श्री राम जय राम जय जय राम
एक ओंकार सतनाम करता पुरखु
निरभउ निरवैरु अकाल मूरति
अजूनी सैभं गुर प्रसादि। जपु।
आदि सचु जुगादि सचु।
है भी सचु नानक होसी भी सचु।
तुम ठाकुर तुम पै अरदास
तुम मात पिता हम बालक तेरे।
तुमरी कृपा में सुख घनेरे।
कोइ नहि जानै तुमरा अंतु।
ऊचे ते ऊचा भगवंत।
सगल समगरी तुमरै सूत्रि धारी।
तुमते होइ सु आज्ञाकारी।
तुमरी गति मिति तुम ही जानी।
नानक दास सदा कुरबानी।
दोउ कर जोरि करउ अरदास,
तिस भंडे ता आवे रास
ता आगे नानक खड़ा करे अरदास
श्री भंडे पंडे जी चरन कमल का ध्यान धरके
गाजो जी श्री वाहेगुरु जी।
श्री अमृतसर तरन तारन दुख निवारन जी के
चरन कमल का ध्यान धरके
गाजो जी श्री वाहेगुरु जी।
श्री गुरु नानक देव निरभउ निरंकार
अखंड जोति सरूप का ध्यान धरके
गाजो जी श्री वाहेगुरु जी।
श्री बाबा श्री चंद बाबा
लक्ष्मी चंद बाबा सहज राम जी बाबा
संगत बख्श जी व माधो राम जी
व गुरु नारायण राम जी
व गुरु केशव राम जी महाराज
गुरु परमात्मा गुरु स्वामी नाथ के
चरन कमल का ध्यान धरके
बोलो जी श्री वाहेगुरु जी।
गरीब निवाज सच्चे पातशाह
सच्चिदानंद परमेश्वर निरंकार निर्वाण
अखंड जोतिष सरूप का ध्यान धरके
बोलो जी श्री वाहेगुरु जी।
गरीब निवाज सच्चे पातशाह
अमृत बेला की अरदास
भूल चूक माफ
सच खंड प्रमान
ब्रत की लाज बाणी की टेक
साधु का संग हरि नाम का रंग।
भजन प्रगार दुख पाप क्लेश का नाश
श्री गुरु महाराज का बिलास।
सरब का आनंद मंगल रास।
स्थान मकान बस्ती खेड़ा गांव
आबादान राजा राज
प्रजा सुख बसत
संत पढ़ते सुनते लबस्ते।
सतगुरु नानक देव निरवान देव
चढ़ती कला तेरे भाणे।
सरब जा का भला।
दंडवत बंदना अनेक बार
सरब कला सा मस्ता डोलंत
ते राखो प्रभु नानक दे करि
हाथ माथ टेक महाराज
श्री वाहेगुरु जी।
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ੴ
एक ओंकार
श्री वाहेगुरु जी की फतेह ।
श्री भगौती जी सहाय ।।
वार श्री भगौती जी की ।।
पातशाही (दसवीं)।।
प्रथम भगौती सिमरि कै गुरु नानक लई धिआइ ॥
फिर अंगद गुरु ते अमरदास रामदासै होई सहाय।।
अरजन हरगोबिंद नो सिमरौ श्री हरिराय।।
श्री हरिकृषन ध्याइये जिस डिठै सभ दुःख जाए।।
गुरु तेग बहादर सिमरियै घर नौ निध आवै धाय।।
दसवां पातशाह श्री गुरु गोविंद जी साहिब!
सभ थाईं होए सहाय।।
सत श्री अकाल पुरख जी का खालसा
जी साहिब बोलो जी श्री वाहेगुरु जी।
प्रथमे सरबत सबह खालसे जी को
(श्री वाहेगुरु, वाहेगुरु, वाहेगुरु) चित्त आवे,
चित्त आवण दा सदका सरब सुख होवे।
जहां जहां खालसा जी साहिब,
तहां तहां रछया रियायत,
बिरद की पैज रहे, पंथ की जीत,
श्री साहिब जी सहाय,
देग तेग फतेह गुरु
खालसे जी के बोलबाले,
बोलो जी श्री वाहेगुरु जी।
चौकियां, बुंगै, झंडे, जुगो जुग अटल
धरम की जैकार।
बोलो जी श्री वाहेगुरु जी।
तेरे हजूर (रहिराम) दी अरदास
भूल चूक माफ,
तेरे चरन कमल पासि सिख
पड़दे सुणदे सरबत लाइवत
नानक नाम चढ़दी कलां,
तेरे भाणे सरबत दा भला।
श्री वाहेगुरु जी का खालसा
श्री वाहेगुरु जी की फतेह।
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ੴ
आरती श्री गुरु नानक जी की
गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने तारिका मंडल जनक मोती ॥
धूपु मलआनलो पवणु चवरो करे सगल बनराइ फूलंत जोती ॥
कैसी आरती होइ भव खंडना तेरी आरती ॥
अनहता सबद वाजंत भेरी ॥ रहाउ ॥
सहस तव नैन नन नैन है तोहि कउ सहस मूरति नना एक तोही ॥
सहस पद बिमल नन एक पद गंध बिनु सहस तव गंध इव चलत मोही ॥
सभ महि जोति जोति है सोइ ॥
तिस कै चानणि सभ महि चानणु होइ ॥
गुर साखी जोति परगटु होइ ॥
जो तिसु भावै सु आरती होइ ॥
हरि चरण कमल मकरंद लोभित मनो अनदिनो मोहि आही पिआसा ॥
कृपा जलु देहि नानक सारिंग कउ होइ जा ते तेरै नामि वासा ॥
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हे मेरे गुरुदेव करुणा सिन्धु करुणा कीजिये ।
हूँ अधम आधीन अशरण, अब शरण में लीजिये ॥
खा रहा गोते हूँ मैं भवसिन्धु के मझधार में ।
आसरा है दूसरा कोई न अब संसार में ॥
मुझमें है जप तप न साधन और नहीं कुछ ज्ञान है ।
निर्लज्ता है एक बाकी और बस अभिमान है ॥
पाप बोझे से लदी नैया भँवर में जा रही ।
नाथ दौड़ो, अब बचाओ जल्द डूबी जा रही ॥
आप भी यदि छोड़ देंगे फिर कहाँ जाऊँगा मैं ।
जन्म-दुःख से नाव कैसे पार कर पाऊँगा मैं ॥
सब जगह "मंजुल" भटक कर, ली शरण प्रभु आपकी ।
पार करना या न करना, दोनों मर्जी आपकी ॥
परम गुरु जै जै राम परम गुरु जै जै राम।
जयति जयति वन्दन हर की
गाओ मिल आरती सिया रघुवर की
गुरु पद नख मणि चन्द्रिका प्रकाश
जाके उर बसे ताके मोह तम नाश
जाके माथ नाथ तव हाथ कर वास
ताके होए माया मोह सब ही विनाश
पावे रति गति मति सिया वर की
गाओ मिल आरती सिया रघुवर की
भक्ति योग रस अवतार अभिराम
करें निगमागम समन्वय ललाम
सिय पिय नाम रूप लीला गुण धाम
बाँट रहे प्रेम निष्काम बिन दाम
हो रही सफल काया नारी नर की
गाओ मिल आरती सिया रघुवर की
जयति जयति बंदन हर की,
गाओ मिल आरती श्री रघुबर की।
जै सिया राम जै भरत शत्रुघ्न जै लछमण जै जै हनुमान,
मेरे राम सर्वाधार, बार बार नमस्कार,
मेरे राम सर्वाधार, बार बार नमस्कार,
बार बार नमस्कार, बार बार नमस्कार,
मेरे राम सर्वाधार, बार बार नमस्कार।
श्री रामचन्द्र चरणौ मनसा स्मरामि
श्री रामचन्द्र चरणौ वचसा गृणामि
श्री रामचन्द्र चरणौ शिरसा नमामि
श्री रामचन्द्र चरणौ शरणं प्रपद्ये
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतम् मनसा स्मरामि
श्रीरामदूतम् शिरसा नमामि श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।।
गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी॥
सीताराम चरण रति मोरे । अनुदिन बढ़ऊ अनुग्रह तोरे॥
सीम की चांप सकइ कोउ तासु। बड़ रखवार रमापति जासु।।
महावीर बिनवउँ हनुमाना। राम जास सुर आप बखाना।
कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥
मेरे गुरुदेव चरणों में, सुमन श्रद्धा के अर्पित है,
तेरी ही देन है जो है, वही सेवा में अर्पित है।
न प्रीति है प्रतीति है, नहीं पूजा की शक्ति है ।
मेरा यह मन, मेरा यह तन, मेरा जीवन समर्पित है ॥
तुम्ही हो भाव में मेरे, विचारों में, पुकारों में ।
तेरे चरणों पे हे गुरुवर, मेरा सर्वस्व अर्पित है ॥
मेरी इच्छाएँ हों तेरी, मेरे सब कर्म हों तेरे ।
बना ले यंत्र अब मुझको मेरा कण कण समर्पित है ॥
मेरे गुरुदेव चरणों में, सुमन श्रद्धा के अर्पित है,
तेरी ही देन है जो है, वही सेवा में अर्पित है।
चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ।।