भजन - नारायण जिनके हिरदय में

NarayaNa Jina Ke - MP3
Narayana jinake hiradaya me
Voice - V N Shrivastav 'Bhola'

नारायण जिनके हिरदय में
सो कछु करम करे न करे रे ..

नाव मिली जिनको जल अंदर
बाहु से नीर तरे न तरे रे .

पारस मणि जिनके घर माहीं
सो धन संचि धरे न धरे .

सूरज को परकाश भयो जब
दीपक जोत जरे न जरे रे ..

ब्रह्मानंद जाहि घट अंतर
काशी में जाये मरे न मरे रे ..

नाव मिली जिनको जल अंदर
बाहु से नीर तरे न तरे रे .

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https://www.youtube.com/watch?v=bztCtDnfY4w


भजन : करुणा सुनो श्याम मेरी

करुना सुनो श्याम मेरी
मैं तो होय रही चेरी तेरी ॥
करुना सुनो श्याम मेरी

दरसन कारन भयी बावरी , बिरह व्यथा तन घेरी
तेरे कारन जोगन हूँगी , दूंगी नगर बिच फेरी
कुञ्ज बन हेरी हेरी ,
करुना सुनो श्याम मेरी

अंग बभूत गले मृग छाला, यूं तन भसम करूंगी
अजहूँ न मिल्या श्याम अबिनासी, बन बन बीच फिरुंगी
रोऊँ नित हेरी फेरी ,
करुना सुनो श्याम मेरी

जब मीरा को गिरिधर मिलिया , दुःख मेटन सुख भेरी ।
रोम रोम साका भई उर में , मिट गयी फेरा फेरी
रही चरनन तर चेरी ,
करुना सुनो श्याम मेरी

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भजन: मेरे राम गरीब निवाज़

अब तुम बिन को मोरि राखे लाज,
मेरे राम गरीब निवाज़ ॥

मैं असहाय अधम अग्यानी, पतितन को सिरताज,
पतित उधारन विरदु आपनो, सिद्ध करो महाराज ॥
अब तुम बिन . . .

जिन जिन ध्याये तिन तिन पाये, अजामील गज व्याध,
हमरी बारी जाय छिपे तुम, किन कुंजन में आज ॥
अब तुम बिन . . .

धीरज दया क्षमा शुचिता दम संयम सच को ज्ञान,
दो हमको ये सद् गुन सारे, कृपा करो महाराज ॥
अब तुम बिन . . .

मैं अपराधी हूँ बड़ाऽऽऽ, (मुझ में) अवगुन भरा विकार,
क्षमा करो अपराध सब, अपना विरद विचार ॥
अब तुम बिन . . .

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भजन : नन्द बाबाजी को छैया

Listen to Krishna Bhajan -
Nand Babaji ko Chhaiyya
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नन्द बाबाजी को छैया .....

नंद बाबाजी को छैया वाको नाम है कन्हैया .
कन्हैया कन्हैया रे ..

बड़ो गेंद को खिलैया आयो आयो रे कन्हैया .
कन्हैया कन्हैया रे ..

काहे की गेंद है काहे का बल्ला
गेंद मे काहे का लागा है छल्ला
कौन ग्वाल ये खेलन आये
खेलें ता ता थैया ओ भैया .
कन्हैया कन्हैया रे ..

रेशम की गेंद है चंदन का बल्ला
गेंद में मोतियां लागे हैं छल्ला
सुघड़ मनसुखा खेलन आये
बृज बालन के भैया कन्हैया .
कन्हैया कन्हैया रे ..

नीली यमुना है नीला गगन है
नीले कन्हैया नीला कदम्ब है
सुघड़ श्याम के सुघड़ खेल में
नीले खेल खिलैया ओ भैया .
कन्हैया कन्हैया रे ..

भजन : मैं हरि बिन क्यूँ जियूँ री माई

मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

पिव कारण बौरी भई, ज्यूं काठहि घुन खाई॥
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

ओखद मूल न संचरै, मोहि लाग्यो बौराई॥
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

कमठ दादुर बसत जल में जलहि ते उपजाई।
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

मीन जल के बीछुरे तन तलफि करि मरि जाई॥
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

पिव ढूंढण बन बन गई, कहुं मुरली धुनि पाई।
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

मीरा के प्रभु लाल गिरधर मिलि गये सुखदाई॥
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

mai hari binu kyun jiyun ri mai -Meera Bhajan - composed by  VNS Bhola - sung by Nandini Srivastav

Long Version - www.youtube.com/v/W96blkFM2Ns




mai hari bin kyu jiyu ri mai - Meera Bhajan - composed by  VNS Bhola - sung by Nandini Srivastav
Short Version - www.youtube.com/v/7549Az_hqOo