एक ओंकार सतनाम करता पुरख
निर्भओ निरवैर अकाल मूरत
अजूनी सभम गुरप्रसाद
आदि सचु जुगादि सचु ॥
है भी सचु नानक होसी भी सचु ॥१॥
तुम ठाकुर तुम पे अरदास
तुम मात-पिता हम बारक तेरे
तुमरी कृपा में सुख घनेरे |
कोई न जाने तुमरा अंत
ऊँचे ते ऊँचा भगवंत |
सगल समग्री तुमरे सूत्र धारी
तुम पे होए सो आज्ञाकारी |
तुमरी गत मीत तुम्ही जानी
नानक दास सदा कुर्बानी |
अरदास
ੴ एक ओंकार वाहेगुरू जी की फतेह।।
श्री भगौती जी सहाय।।
वार श्री भगौती जी की पातशाही दसवीं।।
प्रिथम भगौती सिमरि कै गुरु नानक लई धिआइ ॥
फिर अंगद गुरु ते अमरदास रामदासै होई सहाय।।
अरजन हरगोबिंद नो सिमरौ श्री हरिराय।।
श्री हरिकृषन ध्याइये जिस डिठै सभ दुख जाए।।
तेग बहादर सिमरियै घर नौ निध आवै धाय।।
सभ थाईं होए सहाय।।
दसवां पातशाह गुरु गोविंद साहिब जी ! सभ थाईं होए सहाय।।
श्री अकाल पुरुष जी का खालसा
जी साहब जी वाहे गुरु
प्रिथमे सरबत खालसा जी दी अरदास है जी, सरबत खालसा जी को वाहेगुरु, वाहेगुरु,
वाहेगुरु चित्त आवे, चित्त आवण दा सदका सरब सुख होवे।
जहां जहां खालसा जी साहिब, तहां तहां रछया रियायत,
देग तेग फतेह,
बिरद की पैज, पंथ की जीत,
श्री साहिब जी सहाय, खालसे जी के बोलबाले, बोलो जी वाहेगुरु !
झंडे, बुंगे, जुगो जुग अटल, धरम का जैकार, बोलो जी वाहेगुरु !
आप दे हुज़ूर ……… दी अरदास है जी।
भुल चूक माफ करनी।
सरबत दे कारज रास करने। सोई पियारे मेल, जिनां मिलया तेरा नाम चित्त आवे।
नानक नाम चढ़दी कलां, तेरे भाणे
सरबत दा भला। वाहेगुरू जी का खालसा, वाहेगुरू जी की फतेह॥
आरती गुरु नानक जी की
गगन मै थालु रवि चंदु दीपक
बने तारिका मंडल जनक मोती ॥
धूपु मल आनलो पवणु चवरो करे
सगल बनराइ फूलंत जोती ॥
कैसी आरती होइ भव खंडना तेरी आरती ॥
अनहता सबद वाजंत भेरी रहाउ ॥
सहस तव नैन नन नैन है तोहि कउ
सहस मूरति नना एक तोही ॥
सहस पद बिमल नन एक पद गंध बिनु
सहस तव गंध इव चलत मोही ॥
सभ महि जोति जोति है सोइ ॥
तिस कै चानणि सभ महि चानणु होइ ॥
गुर साखी जोति परगटु होइ ॥
जो तिसु भावै सु आरती होइ ॥
हरि चरण कमल मकरंद लोभित मनो
अनदिनो मोहि आही पिआसा ॥
कृपा जलु देहि नानक सारिंग
कउ होइ जा ते तेरै नामि वासा ॥
Handwritten text by Pujya Dadi,
The transcription is not yet complete (please write a comment with any corrections/additions)..
Please listen to the audio for complete lyrics.













कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें