मंगलवार, मई 04, 2010

भजन - देव तुम्हारे कर्इ उपासक

देव तुम्हारे कर्इ उपासक, कर्इ ढ़ंग से आते हैं ।
सेवा में बहुमूल्य वस्तुयें, लाकर तुम्हें चढ़ाते हैं ।

धूमधाम से साज बाज से, मंदिर में वे आते हैं ।
मुक्ता  मणि बहुमूल्य वस्तुयें लाकर तुम्हें चढ़ाते है ।

मैं ही एक भिखारिन ऐसी, जो कुछ साथ नहीं लार्इ ।
हाय ! गले में पहिनाने को, फूलों का भी हार नहीं ।

मैं गरीब अति निष्किंचन कुछ भी भेंट नहीं लार्इ ।
फिर भी साहस कर मंदिर में पूजा करने को आर्इ ।

पूजा और पुजापा प्रभुवर, इसी भिखारिन को समझो ।
दान दक्षिणा और निछावर, इसी पुजारिन को समझो ।

मैं उन्मत्त प्रेम  की लोभिन, हृदय दिखाने आर्इ हूँ ।
जो कुछ है बस यही पास है, इसे चढ़ाने आर्इ हूँ ।

चरणों में अर्पित  है प्रभुवर, चाहो तो स्वीकार करो।
यह तो वस्तु तुम्हारी ही है, ठुकरा दो या प्यार करो ।
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