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बुधवार, अक्टूबर 26, 2016

भजन: परम गुरु राम मिलावनहार

एक सुंदर भावपूर्ण भजन --

*परम गुरू राम मिलावनहार ।*

*अति उदार, मंजुल मंगलमय,*
*अभिमत - फलदातार ।।*

*टूटी फूटी नाव पड़ी मम*
*भीषण भव नद धार ।*

*जयति  जयति जय देव दयानिधि*
*बेग उतारो पार ।।*

यह सुन्दर रचना श्री भाई जी श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्धार की है।

(राग आसावरी -- ताल धुमाली )

(गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित  " भजन संग्रह ", पृष्ठ 351)

Listen to the bhajan sung by Shri V N S 'Bhola' by clicking below:

param gurU rAm milAvanhAr |

ati udAr, maMjul maMgalmay,
abhimat - phaladAtAr ||

TUTI phUTI nAv pa.DI mam
bhIShaN bhav nad dhAr |

jayti  jayti jay dev dayAnidhi
beg utAro pAr ||

Listen to the bhajan sung by Shri V N S 'Bhola' by clicking below:
param gurū rām milāvanhār |

ati udār, maṁjul maṁgalmay,
abhimat - phaladātār ||

ṭūṭī phūṭī nāv paṛī mam
bhīṣaṇ bhav nad dhār |

jayti  jayti jay dēv dayānidhi
bēg utārō pār || 

बुधवार, नवंबर 04, 2009

भजन - रे मन हरि सुमिरन करि लीजै

MP3 Audio

रे मन हरि सुमिरन करि लीजै ॥

हरिको नाम प्रेमसों जपिये, हरिरस रसना पीजै ।
हरिगुन गाइय, सुनिय निरंतर, हरि-चरननि चित दीजै ॥

हरि-भगतनकी सरन ग्रहन करि, हरिसँग प्रीति करीजै ।
हरि-सम हरि जन समुझि मनहिं मन तिनकौ सेवन कीजै ॥

हरि केहि बिधिसों हमसों रीझै, सो ही प्रश्न करीजै ।
हरि-जन हरिमारग पहिचानै, अनुमति देहिं सो कीजै ॥

हरिहित खाइय, पहिरिय हरिहित, हरिहित करम करीजै ।
हरि-हित हरि-सन सब जग सेइय, हरिहित मरिये जीजै ॥

गुरुवार, सितंबर 24, 2009

आरती - जय जगदीश हरे

 MP3 Audio

जय जगदीश हरे प्रभु ! जय जगदीश हरे !
मायातीत, महेश्वर, मन-बच-बुद्धि परे ॥टेक॥

आदि, अनादि, अगोचर, अविचल, अविनाशी ।
अतुल, अनंत, अनामय, अमित शक्ति-राशी ॥१॥ जय०

अमल, अकल, अज, अक्षय, अव्यय, अविकारी ।
सत-चित-सुखमय, सुंदर, शिव, सत्ताधारी ॥२॥ जय०

विधि, हरि, शंकर, गणपति, सूर्य, शक्तिरूपा ।
विश्व-चराचर तुमही, तुमही जग भूपा ॥३॥ जय०

माता-पिता-पितामह-स्वामिसुह्रद भर्ता ।
विश्वोत्पादक-पालक-रक्षक-संहर्ता ॥४॥ जय०

साक्षी, शरण, सखा, प्रिय, प्रियतम, पूर्ण प्रभो ।
केवल काल कलानिधि, कालातीत विभो ॥५॥ जय०

राम कृष्ण, करुणामय, प्रेमामृत-सागर ।
मनमोहन, मुरलीधर, नित-नव नटनागर ॥६॥ जय०

सब विधिहीन, मलिनमति, हम अति पातकि जन ।
प्रभु-पद-विमुख अभागी कलि-कलुषित-तन-मन ॥७॥ जय०

आश्रय-दान दयार्णव ! हम सबको दीजे ।
पाप-ताप हर हरि ! सब, निज-जन कर लीजे ॥८॥ जय०

आरती - हर हर हर महादेव

MP3 Audio

हर हर हर महादेव !

सत्य, सनातन, सुंदर, शिव ! सबके स्वामी ।
अविकारी, अविनाशी, अज, अंतर्यामी ॥१॥ हर हर०

आदि अनंत, अनामय, अकल, कलाधारी ।
अमल, अरूप, अगोचर, अविचल अघहारी ॥२॥ हर हर०

ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर, तुम त्रिमूर्तिधारी ।
कर्ता, भर्ता, धर्ता तुम ही संहारी ॥३॥ हर हर०

रक्षक, भक्षक, प्रेरक, तुम औढरदानी ।
साक्षी, परम अकर्ता कर्ता अभिमानी ॥४॥ हर हर०

मणिमय भवन निवासी, अति भोगी, रागी ।
सदा मसानबिहारी, योगी वैरागी ॥५॥ हर हर०

छाल, कपाल, गरल, गल, मुंडमाल व्याली ।
चिताभस्म तन, त्रिनयन, अयन महाकाली ॥६॥ हर हर०

प्रेत-पिशाच, सुसेवित पीत जटाधारी ।
विवसन, विकट रूपधर, रुद्र प्रलयकारी ॥७॥ हर हर०

शुभ्र, सौम्य, सुरसरिधर, शशिधर, सुखकारी ।
अतिकमनीय, शान्तिकर शिव मुनि मन हारी ॥८॥ हर हर०

निर्गुण, सगुण, निरंजन, जगमय नित्य प्रभो ।
कालरूप केवल, हर ! कालातीत विभो ॥९॥ हर हर०

सत-चित-आनँद, रसमय, करुणामय, धाता ।
प्रेम-सुधा-निधि, प्रियतम, अखिल विश्व-त्राता ॥१०॥ हर हर०

हम अति दीन, दयामय ! चरण-शरण दीजै ।
सब विधि निर्मल मति कर अपना कर लीजै ॥११॥ हर हर०

शनिवार, सितंबर 19, 2009

कीर्तन - बन्धुगणो ! मिल कहो प्रेमसे (२)

बन्धुगणो ! मिल कहो प्रेमसे - 'रघुपति राघव राजाराम ।'
मुदित चित्तसे घोष करो पुनि - 'पतित पावन सीताराम ॥'

जिह्वा-जीवन सफल करो कह -'जय रघुनन्दन, जय सियाराम ।'
ह्रदय खोल बोलो मत चूको- 'जानकिवल्लभ सीताराम ॥'

गौर रुचिर, नवघनश्याम छबि, 'जय लक्ष्मण, जय जय श्रीराम ।'
अनुगत परम अनुज रघुबरके- 'भरत-सत्रुहन शोभाधाम ॥'

उभय सखा राघवके प्यारे -'कपिपति, लंकापति अभिराम ।'
परम भक्त निष्कामशिरोमणि 'जय श्रीमारुति पूरणकाम ॥'

अति उमंगसे बोलो संतत - 'रघुपति राघव राजाराम।'
मुक्तकंठ हो सदा पुकारो- 'पतित पावन सीताराम ॥'

http://www.archive.org/download/AratiGeetMala/AGM-bandhu-gano-raghupati-raaghav.mp3

कीर्तन - बन्धुगणो ! मिलि कहो प्रेमसे (१)

बन्धुगणो ! मिलि कहो प्रेमसे 'यदुपति ब्रजपति श्यामा-श्याम ।'
मुदित चित्तसे घोष करो पुनि- 'पतित पावन राधेश्याम ॥'

जिह्वा-जीवन सफल करो कह- 'जय यदुनन्दन, जय घनश्याम ।'
ह्रदय खोल बोलो, मत चूको- 'रुक्मिणिवल्लभ श्याम श्याम ॥'

नव-नीरद-तनु, गौर मनोहर, 'जय श्रीमाधव जय बलराम।'
उभय सखा मोहनके प्यारे -'जय श्रीदामा, जयति सुदाम ॥'

परमभक्त निष्कामशिरोमणि- 'उद्धव-अर्जुन शोभाधाम।'
प्रेम-भक्ति-रस-लीन निरन्तर विदुर, 'विदुर-गृहिणी अभिराम ॥'

अति उमंगसे बोलो सन्तत- 'यदुपति ब्रजपति श्यामा-श्याम ।'
मुक्तकंठसे सदा पुकारो- 'पतित पावन राधेश्याम ॥'

http://www.archive.org/download/AratiGeetMala/AGM-bandhu-gano-jay-raadhe-raadhe.mp3