गुरुवार, अगस्त 20, 2015

भजन: यही हरि भक्त कहते हैं

bhajan: yahi hari bhakt kahate hain
lyrics: Bindu

Click here to listen to the bhajan by Dr. Uma Shrivastav

यही हरि भक्त  कहते हैं, यही सद्ग्रन्थ गाते हैं ।
कि जाने कौन से गुण पर, दयानिधि रीझ जाते हैं ।

नहीं स्वीकार करते हैं, निमंत्रण नृप दुर्योधन का ।
विदुर के घर पहुंचकर, भोग छिलकों का लगाते हैं ।

न आये मधुपुरी से गोपियों की, दुख कथा सुनकर ।
द्रुपदजी की दशा पर, द्वारका से दौड़े आते हैं ।

न रोये बन गमन में, श्री पिता की वेदनाओं पर ।
उठा कर गीध को निज गोद में आंसू बहाते हैं ।

कठिनता से चरण धोकर, मिले कुछ 'बिन्दु' विधि हर को ।
वो चरणोदक स्वयं केवट के, घर जाकर लुटाते हैं ।
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