भजन - अब कृपा करो श्री राम नाथ दुख टारो

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ab kripa karo shri ram
From Shri Ram Sharanam
Voice V N Shrivastav Bhola


अब कृपा करो श्री राम नाथ दुख टारो।
इस भव बंधन के भय से हमें उबारौ।

तुम कृपा सिंधु रघुनाथ नाथ हो मेरे ।
मैं अधम पड़ा हूँ चरण कमल पर तेरे।
हे नाथ। तनिक तो हमरी ओर निहारो।
अब कृपा करो ...

मैं पंगु दीन हौं हीन छीन हौं दाता ।
अब तुम्हें छोड़ कित जाउं तुम्हीं पितु माता ।
मैं गिर न कहीं प्रभु जाऊँ आय सम्हारो।
अब कृपा करो ...

मन काम क्रोध मद लोभ मांहि है अटका ।
मम जीव आज लगि लाख योनि है भटका ।
अब आवागमन छुड़ाय नाथ मोहि तारो।
अब कृपा करो श्री राम नाथ दुख टारो ॥

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भजन - दाता राम दिये ही जाता

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data Raam diye hi jata
From Shri Ram Sharanam
Voice V N Shrivastav Bhola

दाता राम दिये ही जाता ।
भिक्षुक मन पर नहीं अघाता।

देने की सीमा नहीं उनकी।
बुझती नहीं प्यास इस मन की ।
उतनी ही बढ़ती है तृष्णा।
जितना अमृत राम पिलाता।
दाता राम ...

कहो उऋण कैसे हो पाऊँ।
किस मुद्रा में मोल चुकाऊँ।
केवल तेरी महिमा गाऊँ।
और मुझे कुछ भी ना आता।
दाता राम ...

जब जब तेरी महिमा गाता ।
जाने क्या मुझको हो जाता ।
रुंधता कण्ठ नयन भर आते ।
बरबस मैं गुम सुम हो जाता।
दाता राम ...

दाता राम दिये ही जाता ॥

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भजन - हे दयामय आप ही संसार के आधार हो

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he dayamay aap hi sansar ke adar ho
Voice - Shiv Dayal Ji Shrivastav

हे दयामय आप ही संसार के आधार हो |
आप ही करतार हो हम सबके पालनहार हो ||

जन्म दाता आप ही माता पिता भगवान हो |
सर्व सुख दाता सखा भ्राता हो तन धन प्राण हो ||

आपके उपकार का हम ऋण चुका सकते नहीं |
बिन कृपा के शांति सुखका सार पा सकते नहीं ||

दीजिये वह मति बने हम सदगुणी संसार में |
मन हो मंजुल धर्मं मय और तन लगे उपकार में ||

हे दयामय आपका हमको सदा आधार हो |
आपके भक्तों से ही भरपूर यह परिवार हो ||

छोड़ देवें काम को और क्रोध को मद लोभ को |
शुद्ध और निर्मल हमारा सर्वदा आचार हो |

प्रेम से मिल मिल के सारे गीत गायें आपके |
मन में बहता आपका ही प्रेम पारावार हो ||

जय पिता जय जय पिता, हम जय तुम्हारी गा रहे ||
रात दिन घर में हमारे आपकी जयकार हो ||

धन धान्य घर में जो सभी कुछ, आप का ही है दिया |
उसके लिये प्रभु आपको धन्यवाद सौ सौ बार हो ||

भजन - अपने सूर्य स्वयं बन जाओ

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apane surya svayam ban jao
Voice Vishal Chandra

अपने सूर्य स्वयं बन जाओ

तुम हो दिव्य शक्ति के स्वामी
बनो अग्रणी नहीं अनुगामी
अपने ही अनुभव के बल पर
नये सृजन आधार बनाओ

चलो न मिटते पद चिंहों पर
रुको न विघ्नों बाधाओं पर
नित्य नयी आलोक रश्मि से
अपनी प्रतिभा स्वयं जगाओ

जहाँ ब्रह्मज्ञानी जाते हैं
त्याग तपस्या अपनाते हैं
जाओ अपने पौरुष से तुम
अन्तर तम का दीप जलाओ

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कीर्तन - मैया तेरा बना रहे दरबार

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maiya tera bana rahe darbar
Voice - Dr. Mrs. Premlata Paliwal

मैया तेरा बना रहे दरबार
बना रहे दरबार मैया तेरा
तेरे पावन दर पे आके मैया
हो सबका उद्धार मैया
बना रहे दरबार

प्रेम का दीपक ज्ञान की बाती
मन मन्दिर में जले दिन राती मैया
मिट जाये अंधकार मैया
बना रहे दरबार

गहरी नदिया, नाव पुरानी
जीवन की यह अथक कहानी
तू ही खेवनहार मैया
बना रहे दरबार

जो भी तेरे दर पे आया मैया
मनवांछित फल उसने पाया मैया
तेरी दया है अपार मैया
बना रहे दरबार

भजन - नारायण जिनके हिरदय में

NarayaNa Jina Ke - MP3
Narayana jinake hiradaya me
Voice - V N Shrivastav 'Bhola'

नारायण जिनके हिरदय में
सो कछु करम करे न करे रे ..

पारस मणि जिनके घर माहीं
सो धन संचि धरे न धरे .
सूरज को परकाश भयो जब
दीपक जोत जले न जले रे ..

नाव मिली जिनको जल अंदर
बाहु से नीर तरे न तरे रे .
ब्रह्मानंद जाहि घट अंतर
काशी में जाये मरे न मरे रे ..

भजन - दरशन दीजो आय प्यारे

darashan deejo aay pyaare - MP3 Audio
Voice - V N Shrivastav 'Bhola'

दरशन दीजो आय प्यारे
तुम बिनो रह्यो ना जाय ॥

जल बिनु कमल चंद्र बिनु रजनी
वैसे तुम देखे बिनु सजनी ।
आकुल व्याकुल फिरूं रैन दिन
विरह कलेजो खाय ॥

दिवस न भूख नींद नहीं रैना
मुख सों कहत न आवे बैना ।
कहा कहौं कछु समुझि न आवे
मिल कर तपत बुझाय ॥

क्यूं तरसाओ अंतरयामी
आय मिलो किरपा करो स्वामी ।
मीरा दासी जनम जनम की
पड़ी तुम्हारे पाय ॥

भजन - राधा रास बिहारी मोरे मन में आन समाये

Radha Raas Bihari - MP3 Audio
By Preeti Chandra

राधा रास बिहारी
मोरे मन में आन समाये ।

निर्गुणियों के साँवरिया ने
खोये भाग जगाये ।

मैं नाहिं जानूँ आरती पूजा
केवल नाम पुकारूं ।

साँवरिया बिन हिरदय दूजो
और न कोई धारूँ ।

चुपके से मन्दिर में जाके
जैसे दीप जलाये ॥

राधा रास बिहारी
मोरे मन में आन समाये ।

दुःखों में था डूबा जीवन
सारे सहारे टूटे ।

मोह माया ने डाले बन्धन
अन्दर बाहर छूटे ॥

कैसी मुश्किल में हरि मेरे
मुझको बचाने आये ।

राधा रास बिहारी मोरे
मन में आन समाये ॥

दुनिया से क्या लेना मुझको
मेरे श्याम मुरारी ॥

मेरा मुझमें कुछ भी नाहिं
सर्वस्व है गिरिधारी ।

शरन लगा के हरि ने मेरे
सारे दुःख मिटाये ॥

राधा रास बिहारी मोरे
मन में आन समाये ॥

भजन - नन्द नन्दन मोल लियो

Nandanandana Mol Liyo - MP3 Audio
By Shri V N Shrivastav 'Bhola'

हमें नन्द नन्दन मोल लियो
मोल लियो, मोल लियो ||

जम की भाँति
काठि मुख रायो
अभय अजात कियो ||

सब कोउ कहत
गुलाम श्याम को
सुनत सिरात हियो ||

सूरदास प्रभुजू को चेरो
(मैं तो) जूठन खाय जियो ||

(proofreading required)

भजन - हे गोविन्द राखो शरन

MP3 Audio

हे गोविन्द हे गोपाल

हे गोविन्द राखो शरन
अब तो जीवन हारे

नीर पिवन हेत गयो सिन्धु के किनारे
सिन्धु बीच बसत ग्राह चरण धरि पछारे

चार प्रहर युद्ध भयो ले गयो मझधारे
नाक कान डूबन लागे कृष्ण को पुकारे

द्वारका मे सबद दयो शोर भयो द्वारे
शन्ख चक्र गदा पद्म गरूड तजि सिधारे

सूर कहे श्याम सुनो शरण हम तिहारे
अबकी बेर पार करो नन्द के दुलारे

भजन - दीनबन्धु दीनानाथ, मेरी तन हेरिये

Dinabandhu Dinanath - MP3 Audio
By Shri V N Shrivastav 'Bhola'

दीनबन्धु दीनानाथ, मेरी तन हेरिये ॥

भाई नाहिं, बन्धु नाहिं, कटुम-परिवार नाहिं ।
ऐसा कोई मीत नाहिं, जाके ढिंग जाइये ॥

खेती नाहिं, बारी नाहिं, बनिज ब्योपार नाहिं
ऐसो कोउ साहु नाहिं जासों कछू माँगिये ॥

कहत मलूकदास छोड़ि दे पराई आस,
रामधनी पाइकै अब काकी सरन जाइये ॥

भजन - हरि, पतित पावन सुने

hari Patit Pavan Sune - MP3 Audio
By Shri V N Shrivastav 'Bhola'

मैं हरि, पतित पावन सुने ।
मैं पतित, तुम पतित-पावन, दोउ बानक बने॥

ब्याध गनिका गज अजामिल, साखि निगमनि भने।
और अधम अनेक तारे, जात कापै गने॥

जानि नाम अजानि लीन्हें नरक जमपुर मने।
दास तुलसी सरन आयो राखिये अपने॥

भजन - प्रभु तेरो नाम

Prabhu Tero Naam - MP3 Audio
By Lata Mangeshkar for the Film 'Hum Dono'

प्रभु तेरो नाम
जो ध्याये फल पाये,
सुख लाये तेरो नाम
प्रभु तेरो नाम
जो ध्याये फल पाये,
सुख लाये तेरो नाम

तेरी दया हो जाये तो दाता
तेरी दया हो जाये तो दाता
जीवन धन मिल जाये, मिल जाये
मिल जाये, सुख लाये तेरो नाम
जो ध्याये फल पाये,
सुख दायी तेरो नाम

तू दानी तू अन्तरयामी
तू दानी
तू दानी तू अन्तरयामी
तेरी कृपा हो जाये तो स्वामी
हर बिगड़ी बन जाये
जीवन धन मिल जाये, मिल जाये
मिल जाये, सुख लाये तेरो नाम
जो ध्याये फल पाये,
सुख लाये तेरो नाम

बस जाये मोरा सूना अंगना
बस जाये
बस जाये मोरा सूना अंगना
खिल जाये मुरझाया सपना
जीवन में रस आये
जीवन धन मिल जाये, मिल जाये
मिल जाये, सुख लाये तेरो नाम

जो ध्याये फल पाये, सुख लाये तेरो नाम
जो ध्याये फल पाये, सुख लाये तेरो नाम

भजन - अंखियाँ हरि दरसन की प्यासी

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अंखियाँ हरि दरसन की प्यासी।

देख्यौ चाहति कमलनैन कौ,
निसि-दिन रहति उदासी।।

आए ऊधै फिरि गए आँगन,
डारि गए गर फांसी।

केसरि तिलक मोतिन की माला,
वृन्दावन के बासी।।

काहू के मन को कोउ न जानत,
लोगन के मन हांसी।

सूरदास प्रभु तुम्हरे दरस कौ,
करवत लैहौं कासी।।

भजन - तुम मेरी राखो लाज हरि

Tum Meri Rakho Laaj Hari - MP3 Audio
By Shri V N Shrivastav 'Bhola'

तुम मेरी राखो लाज हरि

तुम जानत सब अन्तर्यामी
करनी कछु ना करी
तुम मेरी राखो लाज हरि

अवगुन मोसे बिसरत नाहिं
पलछिन घरी घरी
सब प्रपंच की पोट बाँधि कै
अपने सीस धरी
तुम मेरी राखो लाज हरि

दारा सुत धन मोह लिये हौं
सुध-बुध सब बिसरी
सूर पतित को बेगि उबारो
अब मोरि नाव भरी
तुम मेरी राखो लाज हरि

भजन - श्याम आये नैनों में

Shyam Aaye Naino Me - MP3 Audio
By Shri V N Shrivastav 'Bhola'

श्याम आये नैनों में
बन गयी मैं साँवरी

शीश मुकुट बंसी अधर
रेशम का पीताम्बर
पहने है वनमाल, सखी
सलोनो श्याम सुन्दर
कमलों से चरणों पर
जाऊँ मैं वारि री

मैं तो आज फूल बनूँ
धूप बनूँ दीप बनूँ
गाते गाते गीत सखी
आरती का दीप बनूँ
आज चढ़ूँ पूजा में
बन के एक पाँखुड़ी

भजन - रे मन हरि सुमिरन करि लीजै

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रे मन हरि सुमिरन करि लीजै ॥

हरिको नाम प्रेमसों जपिये, हरिरस रसना पीजै ।
हरिगुन गाइय, सुनिय निरंतर, हरि-चरननि चित दीजै ॥

हरि-भगतनकी सरन ग्रहन करि, हरिसँग प्रीति करीजै ।
हरि-सम हरि जन समुझि मनहिं मन तिनकौ सेवन कीजै ॥

हरि केहि बिधिसों हमसों रीझै, सो ही प्रश्न करीजै ।
हरि-जन हरिमारग पहिचानै, अनुमति देहिं सो कीजै ॥

हरिहित खाइय, पहिरिय हरिहित, हरिहित करम करीजै ।
हरि-हित हरि-सन सब जग सेइय, हरिहित मरिये जीजै ॥

ganapati pujan vidhi - Part 1

The following puja vidhi for ganapati pujan is taken from 'Satyanarayana ki Katha' by Shri Pandit Dinanath Bhargava Dinesh. It has hindi verse translation along with the sanskrit shlokas.


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श्री गणपति ध्यान तथा आवाहन

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय,
लम्बोदराय सकलाय जगत्‌ हिताय ।
नागाननाय श्रुतियज्ञभूषिताय,
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ॥

ॐ भूर्भुवः स्वः गणपते !
इहागच्छ इहातिष्ठ सुप्रतिष्ठो भव
मम पूजा गृहाण !


गणानान्त्वा गणपति (गुँ) हवामहे
प्रियाणान्त्वा प्रियपति (गुँ) हवामहे
निधिनान्त्वा निधिपति (गुँ) हवामहे
वसो मम ।
आहमजानि गर्भधमात्वमजासि गर्भधम्‌ ॥

देवों के प्रिय विघ्ननियन्ता, लम्बोदर भव-भय हारी ।
गिरिजानन्दन देव गजानन, यज्ञ-विभूषित श्रुतिधारी ॥
मंगलकारी दुःख-विदारी, तेजोमय जय वरदायक ।
बार-बार जय नमस्कार, स्वीकार करो हे गणनायक ॥

देव आइये यहाँ बैठिये, पूजा को करिये स्वीकार ।
भूर्भुवः स्वः सुख समृद्धि के, खोल दीजिये मंगल द्वार ॥

गणनायक वर बुद्धि विधायक, सदा सहायक भय-भंजन ।
प्रियपति, अति प्रिय वस्तु प्रदायक, जगत्राता जन-मन-रंजन ॥
निधिपति, नव-निधियों के दाता, भाग्य-विधाता भव-भावन ।
श्रद्धा से हम करते सादर, देव! आपका आवाहन ॥
विश्व उदर में टिका आपके, विश्वरूप गणराज महान ।
सर्व शक्ति संचारक  तारक, दो अपने स्वरूप का ज्ञान ॥