bhajan: kamal lochan kati pitambar
कमल लोचन कटि पीताम्बर, अधर मुरली गिरिधरम्
मुकुट कुंडल कर लकुटिया, सांवरे राधे वरम् ।
कूल यमुना धेनु आगे, सकल गोपिन मन हरम्
पीत वस्त्र गरुड़ वाहन,चरण नित सुख सागरम् ।।
वंशीधर वसुदेव छलिया, बलि छल्यो हरि वामनम्
डूबते गज राख लीन्हों, लंका छेड्यो रावणम् ।।
दीनानाथ दयालु सिन्धु, करुणामय करुणाकरम्
कविदत्त दास विलास निशदिन, नाम जप नित नागरम् ।।
कमल लोचन कटि पीताम्बर ,अधर मुरली गिरिधरम् ।।।।।
MP Audio - Bhajan
'Kamal Lochan Kati Pitambar'
sung by Sau. Meera Varma
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Another MP3 version of the bhajan - Thanks to Jyoti for the Audio
कमल लोचन कटि पीताम्बर, अधर मुरली गिरिधरम्
मुकुट कुंडल कर लकुटिया, सांवरे राधे वरम् ।
कूल यमुना धेनु आगे, सकल गोपिन मन हरम्
पीत वस्त्र गरुड़ वाहन,चरण नित सुख सागरम् ।।
वंशीधर वसुदेव छलिया, बलि छल्यो हरि वामनम्
डूबते गज राख लीन्हों, लंका छेड्यो रावणम् ।।
दीनानाथ दयालु सिन्धु, करुणामय करुणाकरम्
कविदत्त दास विलास निशदिन, नाम जप नित नागरम् ।।
कमल लोचन कटि पीताम्बर ,अधर मुरली गिरिधरम् ।।।।।
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