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रविवार, फ़रवरी 04, 2018

भजन: रे मन मूरख, जनम गँवायौ

Bhajan: re man murakh janam gavaayo

Listen to bhajan by Shri VNS Bhola

रे मन मूरख जनम गँवायौ ।
करि अभिमान विषय को राच्यो, नाम शरण नहिं आयौ ॥
मन मूरख जनम गँवायौ, रे मन मूरख जनम गँवायौ ।

ये संसार फूल सेमल ज्यौं, सुन्दर देखि रिझायो ।
चाखन लाग्यौ रुई उडि़ गई, हाथ कछू नहिं आयौ ॥
मन मूरख जनम गँवायौ, रे मन मूरख जनम गँवायौ ।

कहा भये अब के मन सोचें, पहिलैं नाहिं कमायौ ।
सूरदास हरि नाम भजन बिनु, सिर धुनि-धुनि पछितायौ ॥
मन मूरख जनम गँवायौ, रे मन मूरख जनम गँवायौ ।



View video on BholaKrishna Channel at youtube
at https://www.youtube.com/watch?v=sseihTzzGvM

गुरुवार, फ़रवरी 01, 2018

भजन: हरि हरि हरि हरि सुमिरन करो

bhajan: hari hari hari hari sumiran karo

MP3 Audio - Bhola

हरि हरि, हरि हरि, सुमिरन करो,
हरि चरणारविन्द उर धरो ..

हरि की कथा होये जब जहाँ,
गंगा हू चलि आवे तहाँ ..
हरि हरि, हरि हरि, सुमिरन करो ...

यमुना सिंधु सरस्वती आवे,
गोदावरी विलम्ब न लावे .

सर्व तीर्थ को वासा तहाँ,
सूर हरि कथा होवे जहाँ ..
हरि हरि, हरि हरि, सुमिरन करो ...



hari hari, hari hari, sumiran karo,
hari charaNAravind ur dharo ..

hari kI kathA hoye jab jahA.N,
gaMgA hU chali Ave tahA.N ..
hari hari, hari hari, sumiran karo ...

yamunA siMdhu sarasvatI Ave,
godAvrI vilamb na lAve .

sarv tIrth ko vAsA tahA.N,
sUr hari kathA hove jahA.N ..
hari hari, hari hari, sumiran karo ...




Listen to the bhajan at Bholakrishna youtube channel at
https://www.youtube.com/watch?v=R4iTCjip0I8

शुक्रवार, अक्टूबर 28, 2016

भजन: सुने री मैंने निरबल के बल राम

Bhajan: sune ri maine nirbal ke bal ram

Listen to this bhajan sung by Shri V N Shrivastav 'Bhola' by clicking here.

सुने री मैंने निरबल के बल राम ,
पिछली साख भरूँ संतन की अड़े सँवारे काम ।

जब लग गज बल अपनो बरत्यो, नेक सरयो नहीं काम ,
निर्बल ह्वै बल राम पुकार्‌यो,आये आधे नाम ।
सुने री मैंने निरबल के बल राम ।

द्रुपद सुता निर्बल भईं ता दिन ,तजि आये निज धाम ,
दुस्सासन की भुजा थकित भई, वसन रूप भये राम ।
सुने री मैंने निरबल के बल राम ।

अप बल,तप बल और बाहु बल ,चौथा है बल राम ,
सूर किशोर कृपा से सब बल हारे को हरिनाम ।
सुने री मैंने निरबल के बल राम ।

बुधवार, नवंबर 11, 2015

आरती: जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा .

MP3 Audio



जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा .
माता जाकी पारवती, पिता महादेवा ..

एकदन्त, दयावन्त, चारभुजाधारी,
माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी .
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा ..

अंधे को आँख देत, कोढ़िन को काया,
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया .
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..

बुधवार, अक्टूबर 07, 2015

भजन: को माता को पिता हमारे

Bhajan: ko mata ko pita hamare

को माता को पिता हमारे ।

कब जनमत हमको तुम देख्यो,
हँसी लगत सुन बैन तुम्हारे ।

कब माखन चोरी कर खायो,
कब बांधे महतारी ।
दुहत कौन सी गइया चारत,
बात कही जे भारी ।
तुम जानत मोहि नंद ढ़िठौना,
नंद कहा ते आये ।।

हम पूरन अविगत अविनासी,
माया ठगनी भुलाये ।
ये सुन ग्वालिन सब मुस्कानी,
हरष मगन हो उठाये ।
सूर श्याम जो निठुरैं सबहीं,
मात पिता हूँ नहीं माने ।




ko mAtA ko pitA hamAre |

kab janmat hamko tum dekhyo,
ha.NsI lagat sun bain tumhAre |

kab mAkhan chorI kar khAyo,
kab bAMdhe mahtArI |
duhat kaun sI ga_iyA chArat,
bAt kahI je bhArI |
tum jAnat mohi naMd .DhiThaunA,
naMd kahA te Aye ||

ham pUran avigat avinAsI,
mAyA ThagnI bhulAye |
ye sun gvAlin sab muskAnI,
haraSh magan ho uThAye |
sUr shyAm jo niThuraiM sabhIM,
mAt pitA hU.N nahIM mAne |

https://www.youtube.com/embed/_v67O7GiHrY

मंगलवार, जून 16, 2015

भजन: हे गोविन्द राखो शरन

bhajan - he govind rakho sharan
MP3 Audio

हे गोविन्द हे गोपाल

हे गोविन्द राखो शरन
अब तो जीवन हारे

नीर पिवन हेत गयो सिन्धु के किनारे
सिन्धु बीच बसत ग्राह चरण धरि पछारे

चार प्रहर युद्ध भयो ले गयो मझधारे
नाक कान डूबन लागे कृष्ण को पुकारे

द्वारका मे सबद दयो शोर भयो द्वारे
शन्ख चक्र गदा पद्म गरूड तजि सिधारे

सूर कहे श्याम सुनो शरण हम तिहारे
अबकी बेर पार करो नन्द के दुलारे

Listen to the bhajan at Bholakrishna youtube channel at
https://www.youtube.com/watch?v=sYhoscjfd4s



शुक्रवार, मई 17, 2013

भजन - नाच्यो बहुत गोपाल

Nachyo Bahut Gopal - MP3 Audio
By Shri V N Shrivastav 'Bhola'

नाच्यो बहुत गोपाल अब मैं
नाच्यो बहुत गोपाल ,

काम क्रोध को पहिर चोलना
कंठ विषय की माल,
अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल

तृष्णा नाद करत घट भीतर
नाना विधि दे ताल,
भरम भयो मन भयो पखावज
चलत कुसंगत चाल,
अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल

सूरदास की सबे अविद्या
दूर करो नन्दलाल,
अब में नाच्यो बहुत गोपाल

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See and hear this bhajan on BholaKrisha youtube channel at
http://www.youtube.com/watch?v=2jTZ9Rm3Uv0



अब मैं नाच्यों बहुत गुपाल ।

काम क्रोध को पहिरि चोलना, कंठ विषय की माल ।
महा मोह के नूपूर बाजत, निंदा शबद रसाल ।
भरम भरयो मन भयो पखावज, चलत कुसंगत चाल ।
तृष्णा नाद करत घट भीतर, नाना विधि दै ताल ।
माया को कटि फेटा बाँध्यो, लोभ तिलक दै भाल ।
कोटिक कला काँछि देखरार्इ, जल पल सुधि नहिं काल ।
सूरदास की सबै अविद्या दूरि करौ नंदलाल ।

शनिवार, मई 01, 2010

भजन - दीनन दुख हरन देव

दीनन दुख हरन देव, सन्तन सुखकारी ।

अजामील गीध व्याध, इनमें कहो कौन साध,
पंछी हूँ पद पढ़ात, गनिका-सी तारी ।

ध्रुव के सिर छत्र देत, प्रहलाद कहँ उबार देत,
भगत हेत बांध्यो सेत, लंकपुरी जारी ।

तंदुल देत रीझ जात, सागपात सों अघात,
गिनत नहीं जूँठे फल, खाटे-मीठे-खारी ।

गज को जब ग्राह ग्रस्यो, दुस्सासन चीर हरयो,
सभा बीच कृष्ण-कृष्ण द्रौपदी पुकारी ।

इतने में हरि आइ गये, बसनन आरूढ़ भये,
सूरदास द्वारे ठाढ़ो, आँधरो भिखारी ।

शुक्रवार, नवंबर 07, 2008

भजन - तुम तजि और कौन पै जाऊं .

Tum Taji Aur Kaun Pai Jaun
by Shri V N Shrivastav 'Bhola'
from Shree Ram Sharanam

तुम तजि और कौन पै जाऊं .
काके द्वार जाइ सिर नाऊं पर हाथ कहां बिकाऊं ..

ऐसो को दाता है समरथ जाके दिये अघाऊं .
अंतकाल तुम्हरो सुमिरन गति अनत कहूं नहिं पाऊं ..

(रंक अयाची कियो सुदामा, दियो अभय पद ढ़ाऊँ ।
कामधेनु चिंतामनि दीनों, कलप वृच्छ तर छाऊँ ।)

भवसमुद्र अति देख भयानक मन में अधिक डराऊं .
कीजै कृपा सुमिरि अपनो पन सूरदास बलि जाऊं ..

मंगलवार, अगस्त 12, 2008

रघुकुल प्रगटे हैं रघुबीर ..

रघुकुल प्रगटे हैं रघुबीर ..

देस देस से टीको आयो रतन कनक मनि हीर .

घर घर मंगल होत बधाई भै पुरवासिन भीर .

आनंद मगन होइ सब डोलत कछु ना सौध शरीर .

मागध बंदी सबै लुटावैं गौ गयंद हय चीर .

देत असीस सूर चिर जीवौ रामचन्द्र रणधीर .