शनिवार, अक्तूबर 29, 2016

संकट मोचन हनुमाष्टक

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हमारे रामजी से राम रामकहियो जी हनुमान ,
कहियो जी हनुमान, कहियो जी हनुमान ॥

बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो ।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात ना टारो ।।
देवन आनि करी बिनती तब, छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 1 ।।
बालि की त्रास कपीस बसै गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिय कौन बिचार बिचारो ।।
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु , सो तुम दास के सोक निवारो ।।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 2 ।।
अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत ना बचिहौ हम सो जू, बिन सुधि लाए इहाँ पगु धारो ।।
हेरि तके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया – सुधि प्रान उबारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 3 ।।
रावन त्रास दई सिय को सब, राक्षसि सों कहि सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो ।।
चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 4 ।।
बान लग्यो उर लछिमन के तब, प्रान तजे सुत रावन मारो ।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोन सु बीर उपारो ।।
आनि सजीवन हाथ दई तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 5 ।।
रावन जुद्ध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो ।।
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 6 ।।
बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो ।।
जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत सँहारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 7 ।।
काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसों नहि जात है टारो ।।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कुछ संकट होय हमारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो ।। 8 ।।
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लँगूर ।
ब्रजदेह दानव दलन, जय जय जय कपि सुर ।
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