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शुक्रवार, मई 07, 2010

भजन - सुमरन कर ले मेरे मना

सुमरन कर ले मेरे मना,
तेरि बीति उमर हरि नाम बिना ।

कूप नीर बिनु धेनु छीर बिनु,
मंदिर दीप बिना,
जैसे तरूवर फल बिन हीना,
तैसे प्राणी हरि नाम बिना

देह नैन बिन, रैन चंद्र बिन,
धरती मेह बिना ।
जैसे पंडित वेद विहीना,
तैसे प्राणी हरि नाम बिना

काम क्रोध मद लोभ निहारो,
छोड़ दे अब संतजना,
कहे नानकशा सुन भगवंता,
या जग में नहिं कोइ अपना ।

सुमिरन कर ले मेरे मना,
तेरी बीती उम्र हरी नाम बिना ।

पंछी पंख बिना, हस्ती दन्त बिना, नारी पुरुष बिना,
जैसे पुत्र पिता बिना हीना, तैसे पुरुष हरी नाम बिना ।

कूप नीर बिना, धेनु खीर बिना, धरती मेह बिना,
जैसे तरुवर फल बिना हीना, तैसे पुरुष हरी नाम बिना ।

देह नैन बिना, रैन चन्द्र बिना, मंदिर दीप बिना,
जैसे पंडित वेद विहीना, तैसे पुरुष हरी नाम बिना ।

काम क्रोध मद लोभ निवारो, छोड़ विरोध तू संत जना ।
कहे नानक तू सुन भगवंता, इस जग में नहीं कोई अपना ॥

शुक्रवार, सितंबर 12, 2008

राम सुमिर राम सुमिर

राम सुमिर, राम सुमिर, यही तेरो काज है ..

माया को संग त्याग, हरिजू की शरण लाग .
जगत सुख मान मिथ्या, झूठो सब साज है .. १..

सपने जो धन पछान, काहे पर करत मान .
बारू की भीत तैसे, बसुधा को राज है .. २..

नानक जन कहत बात, बिनसि जैहै तेरो दास .
छिन छिन करि गयो काल, तैसे जात आज है .. ३..