शनिवार, नवंबर 19, 2016

नैहरवा हमका न भावे - भजन - कबीरदास

naiharavaa hamakaa naa bhaave - bhajan by Sant Kabirdas

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कबीर दास जी की अति सारगर्भित रचना

नैहरवा हमका न भावे !!

साई की नगरी परम् अति सुंदर जहाँ कोई जान न पावे !
चाँद सूरज जहाँ पवन न पानी, को सन्देश पहुचावे !
दर्द ये साईं को सुनावे .. .!! टेक !!

आगे चलों पन्थ नही सूझे, पीछे दोष लगावे
केहि विधि ससुरे जाऊं  मोरि सजनी बिरहा जोर जरावे
बिषय रस नाच नचावे ... !!टेक!!

बिनु सद्गुरु अपनों नहीं कोऊ जो  ये राह बतावे !
कहत कबीर सुनो भाई साधो सुपनन पीतम पावे !
तपन जो जिय की बुझावे .. !! टेक !!


दुल्हनिया है "जीवात्मा" और दुलहा हैं "परमात्मा"
"जीव" को उसका मायका अथवा "यह संसार" तनिक भी नहीं भाता !

मानव परिवेश में बंधा जीवात्मा बेचैन है ! वह शीघ्रातिशीघ्र अपने स्थाई निवास स्थान अथवा परमपिता परमेश्वर की नगरी - उसकी सुसराल पहुंचना चाहता है !

शुक्रवार, नवंबर 18, 2016

अबिनासी दुलहा कब मिलिहो - भजन - सन्त कबीरदास जी

abinasi duliha kab miliho - bhajan by Sant Kabirdas

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अबिनासी दुलहा कब मिलिहो भगतन के रछपाल !!

जल उपजी जल ही सो नेहा, रटत पियास पियास ,
मैं  ठाढ़ी बिरहन मग जोहूँ , प्रियतम तुमरी आस !! टेक !!

छोड़े नेह गेह, लगि तुमसों ,  भयी चरण लवलीन  ,
तालामेलि होत घट भीतर ,  जैसे जल बिन मीन  !! टेक !!

दिवस नभूख ,रैननहिं निदिया ,घरआँगन न सुहावे ,
सेजरिया बैरन भइ हमको , जाबत रेन बिहावे  !! टेक !!

हमतो तुमरी दासी सजना,  तुम हमरे    भरतार ,
दीनदयाल दया करि आवो,  समरथ सिरजन हार !! टेक !!

कह कबीर सुन जोगिनी, तो तन में मन हि मिलाय.
तुम्हरी प्रीति के कारने, हो बहुरि मिलिहंइ आय !! टेक !!

दीनबंधु दीनानाथ मेरी तन हेरिये - भजन - मलूकदास

deenbandhu deenanath meri tan heriye - Bhajan by Sant Malukdas

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दीनबन्धु दीनानाथ, मेरी तन हेरिये ॥

भाई नाहिं, बन्धु नाहिं, कटुम-परिवार नाहिं ।
ऐसा कोई मीत नाहिं, जाके ढिंग जाइये ॥

खेती नाहिं, बारी नाहिं, बनिज ब्योपार नाहिं
ऐसो कोउ साहु नाहिं जासों कछू माँगिये ॥

कहत मलूकदास छोड़ि दे पराई आस,
राम धनी पाइकै अब काकी सरन जाइये ॥

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dīnabandhu dīnānāth, mērī tan hēriyē ||

bhāī nāhiṁ, bandhu nāhiṁ, kaṭum-parivār nāhiṁ |
aisā kōī mīt nāhiṁ, jākē ḍhiṁg jāiyē ||

khētī nāhiṁ, bārī nāhiṁ, banij byōpār nāhiṁ
aisō kōu sāhu nāhiṁ jāsōṁ kachū mām̐giyē ||

kahat malūkdās chōṛi dē parāī ās,
rām dhanī pāikai ab kākī saran jāiyē ||
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dInabandhu dInAnAth, merI tan heriye ||

bhAI nAhiM, bandhu nAhiM, kaTum-parivAr nAhiM |
aisA koI mIt nAhiM, jAke DhiMg jAiye ||

khetI nAhiM, bArI nAhiM, banij byopAr nAhiM
aiso kou sAhu nAhiM jAsoM kaChU mA.Ngiye ||

kahat malUkdAs Cho.Di de parAI As,
rAm dhanI pAikai ab kAkI saran jAiye || 

रविवार, नवंबर 13, 2016

भजन: राम दो निज चरणों में स्थान

Ram, do nij charano me sthan
words, composition and voice - V N Shrivastav 'Bhola'
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राम, दो निज चरणों में स्थान,
शरणागत अपना जन जान ।

अधमाधम मैं पतित पुरातन ।
साधनहीन निराश दुखी मन।
अंधकार में भटक रहा हूँ ।
राह दिखाओ अंगुली थाम।
राम, दो ...

सर्वशक्तिमय राम जपूँ मैं ।
दिव्य शान्ति आनन्द छकूँ मैं।
सिमरन करूं निरंतर प्रभु मैं।
राम नाम मुद मंगल धाम।
राम, दो ...

केवल राम नाम ही जानूँ।
और धर्म मत ना पहिचानूँ।
जो गुरु मंत्र दिया सतगुरु ने।
उसमें है सबका कल्याण।
राम, दो ...

हनुमत जैसा अतुलित बल दो,
पर-सेवा का भाव प्रबल दो ।
बुद्धि, विवेक, शक्ति इतनी दो,
पूरा करूं राम का काम ।
राम, दो ...

शनिवार, अक्तूबर 29, 2016

कीर्तन: हमारे रामजी से राम राम

Click to Listen to hamare ramji se ram ram, kahiyo ji hanuman

हमारे रामजी से राम राम कहियो जी हनुमान
कहियो जी हनुमान कहियो जी हनुमान ....

हमारे रामजी से राम राम कहियो जी हनुमान
कहियो जी हनुमान कहियो जी हनुमान ....


भजन: संकटमोचन कृपानिधान जय हनुमान जय जय हनुमान

Bhajan: Sankat Mochan Kripa Nidhan Jay Hanuman Jay Jay Hanuman

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संकटमोचन कृपानिधान
जय हनुमान जय जय हनुमान
महावीर अतुलित बलवान
जय हनुमान जय जय हनुमान

अंजनि माता के नयनांजन
रघुकुल भूषण केसरीनंदन
ग्यारहवें रूद्र भगवान


जय हनुमान जय जय हनुमान

संकटमोचन कृपानिधान
जय हनुमान जय जय हनुमान
महावीर अतुलित बलवान
जय हनुमान जय जय हनुमान

सूर्य देव ने शास्त्र पढाया
नारद ने संगीत सिखाया
मारुत मानस की संतान

जय हनुमान जय जय हनुमान

संकटमोचन कृपानिधान
जय हनुमान जय जय हनुमान
महावीर अतुलित बलवान
जय हनुमान जय जय हनुमान

चार अक्षर का नाम है प्यारा
चारों जुग परताप तिहारा
त्रिभुवन को तुम पर अभिमान

जय हनुमान जय जय हनुमान

संकटमोचन कृपानिधान
जय हनुमान जय जय हनुमान
महावीर अतुलित बलवान
जय हनुमान जय जय हनुमान

तुमने राम के काम बनाये
लंका जारि सिया सुधि लाये
राम सिया पितु मातु समान

जय हनुमान जय जय हनुमान

संकटमोचन कृपानिधान
जय हनुमान जय जय हनुमान
महावीर अतुलित बलवान
जय हनुमान जय जय हनुमान

एक ही मंत्र जपो अविराम
श्री राम जय राम जय राम
राम तुम्हारे जीवन प्राण

जय हनुमान जय जय हनुमान

संकटमोचन कृपानिधान
जय हनुमान जय जय हनुमान
महावीर अतुलित बलवान
जय हनुमान जय जय हनुमान

जो कोई तुम्हरी महिमा गावे
सहज राम के दर्शन पावे
दास को दो चरणों में स्थान

जय हनुमान जय जय हनुमान

संकटमोचन कृपानिधान
जय हनुमान जय जय हनुमान
महावीर अतुलित बलवान
जय हनुमान जय जय हनुमान

संकट मोचन हनुमाष्टक

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हमारे रामजी से राम रामकहियो जी हनुमान ,
कहियो जी हनुमान, कहियो जी हनुमान ॥

बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो ।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात ना टारो ।।
देवन आनि करी बिनती तब, छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 1 ।।
बालि की त्रास कपीस बसै गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिय कौन बिचार बिचारो ।।
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु , सो तुम दास के सोक निवारो ।।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 2 ।।
अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत ना बचिहौ हम सो जू, बिन सुधि लाए इहाँ पगु धारो ।।
हेरि तके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया – सुधि प्रान उबारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 3 ।।
रावन त्रास दई सिय को सब, राक्षसि सों कहि सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो ।।
चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 4 ।।
बान लग्यो उर लछिमन के तब, प्रान तजे सुत रावन मारो ।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोन सु बीर उपारो ।।
आनि सजीवन हाथ दई तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 5 ।।
रावन जुद्ध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो ।।
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 6 ।।
बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो ।।
जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत सँहारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 7 ।।
काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसों नहि जात है टारो ।।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कुछ संकट होय हमारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 8 ।।
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लँगूर ।
ब्रजदेह दानव दलन, जय जय जय कपि सुर ।

शुक्रवार, अक्तूबर 28, 2016

भजन: या मोहन के मैं रूप लुभानी

Bhajan: Ya Mohan ke main roop lubhani

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या मोहन के मैं रूप लुभानी ।

जमना के नीरे तीरे धेनु चरावै
बंसी से गावै मीठी बानी ।।
या मोहन के मैं रूप लुभानी ।

तन मन धन गिरधर पर बारूं
चरणकंवल मीरा लपटानी ।।
या मोहन के मैं रूप लुभानी ।

सुंदर बदन कमलदल लोचन
बांकी चितवन मंद मुसकानी ।।
या मोहन के मैं रूप लुभानी ।

भजन: सुने री मैंने निरबल के बल राम

Bhajan: sune ri maine nirbal ke bal ram

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सुने री मैंने निरबल के बल राम ,
पिछली साख भरूँ संतन की अड़े सँवारे काम ।

जब लग गज बल अपनो बरत्यो, नेक सरयो नहीं काम ,
निर्बल ह्वै बल राम पुकार्‌यो,आये आधे नाम ।
सुने री मैंने निरबल के बल राम ।

द्रुपद सुता निर्बल भईं ता दिन ,तजि आये निज धाम ,
दुस्सासन की भुजा थकित भई, वसन रूप भये राम ।
सुने री मैंने निरबल के बल राम ।

अप बल,तप बल और बाहु बल ,चौथा है बल राम ,
सूर किशोर कृपा से सब बल हारे को हरिनाम ।
सुने री मैंने निरबल के बल राम ।

भजन: जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे

Bhajan: jau kahan taji charan tumhare

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जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे ।

काको नाम पतित पावन जग, केहि अति दीन पियारे ।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे ।

कौनहुँ देव बड़ाइ विरद हित, हठि हठि अधम उधारे ।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे ।

खग मृग व्याध पषान विटप जड़, यवन कवन सुर तारे ।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे ।

देव, दनुज, मुनि, नाग, मनुज, सब माया-विवश बिचारे ।
तिनके हाथ दास ‘तुलसी’ प्रभु, कहा अपुनपौ हारे ।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे ।

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jAU.N kahA.N taji charan tumhAre |

kAko nAm patit pAvan jag, kehi ti dIn piyAre |
jAU.N kahA.N taji charan tumhAre |

kaunhu.N dev ba.DAi virad hit, haThi haThi adham udhAre |
jAU.N kahA.N taji charan tumhAre |

khag mR^ig vyAdh paShAn viTap ja.D, yavan kavan sur tAre |
jAU.N kahA.N taji charan tumhAre |

dev, danuj, muni, nAg, manuj, sab mAyA-vivash bichAre |
tinke hAth dAs ‘tulsI` prabhu, kahA apunapau hAre |
jAU.N kahA.N taji charan tumhAre |

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jāūm̐ kahām̐ taji caran tumhārē |

kākō nām patit pāvan jag, kēhi ti dīn piyārē |
jāūm̐ kahām̐ taji caran tumhārē |

kaunhum̐ dēv baṛāi virad hit, haṭhi haṭhi adham udhārē |
jāūm̐ kahām̐ taji caran tumhārē |

khag mr̥g vyādh paṣān viṭap jaṛ, yavan kavan sur tārē |
jāūm̐ kahām̐ taji caran tumhārē |

dēv, danuj, muni, nāg, manuj, sab māyā-vivaś bicārē |
tinkē hāth dās ‘tulsī’ prabhu, kahā apunapau hārē |
jāūm̐ kahām̐ taji caran tumhārē |

गुरुवार, अक्तूबर 27, 2016

भजन : अब तुम कब सिमरोगे राम

bhajan : ab tum kab simaroge ram

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कब सिमरोगे राम
अब तुम कब सिमरोगे राम ।

जिवडा दो दिन को मेहमान ।
अब तुम कब सिमरोगे राम ।

चिंतामणि हरि नाम है ,
सफल करे सब काम ।
महामंत्र बोलो यही,
राम राम श्री राम ।
अब तुम कब सिमरोगे राम ।

राम नाम की लूट है ,
लूट सके तो लूट ।
अंत काल पछताओगे ,
जब प्राण जायेगे छूट ।
अब तुम कब सिमरोगे राम ।

दीपक ले के हाथ में
सतगुरु राह दिखाए ।
पर मन मूरख बावरा
आप अँधेरे जाय ।
अब तुम कब सिमरोगे राम ।

राम राम सिमरो

राम राम बोलो

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kab simroge rAm
ab tum kab simroge rAm |

jivDA do din ko mehmAn |
ab tum kab simroge rAm |

chiMtAmNi hari nAm hai ,
saphal kare sab kAm |
mahAmaMtr bolo yahI,
rAm rAm shrI rAm |
ab tum kab simroge rAm |

rAm nAm kI lUT hai , lUT sake to lUT |
aMt kAl paChatAoge , jab prAN jAyege ChUT |
ab tum kab simroge rAm |

dIpak le ke hAth meM satguru rAh dikhAe |
par man mUrakh bAvrA Ap a.Ndhere jAy |
ab tum kab simroge rAm |

rAm rAm simro

rAm rAm bolo

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kab simrōgē rām
ab tum kab simrōgē rām |

jivḍā dō din kō mēhmān |
ab tum kab simrōgē rām |

ciṁtāmṇi hari nām hai ,
saphal karē sab kām |
mahāmaṁtr bōlō yahī,
rām rām śrī rām |
ab tum kab simrōgē rām |

rām nām kī lūṭ hai , lūṭ sakē tō lūṭ |
aṁt kāl pachatāōgē , jab prāṇ jāyēgē chūṭ |
ab tum kab simrōgē rām |

dīpak lē kē hāth mēṁ satguru rāh dikhāē |
par man mūrakh bāvrā āp am̐dhērē jāy |
ab tum kab simrōgē rām |

rām rām simrō

rām rām bōlō


भजन: प्रीति लगी तुम नाम की

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कबीरदास जी की रचना --

प्रीति लगी तुम नाम की ,
पल बिसरैं नाहीं।
नजर करो अब मेहर की,
मोहि मिलौ गुसाईं।।

बिरह सतावै हाय अब,
जिव तड़पै मेरा।
तुम देखन को चाव है
प्रभु मिलौ सबेरा।।

नैना तरसैं दरस को,
पल पलक न लागै।
दरदबंद दीदार का,
निसि बासर जागै।।

जो अबके प्रीतम मिलै ,
करूँ निमिष न न्यारा ।
अब कबीर गुरु पाँइया,
मिला प्रान प्यारा ।।

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kabīrdās jī kī racnā --

prīti lagī tum nām kī ,
pal bisaraiṁ nāhīṁ|
najar karō ab mēhar kī,
mōhi milau gusāīṁ||

birah satāvai hāy ab,
jiv taṛapai mērā|
tum dēkhan kō cāv hai
prabhu milau sabērā||

nainā tarasaiṁ daras kō,
pal palak na lāgai|
daradabaṁd dīdār kā,
nisi bāsar jāgai||

jō abkē prītam milai ,
karūm̐ nimiṣ na nyārā |
ab kabīr guru pām̐iyā,
milā prān pyārā ||

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kabIrdAs jI kI rachnA --

prIti lagI tum nAm kI ,
pal bisaraiM nAhIM|
najar karo ab mehar kI,
mohi milau gusAIM||

birah satAvai hAy ab,
jiv ta.Dapai merA|
tum dekhan ko chAv hai
prabhu milau saberA||

nainA tarasaiM daras ko,
pal palak na lAgai|
daradabaMd dIdAr kA,
nisi bAsar jAgai||

jo abke prItam milai ,
karU.N nimiSh na nyArA |
ab kabIr guru pA.NiyA,
milA prAn pyArA ||

बुधवार, अक्तूबर 26, 2016

भजन: परम गुरु राम मिलावनहार

एक सुंदर भावपूर्ण भजन --

*परम गुरू राम मिलावनहार ।*

*अति उदार, मंजुल मंगलमय,*
*अभिमत - फलदातार ।।*

*टूटी फूटी नाव पड़ी मम*
*भीषण भव नद धार ।*

*जयति  जयति जय देव दयानिधि*
*बेग उतारो पार ।।*

यह सुन्दर रचना श्री भाई जी श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्धार की है।

(राग आसावरी -- ताल धुमाली )

(गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित  " भजन संग्रह ", पृष्ठ 351)

Listen to the bhajan sung by Shri V N S 'Bhola' by clicking below:

param gurU rAm milAvanhAr |

ati udAr, maMjul maMgalmay,
abhimat - phaladAtAr ||

TUTI phUTI nAv pa.DI mam
bhIShaN bhav nad dhAr |

jayti  jayti jay dev dayAnidhi
beg utAro pAr ||

Listen to the bhajan sung by Shri V N S 'Bhola' by clicking below:
param gurū rām milāvanhār |

ati udār, maṁjul maṁgalmay,
abhimat - phaladātār ||

ṭūṭī phūṭī nāv paṛī mam
bhīṣaṇ bhav nad dhār |

jayti  jayti jay dēv dayānidhi
bēg utārō pār || 

भजन: जो भजे हरि को सदा

जो भजे हरि को सदा सो परम पद पायेगा ..

देह के माला तिलक और भस्म नहिं कुछ काम के .
प्रेम भक्ति के बिना नहिं नाथ के मन भायेगा ..

दिल के दर्पण को सफ़ा कर दूर कर अभिमान को .
खाक हो गुरु के चरण की तो प्रभु मिल जायेगा ..

छोड़ दुनिया के मज़े और बैठ कर एकांत में .
ध्यान धर हरि के चरण का फिर जनम नहीं पायेगा ..

दृढ़ भरोसा मन में रख कर जो भजे हरि नाम को .
कहत ब्रह्मानंद ब्रह्मानंद में ही समायेगा ..

Listen to the bhajan by clicking here.

jō bhajē hari kō sadā sō param pad pāyēgā ..

dēh kē mālā tilak aur bhasm nahiṁ kuch kām kē .
prēm bhakti kē binā nahiṁ nāth kē man bhāyēgā ..

dil kē darpaṇ kō safā kar dūr kar abhimān kō .
khāk hō guru kē caraṇ kī tō prabhu mil jāyēgā ..

chōṛ duniyā kē mazē aur baiṭh kar ēkāṁt mēṁ .
dhyān dhar hari kē caraṇ kā phir janam nahīṁ pāyēgā ..

dr̥ṛh bharōsā man mēṁ rakh kar jō bhajē hari nām kō .
kahat brahmānaṁd brahmānaṁd mēṁ hī samāyēgā ..

Listen to the bhajan by clicking here.

jo bhaje hari ko sadA so param pad pAyegA ..

deh ke mAlA tilak aur bhasm nahiM kuCh kAm ke .
prem bhakti ke binA nahiM nAth ke man bhAyegA ..

dil ke darpaN ko safA kar dUr kar abhimAn ko .
khAk ho guru ke charaN kI to prabhu mil jAyegA ..

Cho.D duniyA ke maXe aur baiTh kar ekAMt meM .
dhyAn dhar hari ke charaN kA phir janam nahIM pAyegA ..

dR^i.Dh bharosA man meM rakh kar jo bhaje hari nAm ko .

kahat brahmAnaMd brahmAnaMd meM hI samAyegA .. 

बुधवार, अगस्त 17, 2016

भजन: हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ

हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ
जब बोलें तब रामहि राम ||


ब्रह्म मुहूरत उठ कर पंछी
प्रभु का ध्यान लगाते हैं ,
चहक चहक मधुमय रामामृत
जंगल में बरसाते हैं ||
पर हम अहंकार में डूबे
अपने ही गुन गाते हैं ,
गुरु जन के आदेश भूल हम
जीवन व्यर्थ गंवाते हैं ||
हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ
जब बोलें तब रामहि राम ||

कितने भाग्यवान हैं हम सब
ऐसा सतगुर पाया है ,
जिसने हमको "राम" नाम का
सहज योग सिखलाया है |
माया जंजालों में फँस कर
हमने उसे भुलाया है ,
पर चिड़ियों ने राम मंत्र
जीवन भर को अपनाया है ||
हमसे भली जंगल की चिड़ियाँ
जब बोलें तब रामहि राम ||

[राग केदार पर आधारित]

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hamse bhalI jaMgal kI chi.DiyA.N
jab boleM tab rAmhi rAm ||

brahm muhUrat uTh kar paMChI
prabhu kA dhyAn lagAte haiM ,
chahak chahak madhumay rAmAmR^it
jaMgal meM barsAte haiM ||
par ham ahaMkAr meM DUbe
apne hI gun gAte haiM ,
guru jan ke Adesh bhUl ham
jIvan vyarth gaMvAte haiM ||
hamse bhalI jaMgal kI chi.DiyA.N
jab boleM tab rAmhi rAm ||

kitne bhAgyavAn haiM ham sab
aisA satgur pAyA hai ,
jisne hamko "rAm" nAm kA
sahaj yog sikhlAyA hai |
mAyA jaMjAloM meM pha.Ns kar
hamne use bhulAyA hai ,
par chi.DiyoM ne rAm maMtr
jIvan bhar ko apnAyA hai ||
hamse bhalI jaMgal kI chi.DiyA.N
jab boleM tab rAmhi rAm || 

मंगलवार, अगस्त 16, 2016

भजन: बोले बोले रे राम चिरैया रे

Bole Bole Re Ram Chiraiya
by V N Shrivastav 'Bhola
from Shree Ram Sharanam

बोले बोले रे राम चिरैया रे
बोले रे राम चिरैया।

मेरी साँसों के पिंजरे में
घड़ी घड़ी बोले।
घड़ी घड़ी बोले।
बोले बोले रे ...

ना कोई खिड़की ना कोई डोरी।
ना कोई चोर करे जो चोरी
ऐसा मेरा है राम रमैया रे।
बोले बोले रे ...

उसी की नैया वही खिवैया।
लहर रही उसकी लहरैया।
चाहे लाख चले पुरवैया रे।
बोले बोले रे ...

शुक्रवार, अप्रैल 08, 2016

भजन: दुख हरो द्वारिकानाथ



तुम कहाँ छुपे भगवान करो मत देरी |
दुःख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||
दुख हरो द्वारिकानाथ शरण मैं तेरी ||

यही सुना है दीनबन्धु तुम सबका दुख हर लेते |
जो निराश हैं उनकी झोली आशा से भर देते ||
अगर सुदामा होता मैं तो दौड़ द्वारका आता |
पाँव आँसुओं से धो कर मैं मन की आग बुझाता ||
तुम बनो नहीं अनजान, सुनो भगवान, करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||

जो भी शरण तुम्हारी आता, उसको धीर बंधाते |
नहीं डूबने देते दाता, नैया पार लगाते ||
तुम न सुनोगे तो किसको मैं अपनी व्यथा सुनाऊँ |
द्वार तुम्हारा छोड़ के भगवन और कहाँ मैं जाऊँ ||
प्रभु कब से रहा पुकार, मैं तेरे द्वार, करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||