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मंगलवार, अक्टूबर 20, 2026

विजयदशमी शुभकामना - विजय रथ - मानस से

 विजय रथ 

श्री जस्टिस शिव दयालजी श्रीवास्तव द्वारा रामचरितमानस से चुनी हुई चौपाइयाँ एवं दोहे, जो 'उत्थान पथ' एवं 'साधना पथ' में प्रकाशित किए गए । 

MP3 - माधव मुकुंद और प्रार्थना श्रीवास्तव के स्वरों में 

दो.- वचनकर्म मन मोरि गति भजनु करहिं निःकाम ।
     तिन्ह के हृदय कमल महुँ करउँ सदा विश्राम ।।

सुनहु सखा कह कृपानिधाना । जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना ।।
सौरज धीरज तेहि रथ चाका । सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका ।।
बल बिबेक दम परहित घोरे । छमा कृपा समता रजु जोरे ।।
ईस भजनु सारथी सुजाना । बिरति चर्म संतोष कृपाना ।।
दान परसु बुधि सक्ति प्रचंडा । बर बिग्यान कठिन कोदंडा ।।
अमल अचल मन त्रोन समाना । सम जम नियम सिलीमुख नाना ।।
कवच अभेद बिप्र गुर पूजा । एहि सम विजय उपाय न दूजा ।।
सखा धर्ममय अस रथ जाकें । जीतन कहँ न कतहुँ रिपु ताकें ।।

दो.- महा अजय संसार रिपु जीति सकइ सो बीर ।
     जाकें अस रथ होइ दृढ़ सुनहु सखा मतिधीर ।।

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रणभूमि पर श्रीराम को बिना रथ के विभीषण ने देखा तो उन्हें शंका हुई कि रावण पर विजय कैसे होगी, तो श्रीराम कहते हैं —

हे सखे ! सुनो, जिससे विजय होती है, वह रथ तो दूसरा ही है । 

शौर्य तथा धैर्य उस रथ के पहिये हैं । सत्य और सदाचार उसकी दृढ़ ध्वजा और पताका हैं । बल, विवेक, दमन, (इन्द्रियों का) और परोपकार ये चार उसके घोड़े हैं, जो क्षमा, दया और समतारूपी डोरी से रथ में जोड़े हुए हैं। ईश्वर का भजन ही उसे चलानेवाला कुशल सारथी है। वैराग्य ढाल है, और संतोष तलवार। दान फरसा है, बुद्धि प्रचण्ड शक्ति है, और उत्तम विज्ञान है प्रचंड धनुष। निर्मल और स्थिर मन तरकस के समान है। शम (मन का वश में होना), (अहिंसादि) यम और (शौचादि) नियम ये अनेक बाण हैं। ब्राह्मणों और गुरु का पूजन अभेद्य कवच है। इसके समान विजय का दूसरा कोई उपाय नहीं। 

हे सखे! ऐसा कर्ममय रथ जिसके पास हो उसके लिए जीतने को कहीं कोई शत्रु ही नहीं है। 

हे धीर बुद्धिवाले सखा! सुनो, जिसके पास ऐसा दृढ़ रथ हो, वह वीर संसार (जन्म-मृत्यु) रूपी महान् शत्रु को भी जीत सकता है।

रविवार, अक्टूबर 11, 2026

मेरी महारानी वरदानी - मीरा वर्मा

MP3 - मेरी महारानी वरदानी , धन्य धन्य विंध्याचल रानी - सौ. मीरा वर्मा 


मेरी महारानी वरदानी कि

धन्य धन्य विंध्याचल रानी ॥


देवी पहाड़ों के ऊपर, 

एक मंदिर बना खासा

जहां जगदम्बे, का वासा ॥


मेरी महारानी वरदानी कि

धन्य धन्य विंध्याचल रानी ॥


देवी तले बहे गंगा, 

गंगा निर्मल पानी,

नहाये मेरी आदि शक्ति रानी ॥


मेरी महारानी वरदानी कि

धन्य धन्य विंध्याचल रानी ॥


देवी चंदन की चौकी, 

चौकी जड़े हीरे, 

चाबती पानों के बीड़े ॥


मेरी महारानी वरदानी कि

धन्य धन्य विंध्याचल रानी ॥

सोमवार, जुलाई 27, 2026

भजन: गुरु की महिमा कोई न जाने

Listen to Guru ki mahima koi na jaane 

sung by Dr. Ashok Shrivastava


गुरु परब्रह्म, गुरु भगवंत

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोबिंद

गुरु परब्रह्म, गुरु भगवंत


गुरु की महिमा, कोई न जाने

जाने तो बस एक, शिष्य ही जाने

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार


गुरु की महिमा, कोई न जाने

जाने तो बस एक, शिष्य ही जाने

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार


भक्ति मार्ग, गुरु जी बताएं

भक्ति मार्ग, गुरु जी बताएं

मन को ईश्वर, संग जुड़ाएं

मन को ईश्वर, संग जुड़ाएं

तन मन धन सब, उनके नाम

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार


सिर पर उनके, ज्ञान की गंगा

सिर पर उनके, ज्ञान की गंगा

कंठ पर सरस्वती माता

चरणों में उनके, तीर्थ सारे

चरणों में उनके, तीर्थ सारे

बार बार मैं, करूँ प्रणाम

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार


गुरु की महिमा, कोई न जाने

जाने तो बस एक, शिष्य ही जाने

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार


मंत्र प्रभु का, मुझे सिखाया

मंत्र प्रभु का, मुझे सिखाया

चंचल मन को, शिव संग जोड़ा

चंचल मन को, शिव संग जोड़ा

सचित आनंद, मन में समाया

सचित आनंद, मन में समाया

छोडूं ना पल मैं तो, गुरुजी का ध्यान

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार


मात पिता बंधु, सखा तुम्ही हो

मात पिता बंधु, सखा तुम्ही हो

जन्म जन्म के, पुण्य से मिले हो

जन्म जन्म के, पुण्य से मिले हो

नाता ये अब, कभी ना छूटे

नाता ये अब, कभी ना छूटे

अरज करूँ मैं, राखो लाज

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार


गुरु की महिमा, कोई न जाने

गुरु की महिमा, कोई न जाने

जाने तो बस एक, शिष्य ही जाने

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार

सद्गुरु मोरे, जीवन आधार 

मंगलवार, जुलाई 21, 2026

मेरे गुरुदेव चरणों में सुमन श्रद्धा के अर्पित है

 Listen to Mere Gurudev Charano Me Suman Shraddha Ke 

sung by Shri Justice Shiv Dayal Ji Shrivastav 

मेरे गुरुदेव चरणों में, सुमन श्रद्धा के अर्पित है,

तेरी ही देन है जो है, वही सेवा में अर्पित है।

न प्रीति है प्रतीति है, नहीं पूजा की शक्ति है ।

मेरा यह मन, मेरा यह तन, मेरा जीवन समर्पित है ॥

तुम्ही हो भाव में मेरे, विचारों में, पुकारों में ।

तेरे चरणों पे हे गुरुवर, मेरा सर्वस्व अर्पित है ॥

मेरी इच्छाएँ हों तेरी, मेरे सब कर्म हों तेरे ।

बना ले यंत्र अब मुझको मेरा कण कण समर्पित है ॥

मेरे गुरुदेव चरणों में, सुमन श्रद्धा के अर्पित है,

तेरी ही देन है जो है, वही सेवा में अर्पित है।

सोमवार, जुलाई 20, 2026

हे मेरे गुरुदेव, करुणासिन्धु, करुणा कीजिये

 Listen to He Mere Gurudev Karunasindhu Karuna Keejiye

sung by Shri Justice Shiv Dayal Ji Shrivastav 

हे मेरे गुरुदेव, करुणासिन्धु, करुणा कीजिये ।

हूँ अधम, आधीन, अशरण, अब शरण में लीजिये ॥

खा रहा गोते हूँ मैं भवसिन्धु के मझधार में ।

आसरा है दूसरा कोई न अब संसार में ॥

मुझमें है जप तप न साधन और नहीं कुछ ज्ञान है ।

निर्लज्जता है एक बाकी और बस अभिमान है ॥

पाप बोझे से लदी नैया भँवर में जा रही ।

नाथ दौड़ो, अब बचाओ जल्द डूबी जा रही ॥

आप भी यदि छोड़ देंगे फिर कहाँ जाऊँगा मैं ।

जन्म-दुःख से नाव कैसे पार कर पाऊँगा मैं ॥

सब जगह "मंजुल" भटक कर, ली शरण प्रभु आपकी ।

पार करना या न करना, दोनों मर्जी आपकी ॥


परम गुरु जै जै राम परम गुरु जै जै राम।

गुरुवार, जुलाई 16, 2026

श्री राम परिवार की अरदास




अयोध्या जी के उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानोपाली
से दीक्षित (न्यायमूर्ति शिव दयाल जी की) पूज्य दादी के हस्तलेख में 




श्री राम जय राम जय जय राम 

एक ओंकार सतनाम करता पुरखु 
निरभउ निरवैरु अकाल मूरति 
अजूनी सैभं गुर प्रसादि। जपु। 
आदि सचु जुगादि सचु। 
है भी सचु नानक होसी भी सचु। 

तुम ठाकुर तुम पै अरदास 
तुम मात पिता हम बालक तेरे। 
तुमरी कृपा में सुख घनेरे। 
कोइ नहि जानै तुमरा अंतु। 
ऊचे ते ऊचा भगवंत। 
सगल समगरी तुमरै सूत्रि धारी। 
तुमते होइ सु आज्ञाकारी। 
तुमरी गति मिति तुम ही जानी। 
नानक दास सदा कुरबानी।
दोउ कर जोरि करउ अरदास, 
तिस भंडे ता आवे रास 
ता आगे नानक खड़ा करे अरदास 

श्री भंडे पंडे जी चरन कमल का ध्यान धरके 
गाजो जी श्री वाहेगुरु जी। 

श्री अमृतसर तरन तारन दुख निवारन जी के 
चरन कमल का ध्यान धरके 
गाजो जी श्री वाहेगुरु जी। 

श्री गुरु नानक देव निरभउ निरंकार 
अखंड जोति सरूप का ध्यान धरके 
गाजो जी श्री वाहेगुरु जी। 

श्री बाबा श्री चंद बाबा 
लक्ष्मी चंद बाबा सहज राम जी बाबा 
संगत बख्श जी व माधो राम जी 
व गुरु नारायण राम जी 
व गुरु केशव राम जी महाराज 
गुरु परमात्मा गुरु स्वामी नाथ के 
चरन कमल का ध्यान धरके 
बोलो जी श्री वाहेगुरु जी।

गरीब निवाज सच्चे पातशाह 
सच्चिदानंद परमेश्वर निरंकार निर्वाण
अखंड जोतिष सरूप का ध्यान धरके 
बोलो जी श्री वाहेगुरु जी। 

गरीब निवाज सच्चे पातशाह 
अमृत बेला की अरदास 
भूल चूक माफ 
सच खंड प्रमान 
ब्रत की लाज बाणी की टेक 
साधु का संग हरि नाम का रंग। 
भजन प्रगार दुख पाप क्लेश का नाश 
श्री गुरु महाराज का बिलास। 
सरब का आनंद मंगल रास। 
स्थान मकान बस्ती खेड़ा गांव 
आबादान राजा राज 
प्रजा सुख बसत 
संत पढ़ते सुनते लबस्ते। 
सतगुरु नानक देव निरवान देव 
चढ़ती कला तेरे भाणे। 
सरब जा का भला। 
दंडवत बंदना अनेक बार 
सरब कला सा मस्ता डोलंत 
ते राखो प्रभु नानक दे करि 
हाथ माथ टेक महाराज 
श्री वाहेगुरु जी।

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ੴ 
एक ओंकार 

श्री वाहेगुरु जी की फतेह ।
श्री भगौती जी सहाय ।। 
वार श्री भगौती जी की ।। 
पातशाही (दसवीं)।। 

प्रथम भगौती सिमरि कै गुरु नानक लई धिआइ ॥ 
फिर अंगद गुरु ते अमरदास रामदासै होई सहाय।। 
अरजन हरगोबिंद नो सिमरौ श्री हरिराय।। 
श्री हरिकृषन ध्याइये जिस डिठै सभ दुःख जाए।। 
गुरु तेग बहादर सिमरियै घर नौ निध आवै धाय।। 
दसवां पातशाह श्री गुरु गोविंद जी साहिब! 
सभ थाईं होए सहाय।।

सत श्री अकाल पुरख जी का खालसा 
जी साहिब बोलो जी श्री वाहेगुरु जी। 

प्रथमे सरबत सबह खालसे जी को 
(श्री वाहेगुरु, वाहेगुरु, वाहेगुरु) चित्त आवे, 
चित्त आवण दा सदका सरब सुख होवे। 
जहां जहां खालसा जी साहिब, 
तहां तहां रछया रियायत, 
बिरद की पैज रहे, पंथ की जीत, 
श्री साहिब जी सहाय, 
देग तेग फतेह गुरु 
खालसे जी के बोलबाले, 
बोलो जी श्री वाहेगुरु जी।

चौकियां, बुंगै, झंडे, जुगो जुग अटल 
धरम की जैकार। 
बोलो जी श्री वाहेगुरु जी। 

तेरे हजूर (रहिराम) दी अरदास 
भूल चूक माफ, 
तेरे चरन कमल पासि सिख 
पड़दे सुणदे सरबत लाइवत 

नानक नाम चढ़दी कलां, 
तेरे भाणे सरबत दा भला। 

श्री वाहेगुरु जी का खालसा 
श्री वाहेगुरु जी की फतेह।

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ੴ
आरती श्री गुरु नानक जी की

गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने तारिका मंडल जनक मोती ॥
धूपु मलआनलो पवणु चवरो करे सगल बनराइ फूलंत जोती ॥
कैसी आरती होइ भव खंडना तेरी आरती ॥
अनहता सबद वाजंत भेरी ॥ रहाउ ॥
सहस तव नैन नन नैन है तोहि कउ सहस मूरति नना एक तोही ॥
सहस पद बिमल नन एक पद गंध बिनु सहस तव गंध इव चलत मोही ॥
सभ महि जोति जोति है सोइ ॥
तिस कै चानणि सभ महि चानणु होइ ॥
गुर साखी जोति परगटु होइ ॥
जो तिसु भावै सु आरती होइ ॥
हरि चरण कमल मकरंद लोभित मनो अनदिनो मोहि आही पिआसा ॥
कृपा जलु देहि नानक सारिंग कउ होइ जा ते तेरै नामि वासा ॥

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हे मेरे गुरुदेव करुणा सिन्धु करुणा कीजिये ।
हूँ अधम आधीन अशरण, अब शरण में लीजिये ॥
खा रहा गोते हूँ मैं भवसिन्धु के मझधार में ।
आसरा है दूसरा कोई न अब संसार में ॥
मुझमें है जप तप न साधन और नहीं कुछ ज्ञान है ।
निर्लज्ता है एक बाकी और बस अभिमान है ॥
पाप बोझे से लदी नैया भँवर में जा रही ।
नाथ दौड़ो, अब बचाओ जल्द डूबी जा रही ॥
आप भी यदि छोड़ देंगे फिर कहाँ जाऊँगा मैं ।
जन्म-दुःख से नाव कैसे पार कर पाऊँगा मैं ॥
सब जगह "मंजुल" भटक कर, ली शरण प्रभु आपकी ।
पार करना या न करना, दोनों मर्जी आपकी ॥

परम गुरु जै जै राम परम गुरु जै जै राम।

जयति जयति वन्दन हर की
गाओ मिल आरती सिया रघुवर की
गुरु पद नख मणि चन्द्रिका प्रकाश
जाके उर बसे ताके मोह तम नाश
जाके माथ नाथ तव हाथ कर वास
ताके होए माया मोह सब ही विनाश
पावे रति गति मति सिया वर की
गाओ मिल आरती सिया रघुवर की
भक्ति योग रस अवतार अभिराम
करें निगमागम समन्वय ललाम
सिय पिय नाम रूप लीला गुण धाम
बाँट रहे प्रेम निष्काम बिन दाम
हो रही सफल काया नारी नर की
गाओ मिल आरती सिया रघुवर की
जयति जयति बंदन हर की, 
गाओ मिल आरती श्री रघुबर की।

जै सिया राम जै भरत शत्रुघ्न जै लछमण जै जै हनुमान, 

मेरे राम सर्वाधार, बार बार नमस्कार, 
मेरे राम सर्वाधार, बार बार नमस्कार, 
बार बार नमस्कार, बार बार नमस्कार, 
मेरे राम सर्वाधार, बार बार नमस्कार।

श्री रामचन्द्र चरणौ मनसा स्मरामि 
श्री रामचन्द्र चरणौ वचसा गृणामि 
श्री रामचन्द्र चरणौ शिरसा नमामि 
श्री रामचन्द्र चरणौ शरणं प्रपद्ये

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। 
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतम् मनसा स्मरामि 
श्रीरामदूतम् शिरसा नमामि श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।।

गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी॥ 
सीताराम चरण रति मोरे । अनुदिन बढ़ऊ अनुग्रह तोरे॥
सीम की चांप सकइ कोउ तासु। बड़ रखवार रमापति जासु।। 
महावीर बिनवउँ हनुमाना। राम जास सुर आप बखाना। 
कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥

मेरे गुरुदेव चरणों में, सुमन श्रद्धा के अर्पित है,
तेरी ही देन है जो है, वही सेवा में अर्पित है।
न प्रीति है प्रतीति है, नहीं पूजा की शक्ति है ।
मेरा यह मन, मेरा यह तन, मेरा जीवन समर्पित है ॥
तुम्ही हो भाव में मेरे, विचारों में, पुकारों में ।
तेरे चरणों पे हे गुरुवर, मेरा सर्वस्व अर्पित है ॥
मेरी इच्छाएँ हों तेरी, मेरे सब कर्म हों तेरे ।
बना ले यंत्र अब मुझको मेरा कण कण समर्पित है ॥
मेरे गुरुदेव चरणों में, सुमन श्रद्धा के अर्पित है,
तेरी ही देन है जो है, वही सेवा में अर्पित है।

चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् । 
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ।।


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Handwritten text by Pujya Dadi, 
The transcription is not yet complete (please write a comment with any corrections/additions)..
Please listen to the audio for complete lyrics.


गुरुवार, जुलाई 10, 2025

ओ मतवारे योगी - व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'

 व्यास पूर्णिमा के अवसर पर
श्री राम शरणम् के गुरुजन को
भजनांजलि 


ओ मतवारे योगी, तुमने हमको दिव्य प्रकाश दिया।

नाम की ज्योति जगाई मन में, श्रद्धा और विश्वास दिया॥

ओ मतवारे योगी ......


अंधकार में भटक रहे थे, यहाँ वहाँ सिर पटक रहे थे।

अति दुलार कर, बाँह पकड़ कर, सत्य डगर पर डाल दिया॥

ओ मतवारे योगी .......


शरण हीन थे, अति मलीन थे, सत्कर्मो प्रति उदासीन थे।

महामंत्र दे राम नाम का, हम सबका उद्धार किया॥

ओ मतवारे योगी......


ओ मतवारे योगी, तुमने हमको दिव्य प्रकाश दिया।

नाम की ज्योति जगाई मन में, श्रद्धा और विश्वास दिया॥

गुरुवार, जुलाई 03, 2025

वैद्य परम गुरु स्वामी - व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'

 Vaidya Param Guru Swami


मेरे वैद्य परमगुरु स्वामी॥

तन के सारे रोग मिटावें,
मन में परमानंद बसावें।
भय पीड़ायें दूर भगावें,
गुरु मेरे विज्ञानी॥
वैद्य परमगुरु स्वामी।

भूत भविष्य सब जन के जानै,
कष्ट भोग सबके अनुमाने।
औषधि मूल सबै पहिचाने,
सतगुरु अंतरयामी॥
वैद्य परमगुरु स्वामी।

जब रोगी थक हार बुलावै,
रामबाण गुरुदेव चलावै।
रोग लंकपति मार गिरावै,
पल में सतगुरु स्वामी॥
वैद्य परमगुरु स्वामी।

कल क्या होगा किसे ज्ञात है,
जन्मों का प्रारब्ध साथ है।
अगला पल श्री राम हाथ है,
कहते सद्गुरु स्वामी॥
वैद्य परमगुरु स्वामी।


शब्दकार, स्वरकार, गायक : व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'

शुक्रवार, जून 13, 2025

कृपा करो श्री राम - प्रीति चंद्रा



कृपा करो श्री राम ,
सब पर कृपा करो

मैं ना जानू किस विधि रीझो
अपनी नज़र मेहर की कीजो
आनंदकंद घनश्याम 
सब पर कृपा करो

आज तलक तो कोई सवाली 
तेरे दर से गया न खाली
भर दो घर में धन धान्य 
सब पर कृपा करो

गहरी नदिया निशा अंधेरी
ये  निर्दोष शरण है तेरी
लो गिरते को तुम थाम
सब पर कृपा करो

राम राम राम 
सिया राम राम राम 

बुधवार, जून 11, 2025

जो शरण आया प्रभु की - व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'


जो शरण आया प्रभु की, वह सदा सुख पायेगा।

अगम भवसागर बिना श्रम पार वह कर जायेगा।।


नाम लेते ही प्रभु का, दूर होंगे कष्ट सब।

दुसह पीडायेँ मिटेंगी, ध्यान लग जायेगा जब। 

शांति सुख के धाम का पट आप ही खुल जायेगा।। 


अनगिनत जन पार उतरे, राम नाम जहाज से।

गीध गणिका गज तरे, प्रभु नाम के ही जाप से।

नाम नैया बैठ कर भवसिंधु तू तर जायेगा।। 


जो शरण आया प्रभु की, वह सदा सुख पाएगा। 


शब्दकार, स्वरकार, गायक : व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'

सोमवार, जून 09, 2025

हरि बिन क्यूँ जीऊँ री माई - नंदिनी


हरि बिन क्यूँ जीऊँ री माय।

हरि कारण बौरी भई, जस काठहि घुन खाय।

औषध मूल न संचरै, मोहि लागौ बौराय।

कमठ दादुर बसत जलमँह, जलहि ते उपजाय।

हरि ढूढँन गई बन-बन, कहुँ मुरली धुन पाय।

मीरा के प्रभु लाल गिरधर, मिलि गये सुखदाय।

शुक्रवार, मई 30, 2025

जय कृष्ण हरे श्री कृष्ण हरे


जय कृष्ण हरे श्री कृष्ण हरे .
दुखियों के दुख दूर करे 
जय जय जय कृष्ण हरे ..

जब चारों तरफ़ अंधियारा हो 
आशा का दूर किनारा हो .
जब कोई ना खेवन हारा हो 
तब तू ही बेड़ा पार करे .
तू ही बेड़ा पार करे 
जय जय जय कृष्ण हरे ..

तू चाहे तो सब कुछ कर दे 
विष को भी अमृत कर दे .
पूरण कर दे उसकी आशा 
जो भी तेरा ध्यान धरे .
जो भी तेरा ध्यान धरे 
जय जय जय कृष्ण हरे ..

जय कृष्ण हरे श्री कृष्ण हरे .
दुखियों के दुख दूर करे 
जय जय जय कृष्ण हरे ..

बुधवार, मई 28, 2025

रे मन प्रभु से प्रीति करो - अतुल


रे मन प्रभु से प्रीति करो।

प्रभु के प्रेम भक्ति श्रद्धा से,
अपना आप भरो।

ज्यों चकोर चंदा बिन व्याकुल 
दीवाना हो जाए, 
जल बिन मीन तड़प कर जैसे,
अपनी जान गँवाए ।
रह न सको बिन प्रभु के तुम भी 
ऐसा ध्यान धरो,  ऐसा ध्यान धरो।।

रे मन प्रभु से प्रीति करो।
प्रभु के प्रेम भक्ति श्रद्धा से,
अपना आप भरो।
रे मन प्रभु से प्रीति करो।

ज्यूँ पुकार नित करे पपीहा, 
पी पी नाम पुकारे,
प्रेम भक्ति में प्रभु के ऐसे, 
हो जाओ मतवारे।
ज्यों पतंग जल जाए ज्योति पर 
ऐसे प्रेम करो,  ऐसे प्रेम करो।।

रे मन प्रभु से प्रीति करो।
प्रभु के प्रेम भक्ति श्रद्धा से,
अपना आप भरो।
रे मन प्रभु से प्रीति करो।

ऐसी प्रीति करो तुम प्रभु से,
प्रभु तुम माहिं समाये।
बने आरती पूजा जीवन,
रसना हरि गुण गाये।
राम नाम आधार लिये तुम,
इस जग में विचरो, इस जग में विचरो।।

रे मन प्रभु से प्रीति करो।



गजाधर फूफाजी इस भजन को बहुत ही भक्तिभाव से गाते थे - अतुल

रचना: जियालाल वसंत

स्वरकार: श्री गजाधर प्रसाद श्रीवास्तव
गायक: श्री अतुल श्रीवास्तव

रविवार, मई 25, 2025

नित्य सखा श्री राम हमारे -  व्ही. एन. श्रीवास्तव


हे राम हे राम 
मेरे राम मेरे राम 

नित्य सखा श्री राम हमारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे
नित्य सखा श्री राम हमारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे 

तू स्वार्थी थोड़ा सुख पाकर 
देने वाले को बिसराता
तू स्वार्थी थोड़ा सुख पाकर 
देने वाले को बिसराता
पर वो दाता सखा विधाता 
पर वो दाता सखा विधाता 
तुझको पल भर भी न भुलाता 
पर वो दाता सखा विधाता 
तुमको पल भर भी न भुलाता
तेरी रक्षा करने को वो 
तेरी रक्षा करने को वो 
हरदम रहता पास तुम्हारे 
पास तुम्हारे 

नित्य सखा श्री राम हमारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे
नित्य सखा श्री राम हमारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे
मन क्यों इत उत बाँह पसारे
मन क्यों इत उत बाँह पसार 
बाँह पसारे 

राम मेरे राम 
मेरे राम मेरे राम 
हे राम हे राम हे राम 
हे राम हे राम हे राम  
मेरे राम मेरे राम 

माया ठगनी बाँह पाश धर 
माया ठगनी बाँह पाश धर 
तुझको विषय माल पहिरावे 
तुझको विषय माल पहिरावे 
डम डम डमरू थाप काम को 
डम डम डमरू थाप काम को 
बेबस कर ये तुझे नचावे 
बेबस कर ये तुझे नचावे 
डम डम डमरू थाप काम को 
बेबस करके तुझे नचावे 
ऐसे में श्री राम सखा बन 
ऐसे में श्री राम सखा, तव  
बंधन काट, कु त्रास निवारे 
बंधन काट कु त्रास निवारे 

नित्य सखा श्री राम हमारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे 
नित्य सखा श्री राम हमारे 
मन क्यों इत उत बाँह पसारे 

हे राम हे राम हे राम 

मेरे राम मेरे राम 
मेरे राम मेरे राम 
मेरे राम


शब्दकार, स्वरकार, गायक : व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'

दुख हरो द्वारिकानाथ


तुम कहाँ छुपे भगवान करो मत देरी |
दुःख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||
दुख हरो द्वारिकानाथ शरण मैं तेरी ||

यही सुना है दीनबन्धु तुम सबका दुख हर लेते |
जो निराश हैं उनकी झोली आशा से भर देते ||
अगर सुदामा होता मैं तो दौड़ द्वारका आता |
पाँव आँसुओं से धो कर मैं मन की आग बुझाता ||
तुम बनो नहीं अनजान, सुनो भगवान, करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||

जो भी शरण तुम्हारी आता, उसको धीर बंधाते |
नहीं डूबने देते दाता, नैया पार लगाते ||
तुम न सुनोगे तो किसको मैं अपनी व्यथा सुनाऊँ |
द्वार तुम्हारा छोड़ के भगवन और कहाँ मैं जाऊँ ||
प्रभु कब से रहा पुकार, मैं तेरे द्वार, करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||



Originally posted on 4/7/16

Repost with video by Kirti Anurag (Chhavi Bhaiya)

प्रभु तुम अन्तर्यामी

Prabhu Tum Antaryami
Music by Khayyam


प्रभु तुम अन्तर्यामी
दया करो, दया करो, हे स्वामी

अंग अंग में रंग सांवरा
गहरा होता जाये
मैं तो बस बिन मोल बिकानी
मन में तुम्ही समाये
लोग करें बदनामी
दया करो, दया करो, हे स्वामी

मन्द मन्द मुसकान मनोहर
मुख पर लट घुंघराली
अचरज क्या जो भई बावरी
देख के छवि मतवाली
बेल प्रीत की जामी
दया करो, दया करो, हे स्वामी

मैं गुणहीन, रिझाऊं कैसे
तुम को हे नटनागर
एक यही विशवास ह्रदय में
तुम हो दया के सागर
तीन लोक के स्वामी
दया करो, दया करो, हे स्वामी




Originally Published on Apr 22, 2015
Repost with new video addition, sung by Kirti Anurag (Chhavi Bhaiya)

शनिवार, मई 24, 2025

तुम्हारे साथ है श्री राम

bhajan: tumhare sath hai shri ram

तुम्हारे साथ है श्री राम, तो किस बात की चिंता
किया करते हो तुम यूं ही, सदा दिन-रात की चिंता.

उसी के हाथ में जीना उसी के हाथ में मरना,
उसी के हाथ सब खुशियां, उसी के हाथ दुख भरना,
अरे तुमको पड़ी क्या है, प्रभु के हाथ की चिंता...

तुम्हारे साथ है श्री राम तो किस बात की चिंता
किया करते हो तुम यूं ही, सदा दिन रात की चिंता

घड़ी हो संकटों की तो करो श्री राम का सिमरन
झड़ी हो झंझटों की तो करो हरि नाम जप चिंतन
मिला है साथ उसका तो भला किस साथ की चिंता

तुम्हारे साथ है श्री राम तो किस बात की चिंता...
किया करते हो तुम यूं ही, सदा दिन रात की चिंता.

उसी का नाम ले कर के तरो तुम बीच सागर से
उसी का नाम ले कर के उड़ो पर्वत के उपर से
करेगा आप अपने भक्त की औकात की चिंता

तुम्हारे साथ है श्री राम तो किस बात की चिंता...
किया करते हो तुम यूं ही, सदा दिन रात की चिंता.

उसी के नाम की धुन ध्यान से जगती हैं तकदीरें
उसी के नाम की धुन ध्यान से सधती हैं तस्वीरें
नहीं 'निर्दोष' फिर त्रिताप के उत्पात की चिंता

तुम्हारे साथ है श्री राम तो किस बात की चिंता...
किया करते हो तुम यूं ही, सदा दिन रात की चिंता.

शुक्रवार, मई 23, 2025

संत श्री स्वामी एकरसानंद जी सरस्वती से प्राप्त उपदेश

संत श्री स्वामी एकरसानंद जी सरस्वती से प्राप्त दस उपदेश - ये परमात्मा की आज्ञा है, वेद तथा गीतानुसार हैं। जो इन पर चलेगा, उसकी मुक्ति अवश्य होगी।  

पहला - संसार को स्वप्नवत जानो
दूसरा - अति हिम्मत रखो
तीसरा - अखंड प्रफुल्लित रहो, दुख में भी 
चौथा  -  परमात्मा का स्मरण करो, जितना बन सके
पांचवा - किसी  को दुःख मत दो, बने तो सुख दो 
छठा   -  सभी पर अति प्रेम रखो
सातवाँ - नूतन बालवत स्वभाव रखो
आठवाँ - मर्यादानुसार चलो
नवां     - अखंड पुरुषार्थ करो, गंगा प्रवाहवत; आलसी मत बनो
दसवां  - जिसमे तुमको नीचा देखना पड़े, ऐसा काम मत करो

बुधवार, मई 21, 2025

मेरे रोम रोम श्री राम विराजे - व्ही. एन. श्रीवास्तव


मेरे रोम रोम श्री राम विराजते  रहे, यही मेरी इच्छा  है - व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'


 रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।
जनक लली, श्री लखन लला अरु महावीर के साथ ।।

वन्दन करते राम चरण अति हर्षित मन हनुमान ।
आतुर रक्षा करने को सज्जन भगतन के प्रान ।
अभयदान दे रहे मुझे करुणा सागर रघुनाथ ।। 

रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।।

मुझको भला कष्ट हो कैसे, क्यों कर पीड़  सताए ।
साहस कैसे करें दुष्ट जन, मुझ पर हाथ उठाए ।
अंग संग जब मेरे हैं संकटमोचन के नाथ ।। 

रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।। 

विघ्न हरे, सद्गुरु के आश्रम स्वयं राम जी आये । 
शाप मुक्त कर दिया अहिल्या को पग धूर लगाये ।
वैसे चिंता मुक्त हमें कर रहे राम रघुनाथ ।। 

रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ ।।

रोम रोम श्रीराम बिराजे धनुष बाण ले हाथ । 
जनक लली, श्री लखन लला अरु महावीर के साथ ।।


शब्दकार, स्वरकार, गायक : व्ही. एन. श्रीवास्तव 'भोला'

शनिवार, अप्रैल 12, 2025

अब मुझे राम भरोसा तेरा - अतुल श्रीवास्तव

अब मुझे राम भरोसा तेरा
राम भरोसा तेरा
अब मुझे राम भरोसा तेरा ॥

मुझे भरोसा राम का रहे सदा सब काल ।
दीनबन्धु वह देव है सुखकर दीन दयाल ॥

पकड़ शरण अब राम की सुदृढ निश्चय साथ ।
तज कर चिंता मैं फिरूँ पा कर उत्तम नाथ ॥

अब मुझे राम भरोसा तेरा
राम भरोसा तेरा
अब मुझे राम भरोसा तेरा ॥

मधुर महारस नाम पान कर, मुदित हुआ मन मेरा ॥

अब मुझे राम भरोसा तेरा
राम भरोसा तेरा
अब मुझे राम भरोसा तेरा ॥

जो देवे सब जगत को अन्न पान शुभ प्राण ।
वही दाता मेरा हरि सुख का करे विधान ॥

वन अटवी गिरि शिखर पर, घोर विपद के बीच ।
तज कर चिंता मैं फिरूँ, निर्भय आँखें मींच ॥

कष्ट क्लेश के काल में निंदा हो अपमान ।
राम भरोसे शांत रह सोऊँ चादर तान ॥ 

अब मुझे राम भरोसा तेरा
राम भरोसा तेरा
अब मुझे राम भरोसा तेरा ॥

दीपक ज्ञान जगा जब भीतर, मिटा अज्ञान अन्धेरा ।
निशा निराशा दूर हुई सब, आया शांत सबेरा ॥

अब मुझे राम भरोसा तेरा
राम भरोसा तेरा
अब मुझे राम भरोसा तेरा ॥

...... राम राम राम राम ......

मुझे भरोसा राम तू  दे अपना अनमोल ।
रहूँ मस्त निश्चिंत मैं कभी न जाऊँ डोल ॥

मुझे भरोसा परम है राम राम श्री राम ।
मेरी जीवन ज्योति है वही मेरा विश्राम ॥



रचना: परम पूज्यनीय स्वामी श्री सत्यानन्द जी महाराज

स्वरकार एवं गायक: श्री अतुल श्रीवास्तव



Download this bhajan in the voice of Shri Atul Shrivastava.