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सोमवार, मई 30, 2022

यदि नाथ का नाम दयानिधि है - उमा


यदि नाथ का नाम दयानिधि है, तो दया भी करेंगे कभी न कभी ।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के, दुख क्लेश हरेगें कभी न कभी ।

जिस अंग की शोभा सुहावनी है, जिस श्यामल रंग में मोहनी है ।
उस रूप सुधा से स्नेहियों के, दृग प्याले भरेगें कभी न कभी ।

जहां गीध निषाद का आदर है, जहां व्याध अजामिल का घर है ।
वही वेश बनाके उसी घर में, हम जा ठहरेगें कभी न कभी ।

करुणानिधि नाम सुनाया जिन्हें, कर्णामृत पान कराया जिन्हें ।
सरकार अदालत में ये गवाह, सभी गुजरेगें कभी न कभी ।

हम द्वार में आपके आके पड़े, मुद्दत से इसी जिद पर हैं अड़े ।
भव-सिंधु तरे जो बड़े से बड़े, तो ये 'बिन्दु' तरेगें कभी न कभी ।

शनिवार, मई 28, 2022

अब सौंप दिया इस जीवन का - उमा

Click here to listen to the bhajan sung by Dr. Uma Shrivastava

अब सौंप दिया इस जीवन का,
सब भार तुम्हारे हाथों में.
उद्धार पतन अब मेरा है,
भगवान तुम्हारे हाथों में.
अब सौंप दिया इस जीवन का…

हम तुमको कभी नहीं भजते,
फिर भी तुम हमें नहीं तजते.
अपकार हमारे हाथों में,
उपकार तुम्हारे हाथों में.
अब सौंप दिया इस जीवन का…

हम में तुम में है भेद यही,
हम नर हैं, तुम नारायण हो.
हम हैं संसार के हाथों में,
संसार तुम्हारे हाथों में.
अब सौंप दिया इस जीवन का…

दृग 'बिंदु' बनाया करते हैं,
एक सेतु विरह के सागर में.
जिससे हम पहुंचा करते हैं,
उस पार तुम्हारे हाथों में.
अब सौंप दिया इस जीवन का…

यही हरि भक्त कहते हैं - उमा

Click here to listen to the bhajan by Dr. Uma Shrivastav

यही हरि भक्त  कहते हैं, यही सद्-ग्रन्थ गाते हैं ।
कि जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते हैं ॥

नहीं स्वीकार करते हैं निमंत्रण नृप सुयोधन का ।
विदुर के घर पहुंचकर भोग छिलकों का लगाते हैं ॥
कि जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते हैं ।
यही हरि भक्त  कहते हैं, यही सद्-ग्रन्थ गाते हैं ॥

न आये मधुपुरी से गोपियों की दुख कथा सुनकर ।
द्रुपदाजी की दशा पर द्वारका से दौड़ आते हैं ॥
यही हरि भक्त  कहते हैं, यही सद्-ग्रन्थ गाते हैं ।

न रोये वन-गमन में श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में आंसू बहाते हैं ॥
न जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते हैं ।
यही हरि भक्त  कहते हैं, यही सद्-ग्रन्थ गाते हैं ॥

कठिनता से चरण धोकर मिले कुछ 'बिन्दु' विधि हर को ।
वो चरणोदक स्वयं केवट के घर जाकर लुटाते हैं ॥
कि जाने कौन से गुण पर दयानिधि रीझ जाते हैं ।
यही हरि भक्त  कहते हैं, यही सद्-ग्रन्थ गाते हैं ॥

गुरुवार, मई 26, 2022

जीवन का मैंने सौंप दिया

जीवन का मैंने सौंप दिया अब सब भार तुम्हारे हाथों में,
उद्धार पतन अब सब मेरा है सरकार तुम्हारे हाथों में।

हम तुमको कभी नहीं भजते फिर भी तुम हमको नहीं तजते,
अपकार हमारे हाथों में उपकार तुम्हारे हाथों में।

हम में तुम में भेद यही हम नर हैं तुम नारायण हो,
हम हैं संसार के हाथों में संसार तुम्हारे हाथों में।

कल्पना बनाया करती है इस सेतु विरह के सागर पर,
जिससे हम पहुँचा करते हैं उस पार तुम्हारे हाथों में।

दृग ‘बिन्दु’ कर रहे हैं भगवन दृग नाव विरह सागर में है,
मंझधार बीच फँसे हैं हम और है पतवार तुम्हारे हाथों में॥

गुरुवार, सितंबर 03, 2015

भजन: प्रबल प्रेम के पाले पड़ कर

bhajan: prabal prem ke pale pad kar

Listen to bhajan in the voice of Shri Atul Shrivastava

प्रबल प्रेम के पाले पड़ कर प्रभु को नियम बदलते देखा .
अपना मान भले टल जाये भक्त मान नहीं टलते देखा ..

जिसकी केवल कृपा दृष्टि से सकल विश्व को पलते देखा .
उसको गोकुल में माखन पर सौ सौ बार मचलते देखा ..

जिसके चरणकमल कमला के करतल से न निकलते देखा .
उसको ब्रज की कुंज गलिन में कंटक पथ पर चलते देखा ..

जिसका ध्यान विरंचि शंभु सनकादिक से न सम्भलते देखा .
उसको ग्वाल सखा मंडल में लेकर गेंद उछलते देखा ..

जिसकी वक्र भृकुटि के डर से सागर सप्त उछलते देखा .
उसको माँ यशोदा के भय से अश्रु बिंदु दृग ढ़लते देखा ..



Listen to bhajan in the voice of Shri Akhil Shrivastava

सोमवार, अगस्त 24, 2015

भजन: दशा मुझ दीन की भगवन संभालोगे तो क्या होगा

bhajan: dasha mujh deen ki bhagawan samhaloge to kya hoga
lyrics: Bindu

Click here to listen to the bhajan sung by Sau. Geeta Shrivastava

दशा मुझ दीन की भगवन संभालोगे तो क्या होगा |
अगर चरणों की सेवा में लगा लोगे तो क्या होगा ||

कि नामी पातकी मैं हूँ कि नामी पाप हर हो तुम |
जो लज्जा दोनों नामों की बचा लोगे तो क्या होगा ||
दशा मुझ दीन की भगवन संभालोगे तो क्या होगा |

जिन्होंने तुमको करुणा कर पतित पावन बनाया है ||
उन्ही पतितों को तुम पावन बना लोगे तो क्या होगा |
दशा मुझ दीन की भगवन संभालोगे तो क्या होगा ||

यहाँ सब मुझसे कहते हैं किसी के काम का ना तू |
मैं किसका हूँ ये झगड़ा ही मिटा दोगे तो क्या होगा ||
दशा मुझ दीन की भगवन संभालोगे तो क्या होगा ||

अजामिल गीध गणिका जिस दया गंगा में बहते हैं |
उसी में बिन्दु सा पापी मिला दोगे तो क्या होगा ||
दशा मुझ दीन की भगवन संभालोगे तो क्या होगा ||