का ध्यान लगाते हैं ,
चहक चहक मधुमय रामामृत
जंगल में बरसाते हैं ||
पर हम अहंकार में डूबे
अपने ही गुन गाते हैं ,
गुरु जन के आदेश भूल हम
जीवन व्यर्थ गंवाते हैं ||
हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ
जब बोलें तब रामहि राम ||

कितने भाग्यवान हैं हम सब
ऐसा सतगुर पाया है ,
जिसने हमको "राम" नाम का
सहज योग सिखलाया है |
माया जंजालों में फँस कर
हमने उसे भुलाया है ,
पर चिड़ियों ने राम मंत्र
जीवन भर को अपनाया है ||
हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ
जब बोलें तब रामहि राम ||

[राग केदार पर आधारित]

_____________________________________________________

hamse bhalI jaMgal kI chi.DiyA.N
jab boleM tab rAmhi rAm ||

brahm muhUrat uTh kar paMChI
prabhu kA dhyAn lagAte haiM ,
chahak chahak madhumay rAmAmR^it
jaMgal meM barsAte haiM ||
par ham ahaMkAr meM DUbe
apne hI gun gAte haiM ,
guru jan ke Adesh bhUl ham
jIvan vyarth gaMvAte haiM ||
hamse bhalI jaMgal kI chi.DiyA.N
jab boleM tab rAmhi rAm ||

kitne bhAgyavAn haiM ham sab
aisA satgur pAyA hai ,
jisne hamko "rAm" nAm kA
sahaj yog sikhlAyA hai |
mAyA jaMjAloM meM pha.Ns kar
hamne use bhulAyA hai ,
par chi.DiyoM ne rAm maMtr
jIvan bhar ko apnAyA hai ||
hamse bhalI jaMgal kI chi.DiyA.N
jab boleM tab rAmhi rAm || 

मंगलवार, अक्टूबर 20, 2015

भजन: जगन्मात जगदम्बे तेरे जयकारे

जगन्मात जगदम्बे तेरे जयकारे ।

तू शक्ति भगवती भवानी ।
महिमामयी महामाया बखानी ।
    विश्व रचे पाले संहारे ॥१॥

शांति करी मंगल सुख रूपा ।
तू वरदा है दिव्य अनूपा ।
    शरणागत के काज संवारे ॥२॥

निज जन त्राण-परायण देवी ।
असुर हरि दुर्गा सुर सेवी ।
    श्री लक्ष्मी जन तुझे पुकारे ॥३॥



Listen to bhajan on Bhola Krishna Youtube channel
by Bholakrishna - भोला कृष्णा 
at https://www.youtube.com/watch?v=gvdkb1rM46Q

गुरुवार, मई 07, 2015

स्वामी सत्यानन्द जी महाराज द्वारा रचित १८ भजन

स्वरकार एवं गायक - व्ही एन श्रीवास्तव 'भोला'

स्वामी सत्यानन्द जी महाराज द्वारा रचित १८ भजन भोलाजी की आवाज़ में निम्न youtube लिंक्स से सुने..

बुधवार, मार्च 18, 2015

भक्ति प्रकाश से - धुन - वन्दे रामं सच्चिदानन्दं

वन्दे रामं सच्चिदानन्दं

परम पावनं प्रियतम रूपं
परमेशं शुभ शक्ति स्वरूपं
सर्वाधारं महासुखकंदं
वन्दे रामं सच्चिदानन्दं

शरणागत जन पालक शरणं
विघ्न हरं सुख शांतिः करणं
परम पदं मंगल अरविन्दं
वन्दे रामं सच्चिदानन्दं


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Listen to the bhajan - MP3 by Jyotsna Nigam

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रविवार, मार्च 15, 2015

भरोसा - स्वामी सत्यानन्दजी महाराज द्वारा रचित 'भक्ति प्रकाश' के पाँच दोहे

महर्षि डॉ विश्वामित्रजी महाराज

के अवतरण दिवस
पर समर्पित स्वरांजलि ---


जिनसे पाया ----- 

मनुष्य यंत्र है, इष्ट है यंत्री , उसके प्रत्येक कार्य का वास्तविक कर्ता ! आवश्यक है कि मनुष्य अपने इष्ट पर पूरा भरोसा रखे ! यह भरोसा केवल इष्ट की कृपा से और गुरु कृपा से ही प्राप्त होता है ! इष्ट से प्रीति करें, उन्हें प्रसन्न कर उनसे ही यह भरोसा मांगे !

- व्ही. एन. एस. 'भोला'



भरोसा
bharosa
राम, हे राम, मेरे राम, मेरे राम !!

सर्वलोक में है रमा, तू मेरा भगवान .
ओंकार प्रभु राम तू, पावन देव महान ..

आया तेरे द्वार पर, दुखी, अबल, तव बाल .
पावन अपने प्रेम से, करिए इसे निहाल ..

सर्वशक्तिमय राम जी, अखिल विश्व के नाथ .
शुचिता, सत्य, विश्वास दे, सिर पर धर कर हाथ ..

हे राम मुझे दीजिये, अपनी लगन अपार .
अपना निश्चय अटल दे, अपना अतुल्य प्यार ..

मुझे भरोसा राम तू, दे अपना अनमोल .
रहूं मस्त निश्चिन्त मैं, कभी न जाऊं डोल ..

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सोमवार, जनवरी 20, 2014

स्वामी सत्यानन्दजी महाराज से मुखरित धुनियाँ

॥ श्रीराम ॥
श्री स्वामी सत्यानन्दजी महाराज से
मुखरित धुनियां

१. मंगल नाम राम राम ।
२. मेरे राम सर्वाधार बार-बार नमस्कार ।
३. वन्दे रामं सच्चिदानन्दम् ।
४. श्री राम हरे जय राम हरे, भव भय भंजन भगवान हरे  ।
५. नमो नमः श्री राम तुमको नमो नमः ।
६. भज श्री रामं भज श्री रामं, श्री रामं भज विमलमते ।
७. मेरे राम जगदीश तेरी जय होवे ।
८. जय बोलो जय बोलो, भगवान राम की जय बोलो ।
९. राम नाम सुखकारी सिमरो, राम नाम सुखकारी ।
१०. लीला राम रचाई साधू लीला राम रचाई ।
११. परम गुरु जय जय राम ।

बुधवार, दिसंबर 19, 2012

भक्ति प्रकाश से

प्रातः स्मरणीय पूज्य स्वामी सत्यानन्द जी महाराज कृत
"भक्ति प्रकाश" से


सत्य ज्ञान आनंद के परम धाम श्री राम | 
पुलकित हो मेरा तुझे होवे बहु प्रणाम ||

आया तेरे द्वार पर, दुखी अबल तव बाल |
पावन अपने प्रेम से, करिये इसे निहाल ||

पावन तेरा नाम है, पावन तेरा धाम | 
अतिशय पावन रूप तू, पावन तेरा काम ||

निश्चय अपने नाम का, भक्ति प्रेम प्रकाश |
दे निश्चय निज रूप का, अपना दृढ़ विश्वास ||

मेरा तन मंदिर बने, मन में नाम बसाय |
वाणी में हो कीर्तन, परम प्रेम में आय ||

उत्तम मेरे कर्म हों, राम इच्छा अनुसार |
तुझमें सब जन ही बनें, रत्न पिरोए तार ||

जय विजय बसे देश में, फैले सुनीति न्याय |
स्व पर का भय भी कभी, जन को नहीं सताय ||

मार्ग सत्य दिखाइए, संत सुजन का पाथ |
पाप से हमें बचाइए, पकड़ हमारा हाथ ||

भक्ति प्रेम से सींचिये, कर के दया दयाल |
अपनी श्रद्धा दान कर, सबको करो निहाल ||

तेरी जय जयकार हो, दश दिश चारों कूंट |
नाम अमीरस मधुर का, पान करे सब घूँट ||

नाम नाद की गूँजती, मधुर सुरीली तान |
राम नाम के शब्द को, सुने सभी के कान ||

जय जय तेरी बोल कर, तेरे गीत को गाय |
तेरा यश वर्णन करूँ, तेरा नाम जपाय ||

निज निश्चय का तेज दे, प्रीति किरण के साथ |
साथ रहे शुभ कर्म में, मंगलमय तव हाथ ||

गूंजे मधुमय नाम की, ध्वनि नाभि के धाम |
हृदय मस्तक कमल में राम राम ही राम ||

मुझे भरोसा राम तू, दे अपना अनमोल ||
रहूँ मस्त निश्चिन्त मैं, कभी ना जाऊं डोल ||

मुझे भरोसा परम है, राम राम ही राम |
मेरी जीवन-ज्योति है, वही मेरा विश्राम ||