शनिवार, सितंबर 19, 2009

कीर्तन - बन्धुगणो ! मिलि कहो प्रेमसे (१)

बन्धुगणो ! मिलि कहो प्रेमसे 'यदुपति ब्रजपति श्यामा-श्याम ।'
मुदित चित्तसे घोष करो पुनि- 'पतित पावन राधेश्याम ॥'

जिह्वा-जीवन सफल करो कह- 'जय यदुनन्दन, जय घनश्याम ।'
ह्रदय खोल बोलो, मत चूको- 'रुक्मिणिवल्लभ श्याम श्याम ॥'

नव-नीरद-तनु, गौर मनोहर, 'जय श्रीमाधव जय बलराम।'
उभय सखा मोहनके प्यारे -'जय श्रीदामा, जयति सुदाम ॥'

परमभक्त निष्कामशिरोमणि- 'उद्धव-अर्जुन शोभाधाम।'
प्रेम-भक्ति-रस-लीन निरन्तर विदुर, 'विदुर-गृहिणी अभिराम ॥'

अति उमंगसे बोलो सन्तत- 'यदुपति ब्रजपति श्यामा-श्याम ।'
मुक्तकंठसे सदा पुकारो- 'पतित पावन राधेश्याम ॥'

http://www.archive.org/download/AratiGeetMala/AGM-bandhu-gano-jay-raadhe-raadhe.mp3
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