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शनिवार, मई 24, 2025

तुम्हारे साथ है श्री राम

bhajan: tumhare sath hai shri ram

तुम्हारे साथ है श्री राम, तो किस बात की चिंता
किया करते हो तुम यूं ही, सदा दिन-रात की चिंता.

उसी के हाथ में जीना उसी के हाथ में मरना,
उसी के हाथ सब खुशियां, उसी के हाथ दुख भरना,
अरे तुमको पड़ी क्या है, प्रभु के हाथ की चिंता...

तुम्हारे साथ है श्री राम तो किस बात की चिंता
किया करते हो तुम यूं ही, सदा दिन रात की चिंता

घड़ी हो संकटों की तो करो श्री राम का सिमरन
झड़ी हो झंझटों की तो करो हरि नाम जप चिंतन
मिला है साथ उसका तो भला किस साथ की चिंता

तुम्हारे साथ है श्री राम तो किस बात की चिंता...
किया करते हो तुम यूं ही, सदा दिन रात की चिंता.

उसी का नाम ले कर के तरो तुम बीच सागर से
उसी का नाम ले कर के उड़ो पर्वत के उपर से
करेगा आप अपने भक्त की औकात की चिंता

तुम्हारे साथ है श्री राम तो किस बात की चिंता...
किया करते हो तुम यूं ही, सदा दिन रात की चिंता.

उसी के नाम की धुन ध्यान से जगती हैं तकदीरें
उसी के नाम की धुन ध्यान से सधती हैं तस्वीरें
नहीं 'निर्दोष' फिर त्रिताप के उत्पात की चिंता

तुम्हारे साथ है श्री राम तो किस बात की चिंता...
किया करते हो तुम यूं ही, सदा दिन रात की चिंता.

गुरुवार, मई 26, 2022

जीवन का मैंने सौंप दिया

जीवन का मैंने सौंप दिया अब सब भार तुम्हारे हाथों में,
उद्धार पतन अब सब मेरा है सरकार तुम्हारे हाथों में।

हम तुमको कभी नहीं भजते फिर भी तुम हमको नहीं तजते,
अपकार हमारे हाथों में उपकार तुम्हारे हाथों में।

हम में तुम में भेद यही हम नर हैं तुम नारायण हो,
हम हैं संसार के हाथों में संसार तुम्हारे हाथों में।

कल्पना बनाया करती है इस सेतु विरह के सागर पर,
जिससे हम पहुँचा करते हैं उस पार तुम्हारे हाथों में।

दृग ‘बिन्दु’ कर रहे हैं भगवन दृग नाव विरह सागर में है,
मंझधार बीच फँसे हैं हम और है पतवार तुम्हारे हाथों में॥