Vaidya Param Guru Swami
Vaidya Param Guru Swami
जो शरण आया प्रभु की, वह सदा सुख पायेगा।
अगम भवसागर बिना श्रम पार वह कर जायेगा।।
नाम लेते ही प्रभु का, दूर होंगे कष्ट सब।
दुसह पीडायेँ मिटेंगी, ध्यान लग जायेगा जब।
शांति सुख के धाम का पट आप ही खुल जायेगा।।
अनगिनत जन पार उतरे, राम नाम जहाज से।
गीध गणिका गज तरे, प्रभु नाम के ही जाप से।
नाम नैया बैठ कर भवसिंधु तू तर जायेगा।।
जो शरण आया प्रभु की, वह सदा सुख पाएगा।
शब्दकार, स्वरकार, गायक : व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'
रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।
जनक लली, श्री लखन लला अरु महावीर के साथ ।।
वन्दन करते राम चरण अति हर्षित मन हनुमान ।
आतुर रक्षा करने को सज्जन भगतन के प्रान ।
अभयदान दे रहे मुझे करुणा सागर रघुनाथ ।।
रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।।
मुझको भला कष्ट हो कैसे, क्यों कर पीड़ सताए ।
साहस कैसे करें दुष्ट जन, मुझ पर हाथ उठाए ।
अंग संग जब मेरे हैं संकटमोचन के नाथ ।।
रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।।
विघ्न हरे, सद्गुरु के आश्रम स्वयं राम जी आये ।
शाप मुक्त कर दिया अहिल्या को पग धूर लगाये ।
वैसे चिंता मुक्त हमें कर रहे राम रघुनाथ ।।
रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।।
रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।
जनक लली, श्री लखन लला अरु महावीर के साथ ।।
Listen to the Holi, Biraj me dhoom machayo Kanha in the voice of Shri V N Shrivastav, Bhola.
बिरज में धूम मचायो कान्हा (2)
बिरज में धूम …
बिरज में धूम मचायो कान्हा
बिरज में धूम …
कैसे कैसे जाऊँ,
कैसे कैसे जाऊँ, अपने धाम
बिरज में धूम मचायो कान्हा (2)
बिरज में धूम …
कैसे कैसे जाऊँ, मैं,
कैसे कैसे जाऊँ, अपने धाम
बिरज में धूम मचायो कान्हा (2)
बिरज में धूम …
सब सखियाँ मिल, होली खेलत हैं (3)
होली खेलत हैं
सब सखियाँ मिल, होली खेलत हैं (2)
होली खेलत हैं (2)
सब सखियाँ मिल, होली खेलत हैं (2)
अँखियन डार गुलाल ...
बिरज में धूम मचायो कान्हा (2)
कैसे कैसे जाऊँ, मैं, (2)
कैसे कैसे जाऊँ, (2)
कैसे कैसे जाऊँ, अपने धाम
बिरज में धूम मचायो कान्हा
बिरज में धूम …
रचनाकार: श्री व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'
स्वरकार: श्री व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'
गायक: श्री व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'
रचनाकार: श्री व्ही. एन. श्रीवास्तव
स्वरकार: श्री व्ही. एन. श्रीवास्तव
गायक: श्री व्ही. एन. श्रीवास्तव