Hanuman Chalisa MP3
by Shri V N Shrivastav 'Bhola', family and friends
श्री राम जय राम जय जय दयालु ।
श्री राम जय राम जय जय कृपालु ॥
अतुलित बल धामं हेम शैलाभ देहम् ।
दनुज वन कृषाणं ज्ञानिनां अग्रगणयम् ।
सकल गुण निधानं वानराणामधीशम् ।
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि ॥
श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।
वरनऊँ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार ।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ॥
हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान ॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥
राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनिपुत्र पवन सुत नामा ॥
महावीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमिति के संगी ॥
कंचन वरन विराज सुवेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥
हाथ बज्र औ ध्वजा विराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥
शंकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥
विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥
हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान ॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहि देखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचंन्द्र के काज सँवारे ॥
लाय सजीवन लखन जियाये । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरत सम भाई ॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥
हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान ॥
तुम्हरो मंत्र विभीषन माना । लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥
दु्र्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥
राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥
सब सुख लहैं तुम्हारी सरना । तुम रच्छक काहू को डर ना ॥
आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महावीर जब नाम सुनावैं ॥
हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान ॥
नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥
सब पर राम तपस्वीं राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥
और मनोरथ जो कोइ लावै । तासु अमित जीवन फल पावै ॥
चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥
साधु संत के तुम रखबारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥
राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥
हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान ॥
तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥
अंत काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ॥
और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरैं हनुमत बलबीरा ॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरू देव की नाईं ॥
जो शत बार पाठ कर कोई । छूटे बंदि महा सुख होई ॥
जो यह पढै हनुमान चलीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ॥
हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान ॥
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥
श्री राम जय राम जय जय राम ।
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भजब - छोड़ झमेला झूठे जग का
छोड़ झमेला झूठे जग का
कह गये दास कबीर |
पार लगायेंगे एक पल में
तुलसी के रघुवीर ||
भूल भुलैयाँ जीवन तेरा
साँचो नाम प्रभु को |
मन में बसा ले आज तू बन्दे
लेकर नाम गुरु को |
सूरदास के श्याम हरेंगे
जनम जनम की पीर ||
मेरा मेरा दिन भर करता
पर तेरा कछु नाँहीं |
माटी का ये खेल है सारा
मिलेगा माटी माँहीं |
मीराजी के गीत बुलायें
सबको यमुना तीर ||
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कह गये दास कबीर |
पार लगायेंगे एक पल में
तुलसी के रघुवीर ||
भूल भुलैयाँ जीवन तेरा
साँचो नाम प्रभु को |
मन में बसा ले आज तू बन्दे
लेकर नाम गुरु को |
सूरदास के श्याम हरेंगे
जनम जनम की पीर ||
मेरा मेरा दिन भर करता
पर तेरा कछु नाँहीं |
माटी का ये खेल है सारा
मिलेगा माटी माँहीं |
मीराजी के गीत बुलायें
सबको यमुना तीर ||
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भजन - नैया पड़ी मंझधार
नैया पड़ी मंझधार, गुरु बिन, कैसे लागे पार॥
मैं अपराधी जनम को मन में भरा विकार ।
तुम दाता दुख भंजन मेरी करो सम्हार ।
अवगुन दास कबीर के बहुत गरीबनवाज़ ।
जो मैं पूत, कपूत हूं, तहौं पिता की लाज ॥
गुरु बिन, कैसे लागे पार ॥
साहिब, तुम मत भूलियो, लाख लोग लगि जाँहिं ।
हम से तुमरे बहुत हैं, तुम से हमरे नाहिं ।
अंतरयामी एक तुम, आतम के आधार ।
जो तुम छोड़ो हाथ, प्रभुजी, कौन उतारे पार ॥
गुरु बिन, कैसे लागे पार ॥
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मैं अपराधी जनम को मन में भरा विकार ।
तुम दाता दुख भंजन मेरी करो सम्हार ।
अवगुन दास कबीर के बहुत गरीबनवाज़ ।
जो मैं पूत, कपूत हूं, तहौं पिता की लाज ॥
गुरु बिन, कैसे लागे पार ॥
साहिब, तुम मत भूलियो, लाख लोग लगि जाँहिं ।
हम से तुमरे बहुत हैं, तुम से हमरे नाहिं ।
अंतरयामी एक तुम, आतम के आधार ।
जो तुम छोड़ो हाथ, प्रभुजी, कौन उतारे पार ॥
गुरु बिन, कैसे लागे पार ॥
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भजन - दुख हरो द्वारिकानाथ
तुम कहाँ छुपे भगवान करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||
यही सुना है दीनबन्धु तुम सबका दुख हर लेते |
जो निराश हैं उनकी झोली आशा से भर देते ||
अगर सुदामा होता मैं तो दौड़ द्वारका आता |
पाँव आँसुओं से धो कर मैं मन की आग बुझाता ||
तुम बनो नहीं अनजान, सुनो भगवान, करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||
जो भी शरण तुम्हारी आता, उसको धीर बंधाते |
नहीं डूबने देते दाता, नैया पार लगाते ||
तुम न सुनोगे तो किसको मैं अपनी व्यथा सुनाऊँ |
द्वार तुम्हारा छोड़ के भगवन और कहाँ मैं जाऊँ ||
प्रभु कब से रहा पुकार, मैं तेरे द्वार, करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||
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दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||
यही सुना है दीनबन्धु तुम सबका दुख हर लेते |
जो निराश हैं उनकी झोली आशा से भर देते ||
अगर सुदामा होता मैं तो दौड़ द्वारका आता |
पाँव आँसुओं से धो कर मैं मन की आग बुझाता ||
तुम बनो नहीं अनजान, सुनो भगवान, करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||
जो भी शरण तुम्हारी आता, उसको धीर बंधाते |
नहीं डूबने देते दाता, नैया पार लगाते ||
तुम न सुनोगे तो किसको मैं अपनी व्यथा सुनाऊँ |
द्वार तुम्हारा छोड़ के भगवन और कहाँ मैं जाऊँ ||
प्रभु कब से रहा पुकार, मैं तेरे द्वार, करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||
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भजन - बिगड़ी बात बना दे राम
बिगड़ी बात बना दे राम
नैया पार लगा दे राम |
युग युग से मैं भटक रहा
अब तो राह दिखा दे राम ||
राम हे राम, राम सिया राम
घोर अंधेरा छाया है
मन पंछी घबराया है |
मोह माया के चक्कर में
ये मूरख भरमाया है |
अब तो अंधेरा दूर करो
ज्ञान का दीप जला दे राम ||
तुमने जीवनदान दिया
कितना बड़ा एहसान किया |
हमने मगर इस जीवन का
पग पग पर अपमान किया |
जैसे हैं हम तेरे हैं
भले बुरे प्रभु तेरे हैं
गुण अवगुण बिसरा दे राम ||
बिगड़ी बात बना दे राम
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नैया पार लगा दे राम |
युग युग से मैं भटक रहा
अब तो राह दिखा दे राम ||
राम हे राम, राम सिया राम
घोर अंधेरा छाया है
मन पंछी घबराया है |
मोह माया के चक्कर में
ये मूरख भरमाया है |
अब तो अंधेरा दूर करो
ज्ञान का दीप जला दे राम ||
तुमने जीवनदान दिया
कितना बड़ा एहसान किया |
हमने मगर इस जीवन का
पग पग पर अपमान किया |
जैसे हैं हम तेरे हैं
भले बुरे प्रभु तेरे हैं
गुण अवगुण बिसरा दे राम ||
बिगड़ी बात बना दे राम
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भजन - तूने रात गँवायी सोय के
तूने रात गँवायी सोय के दिवस गँवाया खाय के।
हीरा जनम अमोल था कौड़ी बदले जाय॥
सुमिरन लगन लगाय के मुख से कछु ना बोल रे।
बाहर के पट बंद कर ले अंतर के पट खोल रे।
माला फेरत जुग हुआ गया ना मन का फेर रे।
गया ना मन का फेर रे।
हाथ का मनका छोड़ दे मन का मनका फेर॥
दुख में सुमिरन सब करें सुख में करे न कोय रे।
जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होय रे।
सुख में सुमिरन ना किया दुख में करता याद रे।
दुख में करता याद रे।
कहे कबीर उस दास की कौन सुने फ़रियाद॥
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हीरा जनम अमोल था कौड़ी बदले जाय॥
सुमिरन लगन लगाय के मुख से कछु ना बोल रे।
बाहर के पट बंद कर ले अंतर के पट खोल रे।
माला फेरत जुग हुआ गया ना मन का फेर रे।
गया ना मन का फेर रे।
हाथ का मनका छोड़ दे मन का मनका फेर॥
दुख में सुमिरन सब करें सुख में करे न कोय रे।
जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होय रे।
सुख में सुमिरन ना किया दुख में करता याद रे।
दुख में करता याद रे।
कहे कबीर उस दास की कौन सुने फ़रियाद॥
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भजन - सुर की गति मैं
सुर की गति मैं क्या जानूँ .
एक भजन करना जानूँ ..
अर्थ भजन का भी अति गहरा
उस को भी मैं क्या जानूँ ..
प्रभु प्रभु प्रभु कहना जानूँ
नैना जल भरना जानूँ ..
गुण गाये प्रभु न्याय न छोड़े
फिर तुम क्यों गुण गाते हो
मैं बोला मैं प्रेम दीवाना
इतनी बातें क्या जानूँ ..
प्रभु प्रभु प्रभु कहना जानूँ
नैना जल भरना जानूँ ..
फुल्वारी के फूल फूल के
किस्के गुन नित गाते हैं .
जब पूछा क्या कुछ पाते हो
बोल उठे मैं क्या जानूँ ..
प्रभु प्रभु प्रभु कहना जानूँ
नैना जल भरना जानूँ ..
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एक भजन करना जानूँ ..
अर्थ भजन का भी अति गहरा
उस को भी मैं क्या जानूँ ..
प्रभु प्रभु प्रभु कहना जानूँ
नैना जल भरना जानूँ ..
गुण गाये प्रभु न्याय न छोड़े
फिर तुम क्यों गुण गाते हो
मैं बोला मैं प्रेम दीवाना
इतनी बातें क्या जानूँ ..
प्रभु प्रभु प्रभु कहना जानूँ
नैना जल भरना जानूँ ..
फुल्वारी के फूल फूल के
किस्के गुन नित गाते हैं .
जब पूछा क्या कुछ पाते हो
बोल उठे मैं क्या जानूँ ..
प्रभु प्रभु प्रभु कहना जानूँ
नैना जल भरना जानूँ ..
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भजन - दर्शन दो घनश्याम नाथ
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अँखियाँ प्यासी रे ..
मंदिर मंदिर मूरत तेरी फिर भी न दीखे सूरत तेरी .
युग बीते ना आई मिलन की पूरनमासी रे ..
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरि अँखियाँ प्यासी रे ..
द्वार दया का जब तू खोले पंचम सुर में गूंगा बोले .
अंधा देखे लंगड़ा चल कर पँहुचे काशी रे ..
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरि अँखियाँ प्यासी रे ..
पानी पी कर प्यास बुझाऊँ नैनन को कैसे समजाऊँ .
आँख मिचौली छोड़ो अब तो घट घट वासी रे ..
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरि अँखियाँ प्यासी रे ..
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