शुक्रवार, नवंबर 07, 2008

भजन - घूँघट का पट खोल रे

Ghuunghat Ka Pat Khol
by Anjana Bhattacharya
from Shree Ram Sharanam, Delhi.

घूँघट का पट खोल रे,
तोहे पिया मिलेंगे।

घट घट रमता राम रमैया,
कटुक बचन मत बोल रे॥

रंगमहल में दीप बरत है,
आसन से मत डोल रे॥

कहत कबीर सुनो भाई साधों,
अनहद बाजत ढोल रे॥
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