बुधवार, दिसंबर 02, 2009

भजन - छोड़ झमेला झूठे जग का

छोड़ झमेला झूठे जग का
कह गये दास कबीर |
पार लगायेंगे एक पल में
तुलसी के रघुवीर ||

भूल भुलैयाँ जीवन तेरा
साँचो नाम प्रभु को |
मन में बसा ले आज तू बन्दे
लेकर नाम गुरु को |
सूरदास के श्याम हरेंगे
जनम जनम की पीर ||

मेरा मेरा दिन भर करता
पर तेरा कछु नाँहीं |
माटी का ये खेल है सारा
मिलेगा माटी माँहीं |
मीराजी के गीत बुलायें
सबको यमुना तीर ||


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