शुक्रवार, अक्तूबर 23, 2009

भजन - भज मन राम चरण सुखदाई ..

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भज मन राम चरण सुखदाई ..

जिन चरनन से निकलीं सुरसरि
शंकर जटा समायी .
जटा शन्करी नाम पड़्यो है
त्रिभुवन तारन आयी ..
राम चरण सुखदाई ..

शिव सनकादिक अरु ब्रह्मादिक
शेष सहस मुख गायी .
तुलसीदास मारुतसुत की प्रभु
निज मुख करत बड़ाई ..
राम चरण सुखदाई ..


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