भजन - नाच्यो बहुत गोपाल

Nachyo Bahut Gopal - MP3 Audio
By Shri V N Shrivastav 'Bhola'

नाच्यो बहुत गोपाल अब मैं
नाच्यो बहुत गोपाल ,

काम क्रोध को पहिर चोलना
कंठ विषय की माल,
अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल

तृष्णा नाद करत घट भीतर
नाना विधि दे ताल,
भरम भयो मन भयो पखावज
चलत कुसंगत चाल,
अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल

सूरदास की सबे अविद्या
दूर करो नन्दलाल,
अब में नाच्यो बहुत गोपाल

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See and hear this bhajan on BholaKrisha youtube channel at
http://www.youtube.com/watch?v=2jTZ9Rm3Uv0



अब मैं नाच्यों बहुत गुपाल ।

काम क्रोध को पहिरि चोलना, कंठ विषय की माल ।
महा मोह के नूपूर बाजत, निंदा शबद रसाल ।
भरम भरयो मन भयो पखावज, चलत कुसंगत चाल ।
तृष्णा नाद करत घट भीतर, नाना विधि दै ताल ।
माया को कटि फेटा बाँध्यो, लोभ तिलक दै भाल ।
कोटिक कला काँछि देखरार्इ, जल पल सुधि नहिं काल ।
सूरदास की सबै अविद्या दूरि करौ नंदलाल ।

भजन - राम कृष्ण कहिये उठि भोर


Here is a wonderful morning bhajan sung by Shri VNS Bhola.

In his autobiographical blog महावीर बिनवउँ हनुमाना, he writes:
मेरे परमप्रिय स्वजनों ,
लगभग ८० वर्ष पूर्व मेरी प्यारी अम्मा ने अपने बबुआ 'भोला' ' को प्रातः जगाते हुए यह कहा था -
"बबुआ ,
भोरे उठिके सबसे पहिले भगवान के नावं [नाम] लेबे के चाहीं" !
८३-८४ वर्ष की अवस्था पर आज मैं वही बात आपको सुना रहा हूँ ! प्रातः उठते ही अपने इष्ट का नाम लीजिए , [चाहे कोई भी हो वह - राम हो , कृष्ण या शंकर हो , ईसामसीह हो या मोहम्मद साहेब हों ].
अपने इष्ट के सद्गुणों को याद करिये , उनकी कृपाओं के लिए उन्हें धन्यवाद दीजिए !
View and listen to this and other bhajans sung by him on the youtube channel, Bhola Krishna.


हे राम, राम,
राम राम राम,
मेरे राम, मेरे राम

राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर

राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम
राम
राम कृष्ण कहिये उठि भोर

अवध ईश ये धनुष धरे हैं
वो बृज माखन चोर

अवध ईश ये धनुष धरे हैं
वो बृज माखन चोर

राम, हरे राम राम राम
राम
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर

इनके छत्र चंवर सिंघासन
इनके छत्र चंवर सिंघासन

भरत शत्रुहन लक्ष्मण जोर
भरत शत्रुघन लछमन जोर

उनके लकुट मुकुट पीताम्बर
उनके लकुट मुकुट पीताम्बर
नित गैयन संग नंदकिसोर
नित गैयन संग नंदकिसोर

राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर

उठि भोर
उठि भोर

इन सागर में शिला तराई
इन सागर में सिला तराई

अरे, उन राख्यो गिरि नख की  कोर
उन राख्यो गिरि
उन राख्यो गिरि नख की कोर

'नंददास' प्रभु सब तज भजिये
'नंददास' प्रभु सब तज भजिये
जैसे, जैसे  निरखत  चंद्र चकोर

राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
राम कृष्ण कहिये उठि भोर

राम
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे .
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ..

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे .
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ..

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे .
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ..

कीर्तन - आनन्दमयी माँ

MP3 Audio

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नमः || || 5.73||  (दुर्गासप्तशती)

नमस्तेस्तु महारौद्रे महाघोरपराक्रमे ।
महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि ॥
.. 16.. (दुर्गा कवच)

बोलो श्री श्री आनन्दमयी माँ की जय |
बोलो वृन्दावन  बिहारी लाल की जय ||

आनन्दमयी माँ | आनन्दमयी माँ ||
आनन्दमयी माँ | आनन्दमयी माँ ||

जय गुरु माँ । जय गुरु माँ ॥
कृपामयी दयामयी करुणामयी माँ ।
आनन्दमयी माँ | आनन्दमयी माँ ||

ब्रह्ममयी माँ  । आनन्दमयी माँ ॥



Youtube video with this bhajan (partial) as well as another bhajan in Ma's voice
https://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=bpQ6NKiby-o

बोलो माँ माँ माँ । माँ माँ माँ ।
डाको माँ माँ माँ। माँ माँ माँ ।
भजो माँ माँ माँ ।  माँ माँ माँ ।

जय गुरु जय गुरु जय गुरु माँ ।
बोलो माँ माँ माँ माँ । माँ माँ माँ माँ ।

हरिप्रिय माँ । भक्ति मयी माँ ॥
हरिप्रिय माँ । भक्ति प्रिय माँ ॥
आनन्दमयी माँ | आनन्दमयी माँ ||

जय गुरु, जय गुरु, जय गुरु माँ ।
बोलो जय माँ जय माँ । माँ माँ माँ ॥
माँ माँ माँ माँ । माँ माँ माँ माँ ।
बोलो माँ माँ माँ माँ । माँ माँ माँ ।
भजो माँ माँ माँ माँ । माँ माँ माँ ।
डाको माँ माँ माँ माँ । माँ माँ माँ ।
आनन्दमयी माँ | आनन्दमयी माँ ||

ब्रह्ममयी माँ । प्रेममयी माँ ॥
आनन्दमयी माँ | आनन्दमयी माँ ||

सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ॥ ५ ॥ (सप्तश्लोकी दुर्गा)

ॐ भवताप प्रणाशिन्यै आनन्दघन मूर्तये ।
ज्ञान भक्ति प्रदायिन्यै मातस्तुभ्यं नमो नमः ॥

बोलो श्री श्री आनन्दमयी माँ की जय ।

भजन : जाने अनजाने रे तू ही मन भाया




Watch and hear this bhajan on 'MadhuKeGeet' channel on youtube -
http://www.youtube.com/watch?v=Se0OkGrBsxQ


जाने अनजाने रे, तू ही मन भाया. (२)

ले चल अपनी नगरिया, मोहे दे के बांहों का सहारा . (२)
जाने अनजाने रे, तू ही मन भाया,
तू ही मन भाया ..

अब तो रंग गयी गिरिधर, तेरे ही रंग में,
सांवरा सलोना मेरो, बस गयो मेरे मन में,
जानूँ  ना प्रीत की रीत सांवरिया ,
ले चल अपनी नगरिया, मोहे दे के बांहों का सहारा . 
जाने अनजाने रे, तू ही मन भाया. (२)
तू ही मन भाया ..

जग  के बंधन गिरिधर, कैसे मैं तोड़ चलूं
तू ही अब राह दिखा दे, जिस पे मैं दौड़ चलूँ ,
राह ना सूझे, सांवरिया,
ले चल अपनी नगरिया, मोहे दे के बांहों का सहारा . 
जाने अनजाने रे, तू ही मन भाया.
तू ही मन भाया .. (३)








भजन : पिया सों मिलन कैसे होय री



Watch and hear this bhajan on 'MadhuKeGeet' channel on Youtube
http://www.youtube.com/watch?v=9ZWfafLd7YM

हरे कृष्ण हरे कृष्ण
राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण

मैं जानूँ नहीँ
पिया सों मिलन कैसे होय री

कृष्ण कृष्ण कृष्ण

हर आहट पे सोच लेती
आये होंगे सांवरियां
धड़ धड़ धड़के लागे जियरा
लूंगी उनकी खबरिया
आये नाहिं संवरिया
मैं जानूँ नहीँ
पिया सों मिलन कैसे होय री

हरे कृष्ण राधे कृष्ण राधे कृष्ण

कृष्ण कृष्ण कृष्ण

मन ही मन में बातें होती
मैं जो कहना चाहूं
सामने आते तोय सांवरिया
मैं ठगी रह जाऊं
मूरत बन रह जाऊँ
मैं जानूँ नहीँ
पिया सों मिलन कैसे होय री

कृष्ण कृष्ण कृष्ण

कई जन्मों से बिछड़ बिछड़ कर
अब तो रहा न जाए
हाथ पकड़ ले मधु सांवरिया
अब तो चला न जाए
अपने अंग लगा ले
जानूँ नाहीं
पिया सों मिलन कैसे होय री

भजन - नारायण जिनके हिरदय में

NarayaNa Jina Ke - MP3
Narayana jinake hiradaya me
Voice - V N Shrivastav 'Bhola'

नारायण जिनके हिरदय में
सो कछु करम करे न करे रे ..

पारस मणि जिनके घर माहीं
सो धन संचि धरे न धरे .
सूरज को परकाश भयो जब
दीपक जोत जले न जले रे ..

नाव मिली जिनको जल अंदर
बाहु से नीर तरे न तरे रे .
ब्रह्मानंद जाहि घट अंतर
काशी में जाये मरे न मरे रे ..

भजन : तू ढूंढता है

Thanks to Geeta Jiji for link to this wonderful bhajan from yesteryears:

Song : Tu dhoondhta hai jisko.. fast and slow version 
Movie : Yatrik ,1952, 
Singer: Dhananjay Bhattacharya, 
Lyricist : Pt. Madhur, 
Music Director : Pankaj Mullick



 
तू ढूँढता है जिसको, बस्ती में या कि बन में
वो साँवरा सलोना रहता है, रहता है तेरे मन में ...

मस्जिद में, मंदिरों में, पर्वत के कन्दरों में (२)
नदियों के पानियों में, गहरे समंदरों में,
लहरा रहा है वो ही (२), खुद अपने बाँकपन में
वो साँवरा सलोना रहता है, रहता है तेरे मन में 
तू ढूँढता है ...

हर ज़र्रे में रमा है, हर फूल में बसा है (२)
हर चीज़ में उसी का जलवा झलक रहा है
हरकत वो कर रहा है (२), हर इक के तन बदन में
वो साँवरा सलोना रहता है, रहता है तेरे मन में
तू ढूँढता है ...

क्या खोया क्या था पाया, क्यूँ भाया क्यूँ न भाया 
क्यूँ सोचे जा रहा है, क्या पाया क्या न पाया 
सब छोड़ दे उसी पर (२), बस्ती में रहे कि बन में  
वो साँवरा सलोना रहता है, रहता है तेरे मन में
तू ढूँढता है ... 

भजन : राम नाम घनश्याम नाम

Thanks to Geeta Jiji for link to this wonderful bhajan from yesteryears:

Song: Raam naam Ghanshyam naam..
Film : Yatrik (1952),
Singer: Biren Bal,
Lyricist: B N Sharma ,
Musi Director : Pankaj Mullick,


राम नाम, घनश्याम नाम,
शिव नाम सिमर दिन रात .
हरि नाम सिमर दिन रात ..

राम नाम घनश्याम नाम
शिव नाम सिमर दिन रात
हरि नाम सिमर दिन रात,
जनम सफल तू कर ले अपना,
जनम सफल तू कर ले अपना
मान  ले मेरी बात,
हरि नाम सिमर दिन रात

राम नाम घनश्याम नाम
शिव नाम सिमर दिन रात
हरि नाम सिमर दिन रात

धन्य धन्य वो भूमि प्रभु ने
लिया जहाँ अवतार
धन्य  है वो स्थान जहाँ प्रभु-
प्रेम  का हो परचार (प्रचार)
धन्य  है तीरथ जिनकी यात्रा
मुक्ति की है बात
हरि नाम सिमर दिन रात

राम नाम घनश्याम नाम
शिव नाम सिमर दिन रात
हरि नाम सिमर दिन रात

काम क्रोध मोह लोभ छोड़ कर
नाम प्रभु का गा ले
मानुष तन जो पाया उसका
सच्चा लाभ उठा ले
जीवन ये अनमोल तिहारा
पल पल बीतत जात
हरि नाम सिमर
राम नाम सिमर
शिव नाम सिमर दिन रात
हरि नाम सिमर दिन रात

राम नाम घनश्याम नाम
शिव नाम सिमर दिन रात
हरि नाम सिमर दिन रात

Not in the video clip

पांच पाण्डवों ने जिस पथ पे
किया महा प्रस्थान
उस पथ पे चले जो भी प्राणी
उसका हो कल्याण
भूल जा तू जग की सब बातें
भूल न पर ये बात

हरि नाम सिमर
राम नाम सिमर
शिव नाम सिमर दिन रात
हरि नाम सिमर दिन रात

राम नाम घनश्याम नाम
शिव नाम सिमर दिन रात
हरि नाम सिमर दिन रात




उत्थान पथ

श्री राम प्रेरणा द्वारा जस्टिस शिव दयाल जी श्रीवास्तव द्वारा संकलित उत्थान पथ नवंबर १९५६ में प्रकाशित हुआ था .

श्री राम चरितमानस तथा श्री मद्भगवद्गीता से चुने हुये इन दोहे, चौपाइयों और श्लोकों में उच्चतम धर्म के व्यवहारिक दर्शन का सार है, जिस के पठन, मनन और व्यवहारिक जीवन में घटित करने के प्रयास से सर्वांगी (अध्यात्मिक तथा लौकिक) उत्थान निश्चित है ।

प्रति दिन – प्रार्थना 

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ॥



श्रीकृष्णार्पणमस्तु ।
हरि ॐ

भजन : ज़रा आ शरण मेरे राम की

श्री राम, श्री राम, श्री राम, श्री राम ||

ज़रा आ शरण मेरे राम की, 
मेरा राम करुणानिधान है | (२)

ज़रा आ शरण मेरे राम की, 
मेरा राम किरपानिधान है |

मेरा राम करुणानिधान है |
मेरा राम किरपानिधान है |


ज़रा आ शरण मेरे राम की, 
मेरा राम करुणानिधान है |

पल पल तू उसका ध्यान कर
उसके आगे फरियाद कर | (२)
तेरे कष्ट सब कट जायेंगे 
तेरे पाप सब धुल जायेंगे |

मेरा राम करुणानिधान है |
मेरा राम किरपानिधान है |
मेरा राम किरपानिधान है |


ज़रा आ शरण मेरे राम की, 
मेरा राम करुणानिधान है |


ज़रा आ शरण मेरे राम की, 
मेरा राम किरपानिधान है |

लिया आसरा जिस(ने) नाम का 
वो तो बन गया श्रीराम का | (२)
जिस नाम से पत्थर तरे
तेरा तरना तो आसान है |
तेरा तरना तो आसान है |

ज़रा आ शरण मेरे राम की, 
मेरा राम किरपानिधान है |

लगी भीलनी को ये आस थी 
प्रभु कब आयेगें ये प्यास थी | (२)
जूठे बेर खाये राम ने 
जूठे बेर खाये राम ने |
ये तो जाने सारा जहान है |

मेरा राम करुणानिधान है |
मेरा राम किरपानिधान है |
मेरा राम किरपानिधान है |


ज़रा आ शरण मेरे राम की, 
मेरा राम करुणानिधान है |


ज़रा आ शरण मेरे राम की, 
मेरा राम करुणानिधान है |
मेरा राम किरपानिधान है |

Listen to MP3 Bhajan by Shri Virendra Katyal ji