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बुधवार, जुलाई 16, 2014

भजन - नारायण जिनके हिरदय में

NarayaNa Jina Ke - MP3
Narayana jinake hiradaya me
Voice - V N Shrivastav 'Bhola'

नारायण जिनके हिरदय में
सो कछु करम करे न करे रे ..

नाव मिली जिनको जल अंदर
बाहु से नीर तरे न तरे रे .

पारस मणि जिनके घर माहीं
सो धन संचि धरे न धरे .

सूरज को परकाश भयो जब
दीपक जोत जरे न जरे रे ..

ब्रह्मानंद जाहि घट अंतर
काशी में जाये मरे न मरे रे ..

नाव मिली जिनको जल अंदर
बाहु से नीर तरे न तरे रे .

Listen to this bhajan sung by VNS Bhola and family
on BholaKrishna youtube channel
at
https://www.youtube.com/watch?v=bztCtDnfY4w


भजन: मेरे राम गरीब निवाज़

अब तुम बिन को मोरि राखे लाज,
मेरे राम गरीब निवाज़ ॥

मैं असहाय अधम अग्यानी, पतितन को सिरताज,
पतित उधारन विरदु आपनो, सिद्ध करो महाराज ॥
अब तुम बिन . . .

जिन जिन ध्याये तिन तिन पाये, अजामील गज व्याध,
हमरी बारी जाय छिपे तुम, किन कुंजन में आज ॥
अब तुम बिन . . .

धीरज दया क्षमा शुचिता दम संयम सच को ज्ञान,
दो हमको ये सद् गुन सारे, कृपा करो महाराज ॥
अब तुम बिन . . .

मैं अपराधी हूँ बड़ाऽऽऽ, (मुझ में) अवगुन भरा विकार,
क्षमा करो अपराध सब, अपना विरद विचार ॥
अब तुम बिन . . .

Listen to the bhajan sung by Shri VNS Bhola from Shree Ram Sharanam

Watch on Bholakrishna channel on Youtube at www.youtube.com/embed/hCShop9RfWE

 

गुरुवार, जुलाई 10, 2014

भजन : मैं हरि बिन क्यूँ जियूँ री माई

मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

पिव कारण बौरी भई, ज्यूं काठहि घुन खाई॥
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

ओखद मूल न संचरै, मोहि लाग्यो बौराई॥
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

कमठ दादुर बसत जल में जलहि ते उपजाई।
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

मीन जल के बीछुरे तन तलफि करि मरि जाई॥
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

पिव ढूंढण बन बन गई, कहुं मुरली धुनि पाई।
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

मीरा के प्रभु लाल गिरधर मिलि गये सुखदाई॥
मैं हरि बिन क्यूं जिऊं री माई॥

mai hari binu kyun jiyun ri mai -Meera Bhajan - composed by  VNS Bhola - sung by Nandini Srivastav

Long Version - www.youtube.com/v/W96blkFM2Ns




mai hari bin kyu jiyu ri mai - Meera Bhajan - composed by  VNS Bhola - sung by Nandini Srivastav
Short Version - www.youtube.com/v/7549Az_hqOo

मंगलवार, मई 06, 2014

भजन - अपने सूर्य स्वयं बन जाओ

MP3 Audio of Bhajan

apane surya svayam ban jao

sung by Vishal Chandra

अपने सूर्य स्वयं बन जाओ

तुम हो दिव्य शक्ति के स्वामी
बनो अग्रणी नहीं अनुगामी,
अपने ही अनुभव के बल पर
नये सृजन आधार बनाओ ।

निर्माता हो तुम निज पथ के,
स्वयं विधाता हो तुम निज के,
है अनन्त क्षमता मानव की,
अन्तर मे विश्वास जगाओ।

चलो न मिटते पद चिन्हों पर
रुको न विघ्नों बाधाओं पर,
नित्य नयी आलोक रश्मि से
अपनी प्रतिभा स्वयं जगाओ ।

जहाँ ब्रह्मज्ञानी जाते हैं
त्याग तपस्या अपनाते हैं,
जाओ अपने पौरुष से तुम
अन्तर तम का दीप जलाओ।

(reposted with new link to audio) https://archive.org/download/RamParivarBhajans/00-ApneSurya_vbr.mp3

शनिवार, मार्च 15, 2014

हनुमान चालीसा

Hanuman Chalisa MP3
by Shri V N Shrivastav 'Bhola', family and friends



श्री राम जय राम जय जय दयालु
श्री राम जय राम जय जय कृपालु

अतुलित बल धामं हेम शैलाभ देहम्
दनुज वन कृषाणं ज्ञानिनां अग्रगणयम्
सकल गुण निधानं वानराणामधीशम्
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।
वरनऊँ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार ।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥
राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनिपुत्र पवन सुत नामा ॥
महावीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमिति के संगी ॥
कंचन वरन विराज सुवेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥
हाथ बज्र औ ध्वजा विराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥
शंकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥
विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

सूक्ष्म रूप धरि सियहि देखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचंन्द्र के काज सँवारे ॥
लाय सजीवन लखन जियाये । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरत सम भाई ॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना । लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥
दु्र्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥
राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥
सब सुख लहैं तुम्हारी सरना । तुम रच्छक काहू को डर ना ॥
आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महावीर जब नाम सुनावैं ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥
सब पर राम तपस्वीं राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥
और मनोरथ जो कोइ लावै । तासु अमित जीवन फल पावै ॥
चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥
साधु संत के तुम रखबारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥
राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥
अंत काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ॥
और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरैं हनुमत बलबीरा ॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरू देव की नाईं ॥
जो शत बार पाठ कर कोई । छूटे बंदि महा सुख होई ॥
जो यह पढै हनुमान चलीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

श्री राम जय राम जय जय राम

MP3 Audio of Hanuman Chalisa can be downloaded from
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