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बुधवार, फ़रवरी 07, 2018

भजन: रोम रोम में रमा हुआ है

rom rom me ramA huA hai
Listen to bhajan in the voice of V N Shrivastav 'Bhola'

रोम रोम में रमा हुआ है,
मेरा राम रमैया तू,
सकल सृष्टि का सिरजनहारा,
राम मेरा रखवैया तू,
तू ही तू, तू ही तू, ...

डाल डाल में, पात पात में,
मानवता के हर जमात में,
हर मज़हब, हर जात पात में
एक तू ही है, तू ही तू,
तू ही तू, तू ही तू, ...

सागर का ख़ारा जल तू है,
बादल में, हिम कण में तू है,
गंगा का पावन जल तू है,
रूप अनेक, एक है तू,
तू ही तू, तू ही तू, ...

चपल पवन के स्वर में तू है,
पंछी के कलरव में तू है,
भौरों के गुंजन में तू है ,
हर स्वर में ईश्वर है तू,
तू ही तू, तू ही तू, ...

"तन है तेरा, मन है तेरा,
प्राण हैं तेरे, जीवन तेरा,
सब हैं तेरे, सब है तेरा
,"

पर मेरा इक तू ही तू,
तू ही तू, तू ही तू, ...

मंगलवार, फ़रवरी 06, 2018

भजन: भज मन राम चरण सुखदाई ..

Bhajan: bhaj man ram charan sukhdai

Listen to the bhajan in the voice of Madhu Chandra 

भज मन राम चरण सुखदाई ..

जिन चरनन से निकलीं सुरसरि
शंकर जटा समायी .
जटा शन्करी नाम पड़्यो है
त्रिभुवन तारन आयी ..
राम चरण सुखदाई ..

शिव सनकादिक अरु ब्रह्मादिक
शेष सहस मुख गायी .
तुलसीदास मारुतसुत की प्रभु
निज मुख करत बड़ाई ..
राम चरण सुखदाई ..


सोमवार, फ़रवरी 05, 2018

भजन: पढ़ो पोथी में राम

Bhajan: Padho pothi me Ram

Listen to the bhajan by clicking here
(Audio from Bhajan Sandhya at Krishna Shivalaya on Nov 29, 2017)

पढ़ो पोथी में राम, लिखो तख्ती पे राम .
देखो खम्बे में राम, हरे राम राम राम ..

राम, राम, राम, राम, राम ॐ . ( २)
राम, राम, राम, राम, राम, राम . ( २)
राम, राम, राम, राम, हरे राम राम राम ..

देखो आंखों से राम, सुनो कानों से राम .
बोलो जिव्हा से राम, हरे राम राम राम ..
राम राम

पियो पानी में राम, जीमो खाने में राम .
चलो घूमने में राम, हरे राम राम राम ..
राम राम

बाल्यावस्था में राम, युवावस्था में राम .
वृद्धावस्था में राम, हरे राम राम राम ..
राम राम

जपो जागृत में राम, देखो सपनों में राम .
पाओ सुषुप्ति में राम, हरे राम राम राम ..
राम राम

रविवार, फ़रवरी 04, 2018

भजन: अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी

bhajan: ab kaise chhute ram rat lagi

Listen to bhajan by Shri V N S 'Bhola'

अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी ।

प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी , जाकी अँग-अँग बास समानी ।

प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा , जैसे चितवत चंद चकोरा ।

प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती , जाकी जोति बरै दिन राती ।

प्रभु जी, तुम मोती हम धागा , जैसे सोनहिं मिलत सुहागा ।

प्रभु जी, तुम स्वामी हम दासा , ऐसी भगति करै रैदासा ।





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भजन: रे मन मूरख, जनम गँवायौ

Bhajan: re man murakh janam gavaayo

Listen to bhajan by Shri VNS Bhola

रे मन मूरख जनम गँवायौ ।
करि अभिमान विषय को राच्यो, नाम शरण नहिं आयौ ॥
मन मूरख जनम गँवायौ, रे मन मूरख जनम गँवायौ ।

ये संसार फूल सेमल ज्यौं, सुन्दर देखि रिझायो ।
चाखन लाग्यौ रुई उडि़ गई, हाथ कछू नहिं आयौ ॥
मन मूरख जनम गँवायौ, रे मन मूरख जनम गँवायौ ।

कहा भये अब के मन सोचें, पहिलैं नाहिं कमायौ ।
सूरदास हरि नाम भजन बिनु, सिर धुनि-धुनि पछितायौ ॥
मन मूरख जनम गँवायौ, रे मन मूरख जनम गँवायौ ।



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