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सोमवार, जून 09, 2025

हरि बिन क्यूँ जीऊँ री माई - नंदिनी


हरि बिन क्यूँ जीऊँ री माय।

हरि कारण बौरी भई, जस काठहि घुन खाय।

औषध मूल न संचरै, मोहि लागौ बौराय।

कमठ दादुर बसत जलमँह, जलहि ते उपजाय।

हरि ढूढँन गई बन-बन, कहुँ मुरली धुन पाय।

मीरा के प्रभु लाल गिरधर, मिलि गये सुखदाय।

बुधवार, अक्टूबर 26, 2016

भजन: जो भजे हरि को सदा

जो भजे हरि को सदा सो परम पद पायेगा ..

देह के माला तिलक और भस्म नहिं कुछ काम के .
प्रेम भक्ति के बिना नहिं नाथ के मन भायेगा ..

दिल के दर्पण को सफ़ा कर दूर कर अभिमान को .
खाक हो गुरु के चरण की तो प्रभु मिल जायेगा ..

छोड़ दुनिया के मज़े और बैठ कर एकांत में .
ध्यान धर हरि के चरण का फिर जनम नहीं पायेगा ..

दृढ़ भरोसा मन में रख कर जो भजे हरि नाम को .
कहत ब्रह्मानंद ब्रह्मानंद में ही समायेगा ..

Listen to the bhajan by clicking here.

शनिवार, अक्टूबर 03, 2015

भजन: रे मन हरि सुमिरन कर लीजै

Click here to listen to the bhajan

Bhajan: re man hari sumiran kar leeje


मंगल भवन अमंगल हारी
द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी

रे मन, हरि सुमिरन कर लीजै ।
 हरि सुमिरन कर लीजै ।
 हरि सुमिरन कर लीजै ।

हरिको नाम प्रेमसों जपिये, हरिरस रसना पीजै ।
हरिगुन गाइय, सुनिय निरंतर, हरि-चरननि चित दीजै ॥

हरि-भगतनकी सरन ग्रहन करि, हरिसँग प्रीति करीजै ।
हरि-सम हरि जन समुझि मनहिं मन तिनकौ सेवन कीजै ॥

हरि केहि बिधिसों हमसों रीझै, सो ही प्रश्न करीजै ।
हरि-जन हरिमारग पहिचानै, अनुमति देहिं सो कीजै ॥

हरिहित खाइय, पहिरिय हरिहित, हरिहित करम करीजै ।
हरि-हित हरि-सन सब जग सेइय, हरिहित मरिये जीजै ॥

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maMgal bhavan amaMgal hArI
drava_u so dasrath ajir bihArI

re man hari sumiran kar lIjai |

hariko nAm premsoM japiye, hariras rasnA pIjai |
harigun gAiy, suniy niraMtar, hari-charanni chit dIjai ||

hari-bhagatankI saran grahan kari, haris.Ng prIti karIjai |
hari-sam hari jan samujhi manhiM man tinakau sevan kIjai ||

hari kehi bidhisoM hamsoM rIjhai, so hI prashn karIjai |
hari-jan harimArag pahichAnai, anumti dehiM so kIjai ||

harihit khAiy, pahiriy harihit, harihit karam karIjai |
hari-hit hari-san sab jag seiy, harihit mariye jIjai || 

भजन: हरि नाम सुमिर सुख धाम

bhajan: hari nam sumir sukh dham jagat me

हरि नाम सुमिर हरि नाम सुमिर
हरि नाम सुमिर सुख धाम
जगत में जीवन दो दिन का .
जगत में जीवन दो दिन का ..

सुंदर काया देख लुभाया
लाड़ करे तन का .
छूटा साँस विगत भयी देही
ज्यों माला मनका ..
जगत में जीवन दो दिन का ..

पाप कपट कर माया जोड़ी
गर्व करे धन का .
सभी छोड़ कर चला मुसाफिर
वास हुआ वन का ..
जगत में जीवन दो दिन का ..

यह संसार कपट की माया
मेला पल छिन का
ब्रह्मानन्द भजन कर बंदे
नाथ निरंजन का . .
जगत में जीवन दो दिन का ..

जगत में जीवन दो दिन का .
जगत में जीवन दो दिन का ..

सुंदर काया देख लुभाया
लाड़ करे तन का .
छूटा साँस विगत भयी देही
ज्यों माला मनका ..
जगत में जीवन दो दिन का ..

पाप कपट कर माया जोड़ी
गर्व करे धन का .
सभी छोड़ कर चला मुसाफिर
वास हुआ वन का ..
जगत में जीवन दो दिन का ..

यह संसार कपट की माया,
मेला दो दिन का
ब्रह्मानन्द भजन कर बंदे
नाथ निरंजन का . .
जगत में जीवन दो दिन का ..

bhajan: hari nam sumir sukh dham jagat me

hari nAm sumir hari nAm sumir
hari nAm sumir sukh dhAm
jagat meM jIvan do din kA .
jagat meM jIvan do din kA ..

suMdar kAyA dekh lubhAyA
lA.D kare tan kA .
ChUTA sA.Ns vigat bhayI dehI
jyoM mAlA mankA ..
jagat meM jIvan do din kA ..

pAp kapaT kar mAyA jo.DI
garv kare dhan kA .
sabhI Cho.D kar chalA musAphir
vAs huA van kA ..
jagat meM jIvan do din kA ..

yah saMsAr kapaT kI mAyA
melA pal Chin kA
brahmAnand bhajan kar baMde
nAth niraMjan kA . .
jagat meM jIvan do din kA ..

jagat meM jIvan do din kA .
jagat meM jIvan do din kA ..

suMdar kAyA dekh lubhAyA
lA.D kare tan kA .
ChUTA sA.Ns vigat bhayI dehI
jyoM mAlA mankA ..
jagat meM jIvan do din kA ..

pAp kapaT kar mAyA jo.DI
garv kare dhan kA .
sabhI Cho.D kar chalA musAphir
vAs huA van kA ..
jagat meM jIvan do din kA ..

yah saMsAr kapaT kI mAyA,
melA do din kA
brahmAnand bhajan kar baMde
nAth niraMjan kA . .
jagat meM jIvan do din kA .. 

रविवार, सितंबर 20, 2015

भजन: हरि तुम हरो जन की भीर

Bhajan: Hari Tum Haro Jan Ki Bheer
By Anjana Bhattacharya
MP3 from Shree Ram Sharanam, Delhi.

हरि तुम हरो जन की भीर,
द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढ़ायो चीर॥

भगत कारण रूप नरहरि धर्‌यो आप सरीर ॥
हिरण्यकश्यप मारि लीन्हो धर्‌यो नाहिन धीर॥

बूड़तो गजराज राख्यो कियौ बाहर नीर॥
दासी मीरा लाल गिरधर चरणकंवल सीर॥



hari tum haro jan kI bhIr,
dropdI kI lAj rAkhI, tum ba.DhAyo chIr||

bhagat kAraN rUp narahri dhar‌yo Ap sarIr ||
hiraNyakashyap mAri lInho dhar‌yo nAhin dhIr||

bU.Dto gajrAj rAkhyo kiyau bAhar nIr||
dAsI mIrA lAl girdhar charaNakaMval sIr||