Beet Gaye Din Bhajan Bina Re
by Anjana Bhattacharya and Premjeet Kaur
from Shri Ram Sharanam, Delhi.
बीत गये दिन भजन बिना रे।
भजन बिना रे भजन बिना रे॥
बाल अवस्था खेल गवांयो।
जब यौवन तब मान घना रे॥
लाहे कारण मूल गवाँयो।
अजहुं न गयी मन की तृष्णा रे॥
कहत कबीर सुनो भई साधो।
पार उतर गये संत जना रे॥
हिन्दी भक्ति गीत, भजन, कीर्तन, आरती, चालीसा - शब्द एवं गान : bhajans.ramparivar.com
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भजन - रघुबर तुमको मेरी लाज
Raghubar Tum Ko Meri Laj
by Premjeet Kaur
from Shree Ram Sharanam
रघुबर तुमको मेरी लाज
सदा सदा मैं शरण तिहारी
तुम हो ग़रीब नेवाज
रघुबर तुम हो ग़रीब नेवाज
रघुबर तुमको मेरी लाज
पतित उधारन विरद तिहारो
श्रवन न सुनी आवाज
हूँ तो पतित पुरातन कहिये
पार उतारो जहाज रघुबर
पार उतारो जहाज
रघुबर ...
अघ खण्डन दुख भंजन जन के
यही तिहारो काज
रघुबर यही तिहारो काज
तुलसीदास पर किरपा कीजे
भक्ति दान देहु आज
रघुबर भक्ति दान देहु आज
रघुबर तुमको मेरी लाज ...
by Premjeet Kaur
from Shree Ram Sharanam
रघुबर तुमको मेरी लाज
सदा सदा मैं शरण तिहारी
तुम हो ग़रीब नेवाज
रघुबर तुम हो ग़रीब नेवाज
रघुबर तुमको मेरी लाज
पतित उधारन विरद तिहारो
श्रवन न सुनी आवाज
हूँ तो पतित पुरातन कहिये
पार उतारो जहाज रघुबर
पार उतारो जहाज
रघुबर ...
अघ खण्डन दुख भंजन जन के
यही तिहारो काज
रघुबर यही तिहारो काज
तुलसीदास पर किरपा कीजे
भक्ति दान देहु आज
रघुबर भक्ति दान देहु आज
रघुबर तुमको मेरी लाज ...
लेबल:
*राम,
Bhajan,
MP3,
तुलसीदास,
प्रेमजीत कौर,
भोला भैया,
श्री राम शरणम्
भजन - तुम तजि और कौन पै जाऊं .
Tum Taji Aur Kaun Pai Jaun
by Shri V N Shrivastav 'Bhola'
from Shree Ram Sharanam
तुम तजि और कौन पै जाऊं .
काके द्वार जाइ सिर नाऊं पर हाथ कहां बिकाऊं ..
ऐसो को दाता है समरथ जाके दिये अघाऊं .
अंतकाल तुम्हरो सुमिरन गति अनत कहूं नहिं पाऊं ..
(रंक अयाची कियो सुदामा, दियो अभय पद ढ़ाऊँ ।
कामधेनु चिंतामनि दीनों, कलप वृच्छ तर छाऊँ ।)
भवसमुद्र अति देख भयानक मन में अधिक डराऊं .
कीजै कृपा सुमिरि अपनो पन सूरदास बलि जाऊं ..
by Shri V N Shrivastav 'Bhola'
from Shree Ram Sharanam
तुम तजि और कौन पै जाऊं .
काके द्वार जाइ सिर नाऊं पर हाथ कहां बिकाऊं ..
ऐसो को दाता है समरथ जाके दिये अघाऊं .
अंतकाल तुम्हरो सुमिरन गति अनत कहूं नहिं पाऊं ..
(रंक अयाची कियो सुदामा, दियो अभय पद ढ़ाऊँ ।
कामधेनु चिंतामनि दीनों, कलप वृच्छ तर छाऊँ ।)
भवसमुद्र अति देख भयानक मन में अधिक डराऊं .
कीजै कृपा सुमिरि अपनो पन सूरदास बलि जाऊं ..
लेबल:
Bhajan,
MP3,
भोला भैया,
श्री राम शरणम्,
सूरदास
भजन - नाम जपन क्यों छोड़ दिया
Nam Japan Kyo Chod Diya
by Anjana Bhattacharya & Premjeet Kaur
from Shree Ram Sharanam
नाम जपन क्यों छोड़ दिया
क्रोध न छोड़ा झूठ न छोड़ा
सत्य बचन क्यों छोड दिया
झूठे जग में दिल ललचा कर
असल वतन क्यों छोड दिया
कौड़ी को तो खूब सम्भाला
लाल रतन क्यों छोड दिया
जिन सुमिरन से अति सुख पावे
तिन सुमिरन क्यों छोड़ दिया
खालस इक भगवान भरोसे
तन मन धन क्यों ना छोड़ दिया
नाम जपन क्यों छोड़ दिया ॥
by Anjana Bhattacharya & Premjeet Kaur
from Shree Ram Sharanam
नाम जपन क्यों छोड़ दिया
क्रोध न छोड़ा झूठ न छोड़ा
सत्य बचन क्यों छोड दिया
झूठे जग में दिल ललचा कर
असल वतन क्यों छोड दिया
कौड़ी को तो खूब सम्भाला
लाल रतन क्यों छोड दिया
जिन सुमिरन से अति सुख पावे
तिन सुमिरन क्यों छोड़ दिया
खालस इक भगवान भरोसे
तन मन धन क्यों ना छोड़ दिया
नाम जपन क्यों छोड़ दिया ॥
लेबल:
Bhajan,
MP3,
अंजना भट्टाचार्य,
प्रेमजीत कौर,
भोला भैया,
श्री राम शरणम्
भजन - बोले बोले रे राम चिरैया रे
Bole Bole Re Ram Chiraiya
by V N Shrivastav 'Bhola
from Shree Ram Sharanam
बोले बोले रे राम चिरैया रे
बोले रे राम चिरैया।
मेरी साँसों के पिंजरे में
घड़ी घड़ी बोले।
घड़ी घड़ी बोले।
बोले बोले रे ...
ना कोई खिड़की ना कोई डोरी।
ना कोई चोर करे जो चोरी
ऐसा मेरा है राम रमैया रे।
बोले बोले रे ...
उसी की नैया वही खिवैया।
लहर रही उसकी लहरैया।
चाहे लाख चले पुरवैया रे।
बोले बोले रे ...
by V N Shrivastav 'Bhola
from Shree Ram Sharanam
बोले बोले रे राम चिरैया रे
बोले रे राम चिरैया।
मेरी साँसों के पिंजरे में
घड़ी घड़ी बोले।
घड़ी घड़ी बोले।
बोले बोले रे ...
ना कोई खिड़की ना कोई डोरी।
ना कोई चोर करे जो चोरी
ऐसा मेरा है राम रमैया रे।
बोले बोले रे ...
उसी की नैया वही खिवैया।
लहर रही उसकी लहरैया।
चाहे लाख चले पुरवैया रे।
बोले बोले रे ...
लेबल:
*राम,
Bhajan,
MP3,
भोला भैया,
श्री राम शरणम्
भजन - मेरे मन मन्दिर मे राम बिराजे
Mere Man Mandir Mein Ram Virajein
by V N Shrivastav 'Bhola
from Shree Ram Sharanam
मेरे मन मन्दिर मे राम बिराजे।
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
अधिष्ठान मेरा मन होवे।
जिसमे राम नाम छवि सोहे ।
आँख मूंदते दर्शन होवे
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
मेरे मन ...
सांस सांस गुरु मन्त्र उचारूं।
रोमरोम से राम पुकारूं ।
आँखिन से बस तुम्हे निहारूं।
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
मेरे मन ...
औषधि रामनाम की खाऊं।
जनम मरन के दुख बिसराऊं ।
हंस हंस कर तेरे घर जाऊं।
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
मेरे मन ...
बीते कल का शोक करूं ना।
आज किसी से मोह करूं ना ।
आने वाले कल की चिन्ता।
नहीं सताये हम को स्वामी ॥
मेरे मन ...
राम राम भजकर श्री राम।
करें सभी जन उत्तम काम ।
सबके तन हो साधन धाम।
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
मेरे मन ...
आँखे मूंद के सुनूँ सितार।
राम राम सुमधुर झनकार ।
मन में हो अमृत संचार।
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
मेरे मन ...
मेरे मन मन्दिर मे राम बिराजे।
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
by V N Shrivastav 'Bhola
from Shree Ram Sharanam
मेरे मन मन्दिर मे राम बिराजे।
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
अधिष्ठान मेरा मन होवे।
जिसमे राम नाम छवि सोहे ।
आँख मूंदते दर्शन होवे
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
मेरे मन ...
सांस सांस गुरु मन्त्र उचारूं।
रोमरोम से राम पुकारूं ।
आँखिन से बस तुम्हे निहारूं।
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
मेरे मन ...
औषधि रामनाम की खाऊं।
जनम मरन के दुख बिसराऊं ।
हंस हंस कर तेरे घर जाऊं।
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
मेरे मन ...
बीते कल का शोक करूं ना।
आज किसी से मोह करूं ना ।
आने वाले कल की चिन्ता।
नहीं सताये हम को स्वामी ॥
मेरे मन ...
राम राम भजकर श्री राम।
करें सभी जन उत्तम काम ।
सबके तन हो साधन धाम।
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
मेरे मन ...
आँखे मूंद के सुनूँ सितार।
राम राम सुमधुर झनकार ।
मन में हो अमृत संचार।
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
मेरे मन ...
मेरे मन मन्दिर मे राम बिराजे।
ऐसी जुगति करो हे स्वामी ॥
लेबल:
*गुरु,
*राम,
Bhajan,
भोला भैया,
श्री राम शरणम्
भजन - गुरु चरनन मे शीश झुकाले
Guru Charanan Me Shish Jhuka Le
by V N Shrivastav 'Bhola
from Shree Ram Sharanam
गुरु चरनन मे शीश झुकाले
जनम सफल हो जायेगा
गुरुदर्शन से बिन माँगे ही
कृपा राम की पायेगा
जनम सफ़ल हो जायेगा
गुरु चरनन में शीश झुका ले
चहु दिश गहन अन्धेरा छाया
पग पग भरमाती है माया
राम नाम की ज्योति जगेगी
अन्धकार मिट जायेगा
गुरु चरनन में शीश झुका ले
गुरु आदेश मान मन मेरे
ध्यान जाप चिन्तन कर ले रे
जनम जनम के पाप कटेंगे
मोक्ष द्वार खुल जायेगा
गुरु चरनन में शीश झुका ले
जन्म सफ़ल हो जायेगा
by V N Shrivastav 'Bhola
from Shree Ram Sharanam
गुरु चरनन मे शीश झुकाले
जनम सफल हो जायेगा
गुरुदर्शन से बिन माँगे ही
कृपा राम की पायेगा
जनम सफ़ल हो जायेगा
गुरु चरनन में शीश झुका ले
चहु दिश गहन अन्धेरा छाया
पग पग भरमाती है माया
राम नाम की ज्योति जगेगी
अन्धकार मिट जायेगा
गुरु चरनन में शीश झुका ले
गुरु आदेश मान मन मेरे
ध्यान जाप चिन्तन कर ले रे
जनम जनम के पाप कटेंगे
मोक्ष द्वार खुल जायेगा
गुरु चरनन में शीश झुका ले
जन्म सफ़ल हो जायेगा
लेबल:
*गुरु,
Bhajan,
MP3,
भोला भैया,
श्री राम शरणम्
भजन - हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम
Listen to Hariye Na Himmat MP3
by V N Shrivastav 'Bhola
from Shree Ram Sharanam
हारिये ना हिम्मत, बिसारिये ना राम .
तू क्यों सोचे बंदे, सब की सोचे राम ..
दीपक ले के हाथ में, सतगुरु राह दिखाये .
पर मन मूरख बावरा, आप अँधेरे जाए ..
पाप पुण्य और भले बुरे की, वो ही करता तोल .
ये सौदे नहीं जगत हाट के, तू क्या जाने मोल ..
जैसा जिस का काम, पाता वैसे दाम .
तू क्यों सोचे बंदे, सब की सोचे राम ..
हारिये ना हिम्मत, बिसारिये ना राम .
तू क्यों सोचे बंदे, सब की सोचे राम ..
by V N Shrivastav 'Bhola
from Shree Ram Sharanam
हारिये ना हिम्मत, बिसारिये ना राम .
तू क्यों सोचे बंदे, सब की सोचे राम ..
दीपक ले के हाथ में, सतगुरु राह दिखाये .
पर मन मूरख बावरा, आप अँधेरे जाए ..
पाप पुण्य और भले बुरे की, वो ही करता तोल .
ये सौदे नहीं जगत हाट के, तू क्या जाने मोल ..
जैसा जिस का काम, पाता वैसे दाम .
तू क्यों सोचे बंदे, सब की सोचे राम ..
हारिये ना हिम्मत, बिसारिये ना राम .
तू क्यों सोचे बंदे, सब की सोचे राम ..
लेबल:
*राम,
Bhajan,
MP3,
भोला भैया,
श्री राम शरणम्
भजन - पायो निधि राम नाम
Download mp3 by V N S (Bhola)
पायो निधि राम नाम, पायो निधि राम नाम .
सकल शांति सुख निधान, सकल शांति सुख निधान .
पायो निधि राम नाम ..
सुमिरन से पीर हरै, काम क्रोध मोह जरै .
आनंद रस अजर झरै, होवै मन पूर्ण काम .
पायो निधि राम नाम ..
रोम रोम बसत राम, जन जन में लखत राम .
सर्व व्याप्त, ब्रह्म राम, सर्वशक्तिमान राम .
पायो निधि राम नाम ..
ज्ञान, ध्यान, भजन, राम; पाप, ताप, हरण नाम .
सुविचारित तथ्य एक, आदि, मध्य, अंत, राम ..
पायो निधि राम नाम ..
पायो निधि राम नाम, पायो निधि राम नाम .
सकल शांति सुख निधान, सकल शांति सुख निधान .
पायो निधि राम नाम ..
सुमिरन से पीर हरै, काम क्रोध मोह जरै .
आनंद रस अजर झरै, होवै मन पूर्ण काम .
पायो निधि राम नाम ..
रोम रोम बसत राम, जन जन में लखत राम .
सर्व व्याप्त, ब्रह्म राम, सर्वशक्तिमान राम .
पायो निधि राम नाम ..
ज्ञान, ध्यान, भजन, राम; पाप, ताप, हरण नाम .
सुविचारित तथ्य एक, आदि, मध्य, अंत, राम ..
पायो निधि राम नाम ..
भजन - राम बिनु तन को
Ram Binu Tan Ko
By V N Shrivastav 'Bhola'
from Shri Ram Sharanam, Delhi.
राम बिनु तन को ताप न जाई।
जल में अगन रही अधिकाई॥
राम बिनु तन को ताप न जाई॥
तुम जलनिधि मैं जलकर मीना।
जल में रहहि जलहि बिनु जीना॥
राम बिनु तन को ताप न जाई॥
तुम पिंजरा मैं सुवना तोरा।
दरसन देहु भाग बड़ मोरा॥
राम बिनु तन को ताप न जाई॥
तुम सद्गुरु मैं प्रीतम चेला।
कहै कबीर राम रमूं अकेला॥
राम बिनु तन को ताप न जाई॥
By V N Shrivastav 'Bhola'
from Shri Ram Sharanam, Delhi.
राम बिनु तन को ताप न जाई।
जल में अगन रही अधिकाई॥
राम बिनु तन को ताप न जाई॥
तुम जलनिधि मैं जलकर मीना।
जल में रहहि जलहि बिनु जीना॥
राम बिनु तन को ताप न जाई॥
तुम पिंजरा मैं सुवना तोरा।
दरसन देहु भाग बड़ मोरा॥
राम बिनु तन को ताप न जाई॥
तुम सद्गुरु मैं प्रीतम चेला।
कहै कबीर राम रमूं अकेला॥
राम बिनु तन को ताप न जाई॥
भजन - हरि तुम हरो जन की भीर
Hari Tum Haro Jan Ki Bheer
By Anjana Bhattacharya
from Shree Ram Sharanam, Delhi.
हरि तुम हरो जन की भीर,
द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढ़ायो चीर॥
भगत कारण रूप नरहरि धर्यो आप सरीर ॥
हिरण्यकश्यप मारि लीन्हो धर्यो नाहिन धीर॥
बूड़तो गजराज राख्यो कियौ बाहर नीर॥
दासी मीरा लाल गिरधर चरणकंवल सीर॥
By Anjana Bhattacharya
from Shree Ram Sharanam, Delhi.
हरि तुम हरो जन की भीर,
द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढ़ायो चीर॥
भगत कारण रूप नरहरि धर्यो आप सरीर ॥
हिरण्यकश्यप मारि लीन्हो धर्यो नाहिन धीर॥
बूड़तो गजराज राख्यो कियौ बाहर नीर॥
दासी मीरा लाल गिरधर चरणकंवल सीर॥
लेबल:
Bhajan,
MP3,
अंजना भट्टाचार्य,
भोला भैया,
मीराबाई,
श्री राम शरणम्
भजन - घूँघट का पट खोल रे
Ghuunghat Ka Pat Khol
by Anjana Bhattacharya
from Shree Ram Sharanam, Delhi.
घूँघट का पट खोल रे,
तोहे पिया मिलेंगे।
घट घट रमता राम रमैया,
कटुक बचन मत बोल रे॥
रंगमहल में दीप बरत है,
आसन से मत डोल रे॥
कहत कबीर सुनो भाई साधों,
अनहद बाजत ढोल रे॥
by Anjana Bhattacharya
from Shree Ram Sharanam, Delhi.
घूँघट का पट खोल रे,
तोहे पिया मिलेंगे।
घट घट रमता राम रमैया,
कटुक बचन मत बोल रे॥
रंगमहल में दीप बरत है,
आसन से मत डोल रे॥
कहत कबीर सुनो भाई साधों,
अनहद बाजत ढोल रे॥
लेबल:
Bhajan,
MP3,
अंजना भट्टाचार्य,
कबीर,
भोला भैया,
श्री राम शरणम्
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