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मधु चन्द्र (बाजी) लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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शुक्रवार, अप्रैल 11, 2025

तू ही बन जा मेरा मांझी - माधुरी चंद्र



तू ही बन जा मेरा माँझी, पार लगा दे मेरी नैया .
हे नटनागर, कृष्ण कन्हैया, पार लगा दे मेरी नैया ..

इस जीवन के सागर में, हर क्षण लगता है डर मुझको .
क्या भला है, क्या बुरा है, तू ही बता दे मुझको .
हे नटनागर, कृष्ण कन्हैया, पार लगा दे मेरी नैया ..
तू ही बन जा ...

क्या तेरा और क्या मेरा है, सब कुछ तो बस सपना है .
इस जीवन के मोहजाल में, सबने सोचा अपना है .
हे नटनागर, कृष्ण कन्हैया, पार लगा दे मेरी नैया ..
तू ही बन जा ...

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1971 में बाजी (मधू चंद्र) ने हैदराबाद हाउस के घर के पूजागृह में पूजा करते हुए इसकी रचना की थी ।

मंगलवार, फ़रवरी 06, 2018

भजन: भज मन राम चरण सुखदाई ..

Bhajan: bhaj man ram charan sukhdai

Listen to the bhajan in the voice of Madhu Chandra 

भज मन राम चरण सुखदाई ..

जिन चरनन से निकलीं सुरसरि
शंकर जटा समायी .
जटा शन्करी नाम पड़्यो है
त्रिभुवन तारन आयी ..
राम चरण सुखदाई ..

शिव सनकादिक अरु ब्रह्मादिक
शेष सहस मुख गायी .
तुलसीदास मारुतसुत की प्रभु
निज मुख करत बड़ाई ..
राम चरण सुखदाई ..


बुधवार, अक्टूबर 21, 2015

आरती: जगजननी जय जय




जगजननी जय! जय! माँ! जगजननी जय! जय!
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय। जगजननी ..

तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा।
सत्य सनातन, सुन्दर, पर-शिव सुर-भूपा॥ जगजननी ..

आदि अनादि, अनामय, अविचल, अविनाशी।
अमल, अनन्त, अगोचर, अज आनन्दराशी॥ जगजननी ..

अविकारी, अघहारी, अकल कलाधारी।
कर्ता विधि, भर्ता हरि, हर संहारकारी॥ जगजननी ..

तू विधिवधू, रमा, तू उमा महामाया।
मूल प्रकृति, विद्या तू, तू जननी जाया॥ जगजननी ..

राम, कृष्ण तू, सीता, ब्रजरानी राधा।
तू वाँछाकल्पद्रुम, हारिणि सब बाघा॥ जगजननी ..

दश विद्या, नव दुर्गा नाना शस्त्रकरा।
अष्टमातृका, योगिनि, नव-नव रूप धरा॥ जगजननी ..

तू परधामनिवासिनि, महाविलासिनि तू।
तू ही श्मशानविहारिणि, ताण्डवलासिनि तू॥ जगजननी ..

सुर-मुनि मोहिनि सौम्या, तू शोभाधारा।
विवसन विकट सरुपा, प्रलयमयी, धारा॥ जगजननी ..

तू ही स्नेहसुधामयी, तू अति गरलमना।
रत्नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि तना॥ जगजननी ..

मूलाधार निवासिनि, इह-पर सिद्धिप्रदे।
कालातीता काली, कमला तू वरदे॥ जगजननी ..

शक्ति शक्तिधर तू ही, नित्य अभेदमयी।
भेद प्रदर्शिनि वाणी विमले! वेदत्रयी॥ जगजननी ..

हम अति दीन दु:खी माँ! विपत जाल घेरे।
हैं कपूत अति कपटी, पर बालक तेरे॥ जगजननी ..

निज स्वभाववश जननी! दयादृष्टि कीजै।
करुणा कर करुणामयी! चरण शरण दीजै॥ जगजननी .. (2)

MP3 Audio

शनिवार, अक्टूबर 17, 2015

भजन: नमामि अम्बे दीन वत्सले


नमामि अम्बे दीन वत्सले,
तुम्हे बिठाऊँ हृदय सिंहासन .
तुम्हे पिन्हाऊँ भक्ति पादुका,
नमामि अम्बे भवानि अम्बे ..

श्रद्धा के तुम्हे फूल चढ़ाऊँ,
श्वासों की जयमाल पहनाऊँ .
दया करो अम्बिके भवानी,
नमामि अम्बे भवानि अम्बे ..

बसो हृदय में हे कल्याणी,
सर्व मंगल मांगल्य भवानी .
दया करो अम्बिके भवानी,
नमामि अम्बे भवानि अम्बे ..  

MP3 Audio

शनिवार, सितंबर 05, 2015

श्री राधा कृष्णाय नमः

श्री राधा कृष्णाय नमः ..
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

ॐ जय श्री राधा जय श्री कृष्ण
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

चन्द्रमुखी चंचल चितचोरी, जय श्री राधा
सुघड़ सांवरा सूरत भोरी, जय श्री कृष्ण
श्यामा श्याम एक सी जोड़ी
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

पंच रंग चूनर, केसर न्यारी, जय श्री राधा
पट पीताम्बर, कामर कारी, जय श्री कृष्ण
एकरूप, अनुपम छवि प्यारी
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

चन्द्र चन्द्रिका चम चम चमके, जय श्री राधा
मोर मुकुट सिर दम दम दमके, जय श्री कृष्ण
जुगल प्रेम रस झम झम झमके
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

कस्तूरी कुम्कुम जुत बिन्दा, जय श्री राधा
चन्दन चारु तिलक गति चन्दा, जय श्री कृष्ण
सुहृद लाड़ली लाल सुनन्दा
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

घूम घुमारो घांघर सोहे, जय श्री राधा
कटि कटिनी कमलापति सोहे, जय श्री कृष्ण
कमलासन सुर मुनि मन मोहे
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

रत्न जटित आभूषण सुन्दर, जय श्री राधा
कौस्तुभमणि कमलांचित नटवर, जय श्री कृष्ण
तड़त कड़त मुरली ध्वनि मनहर
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

राधा राधा कृष्ण कन्हैया जय श्री राधा
भव भय सागर पार लगैया जय श्री कृष्ण .
मंगल मूरति मोक्ष करैया
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

मन्द हसन मतवारे नैना, जय श्री राधा
मनमोहन मनहारे सैना, जय श्री कृष्ण
जटु मुसकावनि मीठे बैना
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

श्री राधा भव बाधा हारी, जय श्री राधा
संकत मोचन कृष्ण मुरारी, जय श्री कृष्ण
एक शक्ति, एकहि आधारी
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

जग ज्योति, जगजननी माता, जय श्री रा्धा
जगजीवन, जगपति, जग दाता, जय श्री कृष्ण
जगदाधार, जगत विख्याता
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

राधा, राधा, कृष्ण कन्हैया, जय श्री रा्धा
भव भय सागर पार लगैया, जय श्री कृष्ण
मंगल मूरति, मोक्ष करैया
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

सर्वेश्वरी सर्व दुःखदाहनि, जय श्री रा्धा
त्रिभुवनपति, त्रयताप नसावन, जय श्री कृष्ण
परमदेवि, परमेश्वर पावन
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

त्रिसमय युगल चरण चित धावे, जय श्री रा्धा
सो नर जगत परमपद पावे, जय श्री कृष्ण
राधा कृष्ण 'छैल' मन भावे
श्री राधा कृष्णाय नमः ..

Download MP3 Audio

शुक्रवार, सितंबर 04, 2015

भजन: मोहे सब घट श्याम ही दीखे

bhajan: mohe san ghat shyam hi deekhe

Listen on Madhu ke Geet youtube channel from Mrs. Madhu Chandra

https://www.youtube.com/watch?v=b8N1GsrnWIE



मोहे सब घट श्याम ही दीखे
सब घट श्याम ही दीखे
जित देखूँ उत श्याम ही दीखे (२)

सागर की ये तरंग प्रभुजी
बोले राधे श्याम
नदिया की ये लहर प्रभुजी
गाये राधे श्याम
मोहे सब में श्याम ही दीखे
सब में श्याम ही दीखे
जित देखूँ उत श्याम ही दीखे (२)
मोहे सब घट श्याम ही दीखे

बावरी बन मैं इत उत डोलूँ
निरखूं श्याम सलोना
श्याम नाम की पहर चुनरिया
श्याम ही श्याम पुकारूँ
सब में श्याम ही दीखे
सब में श्याम ही दीखे
जित देखूँ उत श्याम ही दीखे (२)
मोहे सब घट श्याम ही दीखे

नैन चकोर भये प्रभु मधु के
हर क्षण प्रभु संग लागें
देखन चाहें हर पल प्रभु को
सब में प्रभु को पाए
सब में श्याम ही दीखे
सब में श्याम ही दीखे
जित देखूँ उत श्याम ही दीखे (२)
मोहे सब घट श्याम ही दीखे

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mohe sab ghaT shyAm hI dIkhe
sab ghaT shyAm hI dIkhe
jit dekhU.N ut shyAm hI dIkhe (2)

sAgar kI ye taraMg prabhujI
bole rAdhe shyAm
nadiyA kI ye lahar prabhujI
gAye rAdhe shyAm
mohe sab meM shyAm hI dIkhe
sab meM shyAm hI dIkhe
jit dekhU.N ut shyAm hI dIkhe (2)
mohe sab ghaT shyAm hI dIkhe

bAvrI ban maiM it ut DolU.N
nirkhUM shyAm salonA
shyAm nAm kI pahar chunriyA
shyAm hI shyAm pukArU.N
sab meM shyAm hI dIkhe
sab meM shyAm hI dIkhe
jit dekhU.N ut shyAm hI dIkhe (2)
mohe sab ghaT shyAm hI dIkhe

nain chakor bhaye prabhu madhu ke
har kShaN prabhu saMg lAgeM
dekhan chAheM har pal prabhu ko
sab meM prabhu ko pAe
sab meM shyAm hI dIkhe
sab meM shyAm hI dIkhe
jit dekhU.N ut shyAm hI dIkhe (2)
mohe sab ghaT shyAm hI dIkhe 

गुरुवार, अगस्त 08, 2013

चंदा चमके आसमान में - माधुरी चंद्र



चंदा चमके आसमान में ,
बरखा बरसे आसमान से ,
बिजली चमके आसमान में ,
सूरज दमके आसमान से ,
बोलो बोलो, बनाने वाला कौन है ?
बोलो बोलो, चलाने वाला कौन है ?
बोलो बोलो, बनाने वाला कौन है ?
बोलो बोलो, चलाने वाला कौन है ?

धरती झूमे नदिया गाये सागर ताल देवे
कोयल कूके मैना गाये मोर मोरनी नाचे
कभी सोचा, बनाने वाला कौन है ?
कभी सोचा, चलाने वाला कौन है ?
बोलो, बोलो, बनाने वाला कौन है ?
बोलो, बोलो, चलाने वाला कौन है ?
बोलूँ, मम्मी,
ना ना ना

रंग बिरंगे फूल यहाँ पर बोलो कौन खिलाते
जितने प्राणी उतने रूप बोलो कौन बनाते
चुप चुपके बनाने वाला कौन है ?
चुप चुपके मिटाने वाला कौन है ?
बोलो बोलो, बनाने वाला कौन है ?
बोलो बोलो. चलाने वाला कौन है ?
राम

कोई इस धरती पर आता, कोई इससे जाता
आना जाना इस धरती का प्रति पल चलता जाता
ये आना और जाना किसके हाथ है
ये लेना और देना किसके हाथ है
बोलो बोलो बनाने वाला कौन है ?
बोलो बोलो चलाने वाला कौन है ?
बोलो बोलो, सरगम, बोलो ना

कृष्ण

जैसा कर्म करते हैं वे वैसा ही फल पाते
अपनी अपनी किस्मत लेकर वो हैं जग में आते
ये किस्मत बनाने वाला कौन है ?
'मधु' किस्मत मिटाने वाला कौन है ?
बोलो बोलो बनाने वाला कौन है ?
बोलो बोलो चलाने वाला कौन है ?

चंदा चमके आसमान में ,
बरखा बरसे आसमान से ,
बिजली चमके आसमान में ,
सूरज दमके आसमान से ,
बोलो बोलो, बनाने वाला कौन है ?
बोलो बोलो, चलाने वाला कौन है ?
बोलो बोलो, बनाने वाला कौन है ?
बोलो बोलो, मिटाने वाला कौन है ?
अल्लाह
हाँ

Song written , composed and sung by Mrs. Madhu Chandra

गुरुवार, मार्च 14, 2013

भजन : जाने अनजाने रे तू ही मन भाया




Watch and hear this bhajan on 'MadhuKeGeet' channel on youtube -
http://www.youtube.com/watch?v=Se0OkGrBsxQ


जाने अनजाने रे, तू ही मन भाया. (२)

ले चल अपनी नगरिया, मोहे दे के बांहों का सहारा . (२)
जाने अनजाने रे, तू ही मन भाया,
तू ही मन भाया ..

अब तो रंग गयी गिरिधर, तेरे ही रंग में,
सांवरा सलोना मेरो, बस गयो मेरे मन में,
जानूँ  ना प्रीत की रीत सांवरिया ,
ले चल अपनी नगरिया, मोहे दे के बांहों का सहारा . 
जाने अनजाने रे, तू ही मन भाया. (२)
तू ही मन भाया ..

जग  के बंधन गिरिधर, कैसे मैं तोड़ चलूं
तू ही अब राह दिखा दे, जिस पे मैं दौड़ चलूँ ,
राह ना सूझे, सांवरिया,
ले चल अपनी नगरिया, मोहे दे के बांहों का सहारा . 
जाने अनजाने रे, तू ही मन भाया.
तू ही मन भाया .. (३)








भजन : पिया सों मिलन कैसे होय री



Watch and hear this bhajan on 'MadhuKeGeet' channel on Youtube
http://www.youtube.com/watch?v=9ZWfafLd7YM

हरे कृष्ण हरे कृष्ण
राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण

मैं जानूँ नहीँ
पिया सों मिलन कैसे होय री

कृष्ण कृष्ण कृष्ण

हर आहट पे सोच लेती
आये होंगे सांवरियां
धड़ धड़ धड़के लागे जियरा
लूंगी उनकी खबरिया
आये नाहिं संवरिया
मैं जानूँ नहीँ
पिया सों मिलन कैसे होय री

हरे कृष्ण राधे कृष्ण राधे कृष्ण

कृष्ण कृष्ण कृष्ण

मन ही मन में बातें होती
मैं जो कहना चाहूं
सामने आते तोय सांवरिया
मैं ठगी रह जाऊं
मूरत बन रह जाऊँ
मैं जानूँ नहीँ
पिया सों मिलन कैसे होय री

कृष्ण कृष्ण कृष्ण

कई जन्मों से बिछड़ बिछड़ कर
अब तो रहा न जाए
हाथ पकड़ ले मधु सांवरिया
अब तो चला न जाए
अपने अंग लगा ले
जानूँ नाहीं
पिया सों मिलन कैसे होय री

सोमवार, दिसंबर 10, 2012

भजन - तू दयालु दीन हौं - बाजी

तू दयालु, दीन हौं, तू दानि, हौं भिखारी।
हौं प्रसिद्ध पातकी, तू पाप-पुंज-हारी॥

नाथ तू अनाथ को, अनाथ कौन मोसो।
मो समान आरत नहिं, आरतिहर तोसो॥

ब्रह्म तू, हौं जीव, तू है ठाकुर, हौं चेरो।
तात-मात, गुरु-सखा, तू सब विधि हितु मेरो॥

तोहिं मोहिं नाते अनेक, मानियै जो भावै।
ज्यों त्यों तुलसी कृपालु! चरन-सरन पावै॥

MP3 Audio of Bhajan sung by Madhu Chandra

बुधवार, अप्रैल 18, 2012

भजन : दूजा नाहीं मन भायो



जब से तोरे संग नेहा लागे कान्हा
दूजा नाहिं मन भायो
दूजा नाहीं मन भायो

मनवा मोरा इत उत डोलत
इक पल चैन न पाए
तोरी प्रीत की डोरी संग बंध
इत उत जा ना पाए
चरणों में मुझे ले लो प्रभुजी
अब ना भटका जाए
आ जा रे मोरे कान्हा
आ जा रे (३)

दोउ नैना बाट निहारे तोरी
हर पल बरसत जाए
आवन की तोरी आस ले कर
इक पल झपक ना पाए
मन मंदिर में आ जा प्रभुजी
अब ना जाने दूंगी
आ जा रे मोरे कान्हा तू
आ जा रे (३)

मन ही तेरा कृष्ण कन्हैया
मन ही तेरी राधा
जग में रह कर जो भी करता
है उसकी अभिलाषा
दे ऐसा वरदान मधु अब
मधु श्याम मन भाये
आ जा रे मोरे कान्हा तू
आ जा रे (३)

मंगलवार, अगस्त 23, 2011

भजन : सांवरो कन्हैया मोरे मन में बसो रे


सांवरो कन्हैया मोरे मन में बसो रे
मुरली बजाने वारो मन में बसो रे
मन में बसो रे कान्हा
तन में बसो रे
कारो कन्हैया मेरो मन में बसो रे
अरे तिरछी नजरिया वारो मन में बसो रे
माखन चुराने वारो मन में बसो रे

जमुना किनारे वो तो मुरली बजाये
गोपियन संग वो तो रास रचाए
मीठी मीठी तान सुनाये जादू डारे
अरे पीले पीताम्बर वारो मन में बसों रे
सांवरो सलोनो मेरो मन में बसो रे

गोकुल नगरिया में माखन चुराए
वृन्दावन में वो रास रचाए
मथुरा नगरिया को वो धीर बंधाए
अरे धेनु चराने वारो मन में बसो रे
मधु को रिझाने वारो मन में बसो रे

भजन : जब से लगन लगी प्रभु तेरी


हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण
राधे कृष्ण

जब से लगन लगी प्रभु तेरी
सब कुछ मैं तो भूल गयी हूँ ..

बिसर गयी क्या था मेरा
बिसर गयी अब क्या है मेरा .
अब तो लगन लगी प्रभु
तेरी तू ही जाने क्या होगा ..

जब मैं प्रभु में खो जाती हूं
मेघ प्रेम के घिर आते हैं .
मेरे मन मंदिर मे प्रभु के
चारों धाम समा जाते हैं ..

बार बार तू कहता मुझसे
जग की सेवा कर तू मन से .
इसी में मैं हूं सभी में मैं हूं
तू देखे तो सब कुछ मैं हूं ..

भजन : कान्हा रे


कान्हा रे
तू तो मुझको जाने
तू तो सब कुछ जाने
मैं तो नाचूंगी
मैं तो गाऊँगी
तेरी मुरली की धुन सुन नाचूंगी
तेरी मुरली की धुन सुन गाऊँगी
मैं तो नाचूंगी

तन और मन के भक्ति योग से
मैं बनी संवरिया
तन और मन के कर्म योग से
मैं बनी बंसुरिया
कान्हा रे
तू चाहे तो बजा ले
कान्हा रे
तू चाहे तो नचा ले

जब से श्यामा श्याम बसे है
मन मंदिर में मधु के
तब से तन बन गयी मुरलिया
श्याम श्याम ही बोले
कान्हा रे
अपने सुर में मिला ले
कान्हा रे
अपनी मुरलिया बना ले

अब तो तन बन गयी मुरलिया
श्याम श्याम ही बोले
सात सुरों के संगम से श्याम
जैसा चाहे बजाले
कान्हा रे
सुर में मोहे डुबा ले
कान्हा रे
मधु मुरलिया बना ले

मैं तो नाचूंगी
मैं तो गाऊँगी
तेरी मुरली की धुन सुन नाचूंगी
तेरी मुरली की धुन सुन गाऊँगी
मैं तो नाचूंगी

शनिवार, सितंबर 19, 2009

कीर्तन - बन्धुगणो ! मिल कहो प्रेमसे (२)

बन्धुगणो ! मिल कहो प्रेमसे - 'रघुपति राघव राजाराम ।'
मुदित चित्तसे घोष करो पुनि - 'पतित पावन सीताराम ॥'

जिह्वा-जीवन सफल करो कह -'जय रघुनन्दन, जय सियाराम ।'
ह्रदय खोल बोलो मत चूको- 'जानकिवल्लभ सीताराम ॥'

गौर रुचिर, नवघनश्याम छबि, 'जय लक्ष्मण, जय जय श्रीराम ।'
अनुगत परम अनुज रघुबरके- 'भरत-सत्रुहन शोभाधाम ॥'

उभय सखा राघवके प्यारे -'कपिपति, लंकापति अभिराम ।'
परम भक्त निष्कामशिरोमणि 'जय श्रीमारुति पूरणकाम ॥'

अति उमंगसे बोलो संतत - 'रघुपति राघव राजाराम।'
मुक्तकंठ हो सदा पुकारो- 'पतित पावन सीताराम ॥'

http://www.archive.org/download/AratiGeetMala/AGM-bandhu-gano-raghupati-raaghav.mp3

कीर्तन - बन्धुगणो ! मिलि कहो प्रेमसे (१)

बन्धुगणो ! मिलि कहो प्रेमसे 'यदुपति ब्रजपति श्यामा-श्याम ।'
मुदित चित्तसे घोष करो पुनि- 'पतित पावन राधेश्याम ॥'

जिह्वा-जीवन सफल करो कह- 'जय यदुनन्दन, जय घनश्याम ।'
ह्रदय खोल बोलो, मत चूको- 'रुक्मिणिवल्लभ श्याम श्याम ॥'

नव-नीरद-तनु, गौर मनोहर, 'जय श्रीमाधव जय बलराम।'
उभय सखा मोहनके प्यारे -'जय श्रीदामा, जयति सुदाम ॥'

परमभक्त निष्कामशिरोमणि- 'उद्धव-अर्जुन शोभाधाम।'
प्रेम-भक्ति-रस-लीन निरन्तर विदुर, 'विदुर-गृहिणी अभिराम ॥'

अति उमंगसे बोलो सन्तत- 'यदुपति ब्रजपति श्यामा-श्याम ।'
मुक्तकंठसे सदा पुकारो- 'पतित पावन राधेश्याम ॥'

http://www.archive.org/download/AratiGeetMala/AGM-bandhu-gano-jay-raadhe-raadhe.mp3