भजन : सुनि कान्हा तेरी बांसुरी


सुनि कान्हा तेरी बांसुरी 
बांसुरी तेरी जादू भरी 

सारा गोकुल लगा झूमने
क्या अजब मोहिनी छा गयी 
मुग्ध यमुना थिरकने लगी
तान बंसी की तड़पा गयी
मैं तो जैसे हुई बावरी 
सुनि कान्हा तेरी बांसुरी 
बांसुरी तेरी जादू भरी 

हौले से कोई धुन छेड के
तेरी बंसी तो चुप हो गयी
सात  स्वर के भंवर में  कहीं 
मेरे मन की कली खो गयी
छवि मन में बसी सांवरी 

सुनि कान्हा तेरी बांसुरी 
बांसुरी तेरी जादू भरी

A special Thank You to Induja Bhabhi for the bhajan!

भजन : सांवरो कन्हैया मोरे मन में बसो रे


सांवरो कन्हैया मोरे मन में बसो रे
मुरली बजाने वारो मन में बसो रे
मन में बसो रे कान्हा
तन में बसो रे
कारो कन्हैया मेरो मन में बसो रे
अरे तिरछी नजरिया वारो मन में बसो रे
माखन चुराने वारो मन में बसो रे

जमुना किनारे वो तो मुरली बजाये
गोपियन संग वो तो रास रचाए
मीठी मीठी तान सुनाये जादू डारे
अरे पीले पीताम्बर वारो मन में बसों रे
सांवरो सलोनो मेरो मन में बसो रे

गोकुल नगरिया में माखन चुराए
वृन्दावन में वो रास रचाए
मथुरा नगरिया को वो धीर बंधाए
अरे धेनु चराने वारो मन में बसो रे
मधु को रिझाने वारो मन में बसो रे

भजन : जब से लगन लगी प्रभु तेरी


हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण
राधे कृष्ण

जब से लगन लगी प्रभु तेरी
सब कुछ मैं तो भूल गयी हूँ ..

बिसर गयी क्या था मेरा
बिसर गयी अब क्या है मेरा .
अब तो लगन लगी प्रभु
तेरी तू ही जाने क्या होगा ..

जब मैं प्रभु में खो जाती हूं
मेघ प्रेम के घिर आते हैं .
मेरे मन मंदिर मे प्रभु के
चारों धाम समा जाते हैं ..

बार बार तू कहता मुझसे
जग की सेवा कर तू मन से .
इसी में मैं हूं सभी में मैं हूं
तू देखे तो सब कुछ मैं हूं ..

भजन : मोहे सब घट श्याम ही दीखे


मोहे सब घट श्याम ही दीखे
सब घट श्याम ही दीखे
जित देखूँ उत श्याम ही दीखे (२)

सागर की ये तरंग प्रभुजी
बोले राधे श्याम
नदिया की ये लहर प्रभुजी
गाये राधे श्याम
मोहे सब में श्याम ही दीखे
सब में श्याम ही दीखे
जित देखूँ उत श्याम ही दीखे (२)
मोहे सब घट श्याम ही दीखे

बावरी बन मैं इत उत डोलूँ
निरखूं श्याम सलोना
श्याम नाम की पहर चुनरिया
श्याम ही श्याम पुकारूँ
सब में श्याम ही दीखे
सब में श्याम ही दीखे
जित देखूँ उत श्याम ही दीखे (२)
मोहे सब घट श्याम ही दीखे

नैन चकोर भये प्रभु मधु के
हर क्षण प्रभु संग लागें
देखन चाहें हर पल प्रभु को
सब में प्रभु को पाए
सब में श्याम ही दीखे
सब में श्याम ही दीखे
जित देखूँ उत श्याम ही दीखे (२)
मोहे सब घट श्याम ही दीखे

भजन : दूजा नाहीं मन भायो


जब से तोरे संग नेहा लागे कान्हा
दूजा नाहिं मन भायो
दूजा नाहीं मन भायो

मनवा मोरा इत उत डोलत
इक पल चैन न पाए
तोरी प्रीत की डोरी संग बंध
इत उत जा ना पाए
चरणों में मुझे ले लो प्रभुजी
अब ना भटका जाए
आ जा रे मोरे कान्हा
आ जा रे (३)

दोउ नैना बाट निहारे तोरी
हर पल बरसत जाए
आवन की तोरी आस ले कर
इक पल झपक ना पाए
मन मंदिर में आ जा प्रभुजी
अब ना जाने दूंगी
आ जा रे मोरे कान्हा तू
आ जा रे (३)

मन ही तेरा कृष्ण कन्हैया
मन ही तेरी राधा
जग में रह कर जो भी करता
है उसकी अभिलाषा
दे ऐसा वरदान मधु अब
मधु श्याम मन भाये
आ जा रे मोरे कान्हा तू
आ जा रे (३)

भजन : पिया सों मिलन कैसे होय री


हरे कृष्ण हरे कृष्ण
राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण

मैं जानूँ नहीँ
पिया सों मिलन कैसे होय री

कृष्ण कृष्ण कृष्ण

हर आहट पे सोच लेती
आये होंगे सांवरियां
धड़ धड़ धड़के लागे जियरा
लूंगी उनकी खबरिया
आये नाहिं संवरिया
मैं जानूँ नहीँ
पिया सों मिलन कैसे होय री

हरे कृष्ण राधे कृष्ण राधे कृष्ण

कृष्ण कृष्ण कृष्ण

मन ही मन में बातें होती
मैं जो कहना चाहूं
सामने आते तोय सांवरिया
मैं ठगी रह जाऊं
मूरत बन रह जाऊँ
मैं जानूँ नहीँ
पिया सों मिलन कैसे होय री

कृष्ण कृष्ण कृष्ण

कई जन्मों से बिछड़ बिछड़ कर
अब तो रहा न जाए
हाथ पकड़ ले मधु सांवरिया
अब तो चला न जाए
अपने अंग लगा ले
जानूँ नाहीं
पिया सों मिलन कैसे होय री

भजन : कान्हा रे


कान्हा रे
तू तो मुझको जाने
तू तो सब कुछ जाने
मैं तो नाचूंगी
मैं तो गाऊँगी
तेरी मुरली की धुन सुन नाचूंगी
तेरी मुरली की धुन सुन गाऊँगी
मैं तो नाचूंगी

तन और मन के भक्ति योग से
मैं बनी संवरिया
तन और मन के कर्म योग से
मैं बनी बंसुरिया
कान्हा रे
तू चाहे तो बजा ले
कान्हा रे
तू चाहे तो नचा ले

जब से श्यामा श्याम बसे है
मन मंदिर में मधु के
तब से तन बन गयी मुरलिया
श्याम श्याम ही बोले
कान्हा रे
अपने सुर में मिला ले
कान्हा रे
अपनी मुरलिया बना ले

अब तो तन बन गयी मुरलिया
श्याम श्याम ही बोले
सात सुरों के संगम से श्याम
जैसा चाहे बजाले
कान्हा रे
सुर में मोहे डुबा ले
कान्हा रे
मधु मुरलिया बना ले

मैं तो नाचूंगी
मैं तो गाऊँगी
तेरी मुरली की धुन सुन नाचूंगी
तेरी मुरली की धुन सुन गाऊँगी
मैं तो नाचूंगी

भजन - आप बिन कौन सुने प्रभु मोरी


आप बिन कौन सुने प्रभु मेरी

तुम समरथ सब लायक दाता
सब पर कृपा घनेरी

दास की विपद निवारण कीजे
अरज करूं मैं तेरी

जब जब पीर पड़ी भगतन पर
तब तब की न देरी

कहत कबीरा देर कहाँ की
नाथ शरण मैं तेरी




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भजन : हर सांस में हर बोल में

हर सांस में हर बोल में
हरि नाम की झंकार है .
हर नर मुझे भगवान है
हर द्वार मंदिर द्वार है ..

ये तन रतन जैसा नहीं
मन पाप का भण्डार है .
पंछी बसेरे सा लगे
मुझको सकल संसार है ..

हर डाल में हर पात में
जिस नाम की झंकार है .
उस नाथ के द्वारे तू जा
होगा वहीं निस्तार है ..

अपने पराये बन्धुओं का
झूठ का व्यवहार है .
मनके यहां बिखरे हुये
प्रभु ने पिरोया तार है ..

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भजन - श्यामल वदन सुखधाम

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श्यामल वदन सुखधाम
पावन नाम हे श्री राम

पाते सदा विश्राम
सुमिरन कर तुम्हारा नाम

करुणाकुँज ज्योतिर्पुँज
परहित उर बसत अविराम

रुचिकर बैन शुचितर नैन
परहित दीन के बल राम

श्यामल वदन सुखधाम
पावन नाम हे श्री राम

पाहन पतित तारी अहिल्या
रूपपति श्री राम

सुर असुर जन सकल तारे
जगत हित अविराम

श्यामल वदन सुखधाम
पावन नाम हे श्री राम

नीति पालक धर्म रक्षक
शक्ति रूप अनाम

बार बार प्रणाम हे
रघुवंश लोचन राम

श्यामल वदन सुखधाम
पावन नाम हे श्री राम